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नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद नई चुनौती: नदियों के किनारे मिले सैकड़ों शव, संक्रमण का खतरा बढ़ा

नेपाल बाढ़: 939 मौतें, 3,925 लोग लापता; नदी किनारे मिल रहे शव, संक्रमण का खतरा बढ़ा

काठमांडू/नई दिल्ली | 1 सितंबर 2026

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ के बाद तबाही का असर अब राहत और बचाव अभियान से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती बनता जा रहा है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद नदियों के किनारों और निचले इलाकों में बड़ी संख्या में शव बरामद किए जा रहे हैं। कई शव लंबे समय तक पानी और मलबे में रहने के कारण खराब हो चुके हैं, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।

नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के सोमवार शाम तक के आंकड़ों के अनुसार, आपदा में 939 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि 3,925 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। 279 लोग घायल हुए हैं और 168 घायलों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

शवों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शव अपने मूल स्थान से काफी दूर बहकर पहुंच रहे हैं। लंबे समय तक पानी और मलबे में रहने के कारण कुछ शवों की हालत इतनी खराब है कि सामान्य तरीके से पहचान करना कठिन हो गया है।

नेपाल के अस्पतालों और शवगृहों में लापता लोगों के परिजन लगातार अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर शवों की तस्वीरें प्रदर्शित की जा रही हैं ताकि परिवार पहचान में मदद कर सकें। अधिकारियों ने पहचान की प्रक्रिया के लिए डीएनए नमूने लेने की व्यवस्था भी की है।

अस्थायी दफन की जरूरत क्यों पड़ी ?

बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण अस्पतालों और शवगृहों की क्षमता पर दबाव बढ़ गया है। कई स्थानों पर सुरक्षित तरीके से शवों को संरक्षित करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कुछ अज्ञात और लंबे समय से पड़े शवों के अस्थायी दफन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

यह कदम स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि शवों की पहचान और डीएनए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि बाद में परिजनों को पहचान की पुष्टि होने पर उचित जानकारी दी जा सके।

क्या महामारी का खतरा है ?

बाढ़ के बाद संक्रमण का खतरा वास्तविक चिंता है, लेकिन इसे सीधे तौर पर “महामारी फैल चुकी है” कहना अभी सही नहीं होगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सड़ते मानव और पशु-अवशेष, दूषित पानी, खराब स्वच्छता, असुरक्षित भोजन और मच्छरों की बढ़ती संख्या संक्रामक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, बुखार, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और टाइफाइड जैसी जल एवं स्वच्छता से जुड़ी बीमारियों की आशंका पर विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

इसलिए “महामारी का खतरा” एक संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम के रूप में समझना चाहिए, न कि इस दावे के रूप में कि नेपाल में महामारी फैल चुकी है।

लोगों को क्या सावधानी बरतने को कहा गया ?

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों से दूषित या संदिग्ध पानी नहीं पीने और बाढ़ के संपर्क में आए खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई है। राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में साफ पेयजल, सुरक्षित भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी

आपदा के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में भी लोगों के फंसे होने की आशंका है। नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सुरंगों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनरी और नियंत्रित विस्फोट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं।

भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें भी सुरंग बचाव अभियान में तकनीकी सहायता दे रही हैं। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत फोरेंसिक और डीएनए विशेषज्ञता भी हासिल की है। 30 अगस्त के सरकारी अपडेट के अनुसार, भारत की 18 सदस्यीय फोरेंसिक टीम डीएनए विश्लेषण के लिए नेपाल पहुंच चुकी थी।

26 अगस्त को कैसे आई तबाही ?

भोटेकोशी नदी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों को बुरी तरह प्रभावित किया। शुरुआती रिपोर्टों में हिमालयी क्षेत्र में बर्फ, चट्टान और मलबे के बड़े पैमाने पर खिसकने/ग्लेशियर संबंधी घटना को बाढ़ से जोड़ा गया है। बाढ़ के पानी और मलबे ने घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। घटना के कारणों और भूवैज्ञानिक परिस्थितियों का आकलन अभी भी जारी है।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल सरकार के अनुसार उसका प्राथमिक लक्ष्य लापता लोगों का पता लगाना, जीवित लोगों को बचाना, घायलों को चिकित्सा सहायता देना और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है। 31 अगस्त तक हजारों सुरक्षाकर्मी बचाव अभियान में लगाए गए थे और 11,000 से अधिक लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी गई।

इस बीच नेपाल सरकार ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि आपदा से संबंधित केवल आधिकारिक रूप से सत्यापित आंकड़ों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट सूचनाओं से बचें। बाढ़ के बाद फर्जी और एआई-निर्मित तस्वीरों तथा वीडियो के प्रसार की भी शिकायतें सामने आई हैं।

हिंदी विंडो की तथ्य-जांच टिप्पणी:
मृतकों और लापता लोगों की संख्या राहत-बचाव अभियान के साथ लगातार बदल सकती है। इसलिए इस खबर में आंकड़ों को 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध NDRRMA/नेपाल सरकार के अपडेट के अनुसार रखा गया है। नए आधिकारिक आंकड़े आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

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