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सत्य निकेतन हादसे के बाद CJP की 7 मांगें: ‘PG माफिया’ की जांच से लेकर देशभर में छात्र आवासों के स्ट्रक्चरल ऑडिट तक

दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र-पीजी की बहुमंजिला इमारत ढहने के बाद Cockroach Janta Party ने स्वतंत्र जांच, छात्र आवासों का इंजीनियरिंग-ग्रेड सुरक्षा ऑडिट, सार्वजनिक सेफ्टी डेटाबेस और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग की है।

नई दिल्ली | हिंदी विंडो न्यूज़ डेस्क

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्र-पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही बहुमंजिला इमारत के ढहने की घटना ने राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा, अवैध निर्माण और नियामकीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि विभिन्न रिपोर्टों में हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया और प्रशासन ने जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।

इसी पृष्ठभूमि में Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को सात मांगें सामने रखीं। पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सहित देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में छात्रों के लिए चल रहे निजी PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच की जरूरत है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि राजनीतिक संरक्षण, ‘PG माफिया’ या किसी अधिकारी की मिलीभगत संबंधी आरोप फिलहाल CJP के दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र जांच में साबित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।

क्या हुआ था सत्य निकेतन में ?

साउथ-वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक एक बहुमंजिला इमारत 6 सितंबर को अचानक ढह गई। इमारत का इस्तेमाल लड़कों के PG/छात्र आवास के तौर पर किया जा रहा था।

पुलिस और अन्य एजेंसियों के अनुसार हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत से जुड़ा काम चल रहा था। शुरुआती जांच में बेसमेंट में पानी जमा होने, निर्माण/मरम्मत गतिविधियों और इमारत की संरचनात्मक स्थिति जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, हादसे के बाद मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और बाद में मालिक, उसकी पत्नी और बेटे की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं।

CJP ने क्यों उठाया ‘PG माफिया’ का मुद्दा ?

CJP प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों की बड़ी आबादी के कारण निजी PG कारोबार तेजी से बढ़ा है, लेकिन कई जगह सुरक्षा और भवन नियमों के पालन पर पर्याप्त निगरानी नहीं है।

CJP ने मांग की है कि जांच केवल हादसे में ढही इमारत के मालिक तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी जांचा जाए कि क्या किसी स्तर पर राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के कारण अवैध या असुरक्षित PG संचालित हो रहे थे।

हालांकि, यह आरोप अभी स्वतंत्र जांच का विषय है।

CJP की सात प्रमुख मांगें

1. स्वतंत्र आपराधिक जांच

CJP ने मांग की है कि जांच केवल इमारत के मालिक तक सीमित न रहे। संगठन ने मालिक, राजनीतिक लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बीच कथित संबंधों की भी स्वतंत्र आपराधिक जांच की मांग की है।

पार्टी का कहना है कि कथित व्यापक ‘PG माफिया’ की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

2. छात्र आवासों का इंजीनियरिंग-ग्रेड Structural Audit

CJP की दूसरी मांग देशभर में उन इमारतों का समयबद्ध संरचनात्मक ऑडिट कराने की है, जहां छात्र रहते या पढ़ते हैं।

इसमें स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, PG और छात्र बहुल इलाकों की इमारतों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।

3. 13 जिला समितियों के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं

CJP ने दिल्ली में गठित 13 जिला स्तरीय समितियों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।

संगठन के अनुसार, इन समितियों को भवनों की जांच, अवैध निर्माण की पहचान और सुरक्षा नियमों के प्रवर्तन जैसे कामों से जोड़ा गया था।

CJP ने इन समितियों से संबंधित रिकॉर्ड 48 घंटे में सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें समिति के सदस्यों की जानकारी, निरीक्षण रिपोर्ट, असुरक्षित या अवैध इमारतों की संख्या, नोटिस, सील या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी शामिल करने को कहा गया है।

CJP ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या सत्य निकेतन की संबंधित इमारत का इन समितियों द्वारा निरीक्षण किया गया था और अगर नहीं किया गया तो क्यों नहीं किया गया।

4. छात्रों के लिए Public Safety Database

CJP ने एक सार्वजनिक और ऑनलाइन खोजे जा सकने वाले डेटाबेस की मांग की है।

इसमें छात्र यह देख सकें कि जिस PG, हॉस्टल या छात्र आवास में वे रहने जा रहे हैं, वह अधिकृत है या नहीं और उसके पास आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र मौजूद हैं या नहीं।

यह व्यवस्था छात्रों और अभिभावकों को आवास चुनते समय सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रस्तावित की गई है।

5. दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए अधिक हॉस्टल

CJP ने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के छात्रों के लिए अधिक सरकारी/संस्थागत हॉस्टल बनाने की मांग की है।

संगठन का दावा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की मौजूदा हॉस्टल क्षमता छात्रों की कुल संख्या की तुलना में बहुत कम है। उसके अनुसार लगभग 7,000 छात्रों के लिए ही मौजूदा व्यवस्था उपलब्ध है, जबकि विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या लाखों में है।

6. मृतकों और घायलों के लिए मुआवजा

CJP ने हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को ₹1 करोड़ और घायलों को वित्तीय सहायता देने की मांग की है।

दैनिक ट्रिब्यून की रिपोर्ट में घायलों के लिए ₹20 लाख की मांग का उल्लेख है, जबकि ABP की रिपोर्ट में CJP की मांग ₹30 लाख बताई गई है। इसलिए प्रकाशन के लिए इस राशि को स्पष्ट स्रोत के बिना निश्चित रूप में प्रस्तुत करने के बजाय “घायलों के लिए मुआवजे की मांग” लिखना अधिक सुरक्षित संपादकीय विकल्प होगा।

7. मंत्री स्तर पर जवाबदेही

CJP ने दिल्ली के शहरी विकास एवं योजना तथा शिक्षा मंत्री आशीष सूद की मंत्री स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

CJP का आरोप है कि 13 जिला स्तरीय समितियों के कामकाज को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाना चाहिए।

यह मांग भी संगठन का राजनीतिक आरोप और जवाबदेही की मांग है—इसे किसी स्थापित प्रशासनिक दोष के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।

प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई हुई ?

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने चार मंजिल से अधिक ऊंची अवैध निर्माण वाली इमारतों को सील करने के आदेश की जानकारी दी है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी घायलों का हाल जाना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इस बीच हादसे की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जारी है।

बड़ा सवाल: क्या छात्र आवासों की सुरक्षा की कोई राष्ट्रीय व्यवस्था होनी चाहिए ?

सत्य निकेतन की घटना केवल एक इमारत के ढहने की कहानी नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाती है कि देश के शिक्षा केंद्रों में बड़ी संख्या में रहने वाले छात्रों के लिए निजी PG और हॉस्टल कितने सुरक्षित हैं।

छात्र अक्सर कॉलेज या कोचिंग संस्थान के आसपास कम समय में आवास तलाशते हैं। ऐसे में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, स्वीकृत नक्शा, अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्रों की जानकारी उनके लिए आसानी से उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

CJP की मांगों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है—क्या किसी छात्र को PG लेने से पहले ऑनलाइन यह पता चल सकेगा कि वह इमारत वास्तव में सुरक्षित और अधिकृत है या नहीं ?

फिलहाल सत्य निकेतन हादसे की जांच जारी है और यह देखना बाकी है कि जांच एजेंसियां हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों को लेकर क्या निष्कर्ष देती हैं।

हिंदी विंडो का संपादकीय नोट: इस रिपोर्ट में राजनीतिक दल/संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।

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