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टीएमसी के नए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह पर हिमंत सरमा का तंज, बोले—“फुटबॉल भी पिचक जाएगा”; ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

हिमंत सरमा का तंज

TMC Symbol Row: ममता गुट को मिला Football Player Symbol, हिमंत सरमा का तंज—‘फुटबॉल पिचक जाएगा’ !

‘फुटबॉल भी पिचक जाएगा’—टीएमसी के नए चुनाव चिन्ह पर हिमंत सरमा का तंज, ममता बनर्जी ने SC में दी चुनौती

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब चुनावी मैदान से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को मिले नए चुनाव चिन्ह ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ को लेकर तंज कसा है। सरमा ने कहा कि जिस तरह तृणमूल कांग्रेस का पुराना चुनाव चिन्ह विवाद के कारण इस्तेमाल से बाहर हुआ है, उसी तरह नया फुटबॉल चिन्ह भी जल्द “पिचक” जाएगा। उनका यह बयान राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया है।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘Flowers & Grass’ यानी दो फूल और घास वाले आरक्षित चुनाव चिन्ह को फिलहाल दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह फैसला पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच लिया गया। इसके बाद आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए।

चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम दिया गया और उसका चुनाव चिन्ह ‘Football Player’ रखा गया। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट, जिसका नेतृत्व अरूप रॉय से जुड़ा बताया गया है, को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ यानी लिफाफा चुनाव चिन्ह मिला। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के संदर्भ में अंतरिम है।

चुनाव आयोग की कार्रवाई के पीछे मूल विवाद यह है कि दोनों पक्ष खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए पार्टी के नाम, संगठन और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं। आयोग ने इस विवाद को अंतिम रूप से तय करने से पहले अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान देने का फैसला किया। आयोग के मुताबिक, अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना है।

यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले विधानसभा उपचुनावों से पहले सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इन चुनावों में दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि मतपत्र पर पार्टी की पहचान और उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह की भूमिका सीधे चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी होती है।

इसी बीच 20 सितंबर को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी पर निशाना साधा। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी अब सत्ता में वापस नहीं आएंगी। इसके साथ ही उन्होंने नए फुटबॉल खिलाड़ी वाले चुनाव चिन्ह पर भी टिप्पणी की और कहा कि “फुटबॉल पिचक जाएगा।” यह सरमा का राजनीतिक बयान है, न कि चुनाव आयोग या किसी न्यायिक संस्था का निष्कर्ष।

सरमा ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का भी उल्लेख किया और कहा कि अब राज्य के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। उनके इन बयानों को पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भाजपा नेता की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी राजनीतिक दल या नेता के भविष्य को लेकर ऐसी टिप्पणियां राजनीतिक दावे हैं और इन्हें तथ्यात्मक चुनावी परिणाम के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जा सकता।

उधर, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। 21 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले का उल्लेख किया। कोर्ट ने संकेत दिया कि याचिका को सूचीबद्ध किया जाएगा और यह भी कहा कि दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

ममता बनर्जी की याचिका चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती देती है, जिसके तहत दोनों गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और पारंपरिक ‘Flowers & Grass’ चिन्ह के इस्तेमाल से रोका गया है। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद इस विवाद का न्यायिक पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, 21 सितंबर की कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस विवाद के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं दिया है; फिलहाल मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की दिशा में आगे बढ़ा है।

इस पूरे विवाद में एक अहम बात यह है कि ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह को ममता बनर्जी गुट के लिए स्थायी रूप से नया पार्टी चिन्ह घोषित नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था है और मूल पार्टी नाम व चिन्ह पर अंतिम अधिकार का सवाल अभी अलग प्रक्रिया में विचाराधीन है।

यानी फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन समानांतर घटनाक्रम चल रहे हैं—पहला, तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था; दूसरा, आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों के लिए अलग पहचान; और तीसरा, चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती।

हिमंत सरमा का “फुटबॉल पिचक जाएगा” वाला बयान इसी राजनीतिक टकराव के बीच आया है। अब इस विवाद में आगे की दिशा चुनाव आयोग की चल रही प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से तय होगी।