गुवाहाटी में 5,000 श्रमिकों की रैली, CITU ने नए श्रम कानूनों पर रोक की मांग उठाई; न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दे !
गुवाहाटी में CITU के नेतृत्व में करीब 5,000 श्रमिकों की रैली हुई। प्रदर्शनकारियों ने चार नए Labour Codes पर रोक, न्यूनतम मजदूरी, चाय श्रमिकों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगें उठाईं।
गुवाहाटी, असम | 29 सितंबर 2026
गुवाहाटी में सोमवार, 28 सितंबर को श्रमिकों की बड़ी लामबंदी देखने को मिली। Centre of Indian Trade Unions यानी CITU के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में करीब 5,000 श्रमिकों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के चार नए श्रम संहिताओं को लेकर विरोध जताया और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही श्रमिकों ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक आसान पहुंच और ‘समान काम के लिए समान वेतन’ जैसे मुद्दे भी उठाए।
क्या है पूरा मामला ?
Assam Tribune की रिपोर्ट के अनुसार, गुवाहाटी में CITU के बैनर तले लगभग 5,000 श्रमिकों ने रैली में हिस्सा लिया। प्रदर्शन का केंद्र श्रमिक अधिकार, वेतन और नए Labour Codes रहे। इससे पहले 25 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में भी बताया गया था कि CITU की असम राज्य समिति ने 28 सितंबर को गुवाहाटी के चाचल धरना स्थल पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी की थी। इसमें तेल, बिजली एवं पावर सेक्टर, चाय बागान, निर्माण, मोटर परिवहन तथा सरकारी और निजी संस्थानों में काम करने वाले संविदा कर्मियों के शामिल होने की बात कही गई थी।
CITU और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का एक प्रमुख मुद्दा चार श्रम संहिताओं का विरोध है। केंद्र सरकार ने Code on Wages, 2019; Industrial Relations Code, 2020; Code on Social Security, 2020; और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 को 21 नवंबर 2025 से लागू किया था। केंद्र सरकार के अनुसार इन चार संहिताओं ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित किया है और इसका उद्देश्य मजदूरी, कार्यस्थल की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा श्रम कानूनों के अनुपालन को सरल बनाना है।
सरकार इन कानूनों को श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, नियुक्ति-पत्र, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने वाली व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करती है। वहीं CITU और कुछ अन्य ट्रेड यूनियन संगठन इन संहिताओं को लेकर अलग राय रखते हैं। CITU का कहना है कि नए प्रावधानों से श्रमिकों के मौजूदा अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह संगठन चारों Labour Codes को वापस लेने की मांग लंबे समय से करता रहा है।
असम में न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा
गुवाहाटी प्रदर्शन में मजदूरी का मुद्दा भी प्रमुख रहा। Assam Tribune के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने असम में 800 रुपये न्यूनतम मजदूरी तथा चाय श्रमिकों के लिए 661 रुपये की मांग उठाई। चाय श्रमिकों के लिए 661 रुपये प्रतिदिन की मांग असम में ट्रेड यूनियनों द्वारा पहले भी उठाई जाती रही है।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि श्रमिक संगठनों की मांग और सरकार द्वारा अधिसूचित या लागू मजदूरी दर एक ही चीज नहीं हैं। Labour Bureau के उपलब्ध आंकड़ों में असम के विभिन्न श्रेणी के ग्रामीण श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी अलग-अलग दर्ज है और यह क्षेत्र, काम तथा अवधि के अनुसार बदलती है।

गुवाहाटी में 5,000 श्रमिकों की रैली
किन श्रमिकों ने उठाई आवाज ?
प्रदर्शन की प्रस्तावित लामबंदी में अलग-अलग क्षेत्रों के श्रमिकों को शामिल किया गया था। इनमें तेल एवं बिजली क्षेत्र, चाय बागान, निर्माण उद्योग, मोटर परिवहन और सरकारी तथा निजी प्रतिष्ठानों के संविदा कर्मचारी शामिल बताए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि विरोध का दायरा किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं था।
CITU के अलावा अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियन भी Labour Codes को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते रहे हैं। सितंबर 2026 में AITUC, CITU और अन्य श्रमिक संगठनों ने Code on Wages के तहत गठित Central Advisory Board की संरचना को लेकर भी सवाल उठाए और इसमें प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के व्यापक प्रतिनिधित्व की मांग की।
सरकार और ट्रेड यूनियनों का अलग-अलग दृष्टिकोण
इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के दृष्टिकोण को समझना जरूरी है। केंद्र सरकार का कहना है कि चार श्रम संहिताएं पुराने और बिखरे हुए 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार व्यापक कानूनों में समेटती हैं तथा इससे श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी, नियुक्ति-पत्र, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा मानकों को व्यवस्थित किया गया है।
इसके विपरीत, CITU का तर्क है कि इन संहिताओं के कई प्रावधान श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं। संगठन विशेष रूप से न्यूनतम मजदूरी, ट्रेड यूनियन अधिकार, हड़ताल से जुड़े प्रावधान, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर आपत्ति जताता रहा है।
असम में श्रम विभाग की वेबसाइट पर 2026 के Draft Social Security Rules और Draft Industrial Relation Rules सहित Labour Codes से संबंधित राज्य स्तरीय नियमों की जानकारी उपलब्ध है। इससे स्पष्ट है कि श्रम कानूनों का क्रियान्वयन केंद्र के साथ-साथ राज्य स्तर पर नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से भी जुड़ा हुआ है।
गुवाहाटी की यह रैली ऐसे समय में हुई है जब श्रम कानूनों, मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा को लेकर ट्रेड यूनियनों और सरकार के बीच मतभेद जारी हैं। आने वाले समय में इन मांगों पर सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच बातचीत तथा राज्य स्तर पर नियमों के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।
नोट: इस रिपोर्ट में CITU/श्रमिक संगठनों की मांगों को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। Labour Codes के संबंध में केंद्र सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण भी साथ में दिया गया है, ताकि पाठकों को पूरे मुद्दे का संतुलित संदर्भ मिल सके।











