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RSS की शताब्दी से शताब्दी-पार गतिविधियों तक: जबलपुर में मोहन भागवत का आचरण पर जोर, इंदौर और बलिया में पथ संचलन

'RSS की शताब्दी से शताब्दी-पार
RSS की शताब्दी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जबलपुर में स्वयंसेवकों के आचरण और सामाजिक जिम्मेदारी को संगठन की पहचान से जोड़ा। इंदौर और महू क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पथ संचलन आयोजित हुए, जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर में भी स्वयंसेवकों ने नगर के प्रमुख मार्गों पर संचलन किया।

जबलपुर/इंदौर/बलिया, 25 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक गतिविधियां मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में चर्चा में हैं। जबलपुर में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों के आचरण और व्यवहार को संगठन की वास्तविक पहचान बताया। वहीं, इंदौर और महू क्षेत्र में अलग-अलग बस्तियों में पथ संचलन आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर कस्बे में भी संघ की ओर से पथ संचलन निकाला गया। इन आयोजनों में संगठनात्मक अनुशासन, स्वयंसेवकों की भूमिका और सामाजिक सहभागिता प्रमुख विषयों के रूप में सामने आए।

जबलपुर: आचरण से बनती है संगठन की पहचान

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को जबलपुर के नरसिंह मंदिर स्थित सरस्वती शिक्षा परिषद एवं विद्या भारती कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में मुख्य शिक्षक और उससे ऊपर के दायित्वों पर कार्यरत स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।

भागवत ने कहा कि संघ की वास्तविक पहचान उसके स्वयंसेवकों के आचरण और व्यवहार से होती है। उनका जोर इस बात पर था कि स्वयंसेवकों का व्यक्तिगत आचरण ऐसा होना चाहिए, जिसे समाज के अन्य लोग भी अनुकरणीय मानें।

उन्होंने स्वयंसेवक की भूमिका को केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय समाज के प्रति जिम्मेदारी और योगदान की भावना से जोड़ा। रिपोर्ट में उनके संदेश का एक प्रमुख पक्ष यह भी बताया गया कि संघ से जुड़ने का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान देना होना चाहिए।

यह संदेश संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखता है: किसी संगठन की सार्वजनिक छवि केवल उसके कार्यक्रमों और दावों से नहीं, बल्कि उससे जुड़े लोगों के दैनिक व्यवहार, सामाजिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन में उनके आचरण से भी बनती है। हालांकि, यह व्यापक संपादकीय निष्कर्ष है, न कि भागवत का शब्दशः उद्धरण।

इंदौर और महू: 345 बस्तियों में पथ संचलन

मध्य प्रदेश के इंदौर और महू क्षेत्र में रविवार, 25 अक्टूबर को RSS की ओर से पथ संचलन आयोजित किए गए। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर विभाग के चार महानगरीय जिलों के 34 नगरों की लगभग 345 बस्तियों में संचलन हुआ। इसके अलावा, महू ग्रामीण क्षेत्र के छह खंडों के 65 मंडलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।

रिपोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भाजपा के अन्य नेताओं की पथ संचलन में सहभागिता का उल्लेख किया गया है। स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों के प्रमुख मार्गों से अनुशासित कदमताल करते हुए निकले। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम की तैयारियां लगभग एक महीने से चल रही थीं और विभिन्न शाखाओं में समता का अभ्यास भी किया जा रहा था।

इस आयोजन का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 28 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित इंदौर विभाग का वृहत एकत्रीकरण है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम डेली कॉलेज परिसर में शाम 4:30 बजे से आयोजित किया जाना है। इसका ध्येय वाक्य “चरैवेति-चरैवेति” रखा गया है, जिसका सामान्य अर्थ है—निरंतर आगे बढ़ते रहना। रिपोर्ट में इसे संगठनात्मक कार्य, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए: बस्तियों और मंडलों में पथ संचलन तथा 28 अक्टूबर को प्रस्तावित वृहत एकत्रीकरण दो अलग-अलग गतिविधियां हैं। इन्हें एक ही कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक भ्रम पैदा कर सकता है।

बलिया: सिकंदरपुर में निकला पथ संचलन

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर कस्बे में शनिवार को RSS की ओर से पथ संचलन आयोजित किया गया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, संचलन सरस्वती शिशु मंदिर, किला के पोखरा से शुरू हुआ और नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए उसी स्थान पर समाप्त हुआ।

रिपोर्ट में चौक, बस स्टेशन, बेल्थरा मार्ग, बाजार मोड़, सोनार गली और आनंदी चौक का उल्लेख संचलन के मार्ग के रूप में किया गया है। कार्यक्रम के दौरान संघ के पदाधिकारी, स्वयंसेवक तथा सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

समापन के अवसर पर जिला कार्यवाह सतीश तिवारी ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संघ की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों में स्वयंसेवकों की भूमिका पर जोर दिया।

इस आयोजन का स्थानीय महत्व यह है कि पथ संचलन के माध्यम से संगठन ने नगर के सार्वजनिक स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि, इससे पूरे क्षेत्र की जनता के विचारों या समर्थन के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; उसके लिए अलग और विश्वसनीय जनमत संबंधी साक्ष्य आवश्यक होंगे।

Town resonates with disciplined rhythmic marching; RSS holds a route march.

सिकंदरपुर कस्बा में आरएसएस के पथ संचलन में उप​स्थित स्वयंसेवक Photo Credit :Social Meadia

शताब्दी वर्ष के संदर्भ में इन गतिविधियों का महत्व

तीनों घटनाओं को एक साथ देखने पर संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। जबलपुर में नेतृत्व का संदेश स्वयंसेवकों के आचरण और सामाजिक योगदान पर केंद्रित रहा। इंदौर और महू में कई स्थानीय इकाइयों ने पथ संचलन आयोजित किए, जबकि सिकंदरपुर में स्थानीय स्तर पर इसी तरह का आयोजन हुआ।

इन घटनाओं को संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े व्यापक संगठनात्मक संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक कार्यक्रम का उद्देश्य, स्वरूप और उसमें शामिल लोगों की संख्या अलग है। इसलिए सभी आयोजनों को एक समान अभियान बताने या इनके प्रभाव के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालने से पहले अतिरिक्त साक्ष्यों की जरूरत होगी।

किसी भी सामाजिक संगठन की गतिविधियों का आकलन करते समय उसके घोषित उद्देश्यों के साथ-साथ उसके वास्तविक कार्यों, सामाजिक योगदान, सार्वजनिक व्यवहार और विभिन्न समुदायों के साथ संबंधों को भी देखना महत्वपूर्ण है। यह कसौटी किसी एक संगठन तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय सभी संगठनों पर लागू होती है।

निष्कर्ष

जबलपुर, इंदौर और सिकंदरपुर से सामने आई ये खबरें RSS की नेतृत्व-स्तरीय विचारधारा, क्षेत्रीय संगठनात्मक गतिविधियों और स्थानीय सार्वजनिक आयोजनों की तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। मोहन भागवत का आचरण पर जोर और अलग-अलग क्षेत्रों में पथ संचलन इस कवरेज के मुख्य बिंदु हैं।

इन आयोजनों की वास्तविक सामाजिक उपयोगिता का आकलन केवल उनकी भव्यता या प्रतिभागियों की संख्या से नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक कार्य, सार्वजनिक जिम्मेदारी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव से किया जाना चाहिए।