संसद मार्च पर टकराव: सीजेपी का दावा- जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए बुलाया, दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति से किया इनकार
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली का राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर से संसद तक “चलो संसद” मार्च का ऐलान किया। भारी बारिश, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रतिबंधों के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे।
इसी बीच सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने सुबह बातचीत के लिए संपर्क किया और वे पार्टी के दूसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्यों हो रहा है प्रदर्शन?
यह आंदोलन मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, विशेषकर NEET परीक्षा विवाद, जवाबदेही और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर चल रहा है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता
- कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच
- जवाबदेही तय करना
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
पुलिस ने क्यों रोका मार्च?
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि—
- संसद मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई।
- नई दिल्ली क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू है।
- जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल के अलावा पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है।
- संसद सत्र को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने आम लोगों से मार्च में शामिल न होने की अपील भी की।
भारी सुरक्षा, बैरिकेडिंग और झड़पें
जंतर-मंतर के आसपास—
- कई स्तर की बैरिकेडिंग
- RAF की तैनाती
- अतिरिक्त पुलिस बल
- संसद मार्ग की सुरक्षा बढ़ाई गई।
सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की तथा कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज जैसे दृश्य भी सामने आए। समाचार एजेंसी ANI के वीडियो में RAF द्वारा कुछ लोगों को हटाते हुए देखा गया।
सोनम वांगचुक का आंदोलन भी चर्चा में
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनशन पर हैं।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि यदि संसद में शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाने का भरोसा मिलता है तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
विपक्ष का रुख
हालांकि विपक्षी दल शुरुआत में आंदोलन से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन बाद में कई नेताओं ने व्यक्तिगत स्तर पर समर्थन दिया।
जंतर-मंतर पहुंचे नेताओं में—
- मनीष सिसोदिया
- प्रिया सरोज
- राजीव राय
- इक़रा हसन
- पवन खेड़ा
ने आंदोलन के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी।











