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संसद का मानसून सत्र समाप्त: आखिरी दिन भी हंगामा, विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध बरकरार

नई दिल्ली | 13 अगस्त 2026

संसद का मानसून सत्र आज लगातार राजनीतिक गतिरोध और हंगामे के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के साथ ही निचले सदन की कार्यवाही समाप्त हो गई। सत्र के अंतिम दिनों में भी विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी और सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।

गृह मंत्री के चर्चा के प्रस्ताव के बावजूद नहीं बनी सहमति

सत्र के अंतिम चरण में सरकार की ओर से विपक्ष को चर्चा का आश्वासन दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 12 अगस्त को छात्रों के प्रदर्शन और NEET से जुड़े मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए सरकार की तत्परता जताई थी। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देने की बात कही थी।

हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। विपक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि उसकी अपेक्षा केवल वक्तव्य सुनने की नहीं, बल्कि उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब और जवाबदेही की है। राहुल गांधी ने भी गृह मंत्री के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त की थी।

अंतिम दिन भी कार्यवाही पर हंगामे का असर

13 अगस्त को सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी राजनीतिक गतिरोध समाप्त नहीं हुआ और सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद राज्यसभा में भी विपक्षी सदस्यों के विरोध और शोर-शराबे के बीच कार्यवाही प्रभावित हुई।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद तथा संसदीय कार्यवाही के सुचारु संचालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

कितने काम के साथ समाप्त हुआ सत्र?

लगातार व्यवधान के बावजूद सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सफल रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इस मानसून सत्र में सरकार ने 11 विधेयक पारित किए। हालांकि, सदन में बहस और व्यवधान को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के दावे अलग-अलग रहे।

इसलिए इस सत्र को केवल “पूरी तरह बेकार” या “पूरी तरह सफल” कहना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। संसद में विधायी काम हुआ, लेकिन लगातार व्यवधानों ने चर्चा और बहस के लिए उपलब्ध समय को प्रभावित किया।

वंदे मातरम् के दौरान दिखे कुछ दृश्य

सत्र की समाप्ति के दौरान जब सदस्य “वंदे मातरम्” के सम्मान में खड़े हुए, तब Sansad TV के लाइव प्रसारण में सदन का दृश्य दिखाई दिया।

इसी दौरान बिहार के पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद भी कैमरे में दिखाई दिए। प्रसारण के दृश्य में पप्पू यादव अन्य कई सदस्यों से अलग मुद्रा में खड़े दिखाई दिए, जबकि अवधेश प्रसाद ने काला चश्मा पहन रखा था।

इन दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो सकती है, लेकिन केवल कैमरे में दिखाई देने वाली मुद्रा या पहनावे के आधार पर किसी सांसद की मंशा अथवा राजनीतिक दृष्टिकोण के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

संसद के लिए बड़ा सवाल

मानसून सत्र के समाप्त होने के बाद मूल सवाल यही है कि क्या सरकार और विपक्ष आने वाले सत्रों में ऐसे मुद्दों पर पहले से संवाद का कोई प्रभावी रास्ता निकाल पाएंगे, जिनके कारण सदन की कार्यवाही बाधित होती है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उसी के साथ संसद में विधायी कार्य, प्रश्न पूछने, बहस करने और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए सदन का प्रभावी संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हिंदी विंडो का संपादकीय निष्कर्ष:
संसद में असहमति लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन असहमति का सबसे प्रभावी माध्यम सदन के भीतर तथ्य, तर्क और बहस है। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संसद की कार्यवाही और जनता के प्रति जवाबदेही प्रभावित न हो।

स्रोत: संसद/संसदीय प्रसारण से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टें एवं समकालीन समाचार रिपोर्टें।