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जंतर-मंतर पर ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ की बड़ी भीड़, पुलिस-RAF ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया; जानिए क्या हैं मांगें

नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026। दिल्ली में जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ चल रहे ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ ने शुक्रवार को उस समय बड़ा रूप ले लिया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने इसके बजाय रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुमति दी थी, जिसमें अधिकतम 500 लोगों के शामिल होने और शाम 4 बजे तक कार्यक्रम आयोजित करने की शर्त थी।

इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की भीड़ जंतर-मंतर पर जुटती रही। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारी वहां मौजूद रहे। भीड़ बढ़ने के साथ दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी तैनात किया। बाद में पुलिस और RAF ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

क्या है ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’?

‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ मूल रूप से सोशल मीडिया से उभरा एक अभियान है, जो जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग करता है। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, इस अभियान से जुड़े सोशल मीडिया पेज के इंस्टाग्राम पर करीब 56 लाख फॉलोअर्स बताए गए हैं।

आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अवसर तय करने के लिए जाति के बजाय योग्यता और आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

आंदोलन से जुड़ी मांगों में मुख्य रूप से—

  • सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक दाखिलों में जाति आधारित आरक्षण की जगह मेरिट को प्राथमिकता देना।
  • सरकारी सहायता को आर्थिक स्थिति से जोड़ना।
  • गरीब व्यक्ति को उसकी जाति या धर्म से अलग सहायता देने की व्यवस्था।
  • शिक्षा, कोचिंग और अन्य सरकारी सहायता में आर्थिक जरूरत को आधार बनाने की मांग।
  • सरकारी और शैक्षणिक प्रक्रियाओं में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था पर पुनर्विचार।
  • आंदोलन से जुड़े लोगों ने यूजीसी से संबंधित कुछ नियमों को वापस लेने की मांग भी उठाई।

रामलीला मैदान से जंतर-मंतर क्यों पहुंची भीड़?

दिल्ली पुलिस की ओर से रामलीला मैदान में अधिकतम 500 लोगों के लिए प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी। अनुमति शाम 4 बजे तक थी और जुलूस निकालने की अनुमति नहीं थी। पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर पर किसी प्रदर्शन, जुलूस या सभा की अनुमति नहीं दी गई थी।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने आयोजन स्थल बदले जाने पर आपत्ति जताई। उनका दावा था कि जंतर-मंतर के लिए पहले अनुमति मांगी गई थी और अंतिम समय में स्थल बदलकर प्रतिभागियों की संख्या सीमित की गई। यह आंदोलन से जुड़े पक्ष का दावा है; इसे पुलिस के आधिकारिक रुख से अलग समझना जरूरी है।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव

शुक्रवार शाम तक जंतर-मंतर पर भीड़ बढ़ती गई। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और बैरिकेडिंग की। बाद में RAF की मौजूदगी में कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों द्वारा पोस्टर, बैनर और झंडे लेकर नारेबाजी करने की जानकारी भी सामने आई है।

आंदोलन के आयोजकों ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह दावा भी किया कि उन्हें किसी राजनीतिक दल या विदेशी एजेंसी से वित्तीय समर्थन नहीं मिल रहा है। यह आयोजकों का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।

इसी दौरान राहुल गांधी का धरना भी चर्चा में रहा

जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। यह धरना पिछले महीने हुए एक अन्य प्रदर्शन के दौरान एक छात्र को कथित तौर पर पेलेट गन से चोट लगने की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर था। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, पुलिस ने बाद में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।

अब सबसे बड़ा सवाल

दिल्ली की यह घटना सिर्फ एक विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह भारत में आरक्षण, सामाजिक न्याय, आर्थिक पिछड़ापन और मेरिट को लेकर चल रही लंबे समय से जारी बहस को फिर सामने लाती है।

एक तरफ आंदोलनकारी जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को आधार बनाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत में आरक्षण व्यवस्था का ऐतिहासिक आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन तथा प्रतिनिधित्व से जुड़ा रहा है। इसलिए इस मुद्दे को समझते समय प्रदर्शनकारियों की मांग और मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था—दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

हिंदी विंडो फैक्ट नोट:
यह प्रदर्शन आरक्षण व्यवस्था में किसी तत्काल सरकारी बदलाव का संकेत नहीं है। यह एक आंदोलन और उससे जुड़ी मांगों की खबर है।