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नेपाल में ग्लेशियर टूटने से विनाशकारी बाढ़, 300 से ज्यादा मौतें; 1,400 से अधिक लोग लापता

नेपाल में हिमालयी जलप्रलय: ग्लेशियर ढहने से तबाही, 300 से ज्यादा मौतें; 1,400 से अधिक लोग लापता

काठमांडू/नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया है। तेज बहाव के साथ आए पानी, चट्टानों, बर्फ और भारी मलबे ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को बुरी तरह तबाह कर दिया। राहत और बचाव दल अब भी मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं।

मौतों का आंकड़ा तेजी से बदल रहा

ताजा Guardian Live Update के अनुसार, नेपाल में अब तक 332 शव बरामद किए जा चुके हैं और 900 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। चीन की सरकारी प्रसारण व्यवस्था के अनुसार तिब्बत क्षेत्र में तीन लोगों की मौत और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। इसका अर्थ है कि दोनों देशों में मृतकों और लापता लोगों की कुल संख्या लगातार बढ़ रही है।

हालांकि, आंकड़ों में तेजी से बदलाव हो रहा है। Reuters की एक अन्य अपडेट में नेपाल में 270 शव मिलने की जानकारी दी गई थी। इसका कारण अलग-अलग समय पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों का अपडेट होना है।

इसलिए हिंदी विंडो की सलाह है कि पाठक और दर्शक इस खबर को “लगातार अपडेट हो रही आपदा” के रूप में देखें।

आखिर हुआ क्या था ?

यह आपदा 26 अगस्त की सुबह हिमालयी क्षेत्र में शुरू हुई। शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप को संभावित कारण माना गया था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक आकलनों में तस्वीर बदल गई।

US Geological Survey के अनुसार जिस भूकंपीय गतिविधि को शुरुआत में 4.4 तीव्रता के भूकंप के रूप में देखा गया था, वह वास्तव में बड़े पैमाने पर हुए ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने से पैदा हुआ seismic signal था। घटना को बाद में लगभग 5.2 magnitude के seismic event के रूप में दर्ज किया गया।

Satellite imagery के विश्लेषण के मुताबिक लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर करीब 1,200 मीटर नीचे घाटी में गिरा। बर्फ, चट्टान और मलबे के इस विशाल ढेर ने नदी के प्रवाह को बाधित किया और इसके बाद पानी तथा मलबे की एक बेहद शक्तिशाली लहर नीचे की ओर दौड़ पड़ी।

नेपाल में सबसे ज्यादा तबाही

नेपाल का Rasuwa क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में है। बाढ़ और मलबे ने Bhotekoshi तथा Trishuli नदी घाटियों में भारी नुकसान पहुंचाया।

सड़कों और पुलों के बह जाने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। Nepali Times के अनुसार कम से कम छह प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं, transmission infrastructure और electric substations गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई पुल भी बह गए, जिससे उत्तर की ओर जाने वाले मार्गों पर असर पड़ा है।

Nepali Times की satellite-image आधारित रिपोर्ट के अनुसार आपदा की शुरुआत का संबंध Langtang Lirung क्षेत्र से हुआ प्रतीत होता है। रिपोर्ट बताती है कि मलबे ने Lhende Khola के प्रवाह को बाधित किया और बाद में जमा पानी के अचानक निकलने से मलबे और पानी की तेज धारा Trisuli नदी की ओर बढ़ी।

तिब्बत में भी भारी नुकसान

सीमा के दूसरी ओर चीन के Tibet क्षेत्र में स्थित Gyirong क्षेत्र और सीमा व्यापार मार्ग भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

चीन की ओर 500 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें बड़ी संख्या विदेशी यात्रियों की बताई जा रही है।

इस आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में मानसरोवर-कैलाश यात्रा के लिए बड़ी संख्या में भारतीय और दूसरे देशों के यात्री भी मौजूद थे।

भारतीय नागरिक भी प्रभावित

भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता गंभीर है। Reuters के अनुसार भारत के विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के आधार पर करीब 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा, जबकि लगभग 200 भारतीय चीन की ओर सीमा क्षेत्र में फंसे बताए गए हैं।

हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर है। इससे स्पष्ट है कि अंतिम सूची तैयार होने तक संख्या में बदलाव संभव है।

बचाव अभियान में बड़ी चुनौती

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और बचावकर्मी राहत अभियान में लगाए गए हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है, लेकिन कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है क्योंकि सड़कें और पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।

मलबे, ऊंचे जलस्तर और खराब संचार व्यवस्था ने राहत कार्य को और कठिन बना दिया है। Reuters के अनुसार नेपाल ने 5,000 से अधिक personnel को खोज एवं राहत अभियान में लगाया है।

क्या जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की हिमालयी आपदाओं को केवल एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। भूस्खलन, ग्लेशियरों का पीछे हटना, तापमान में वृद्धि, permafrost का पिघलना, मानसूनी बारिश और पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता—कई कारक मिलकर खतरा बढ़ा सकते हैं।

Reuters की विशेषज्ञ-आधारित रिपोर्ट के अनुसार हिमालय में बढ़ते तापमान और बर्फ तथा चट्टानों की अस्थिरता ऐसे खतरों की संभावना बढ़ा सकती है। हालांकि इस विशेष घटना को सीधे केवल जलवायु परिवर्तन से जोड़ना अभी वैज्ञानिक रूप से जल्दबाजी होगी।

Nepali Times ने भी इस आपदा को ग्लेशियर पिघलने, permafrost और moraine collapse से जुड़े बढ़ते दीर्घकालिक खतरे के संदर्भ में देखा है।

अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है ?

इस समय सबसे महत्वपूर्ण कार्य है—

  • मलबे में फंसे लोगों को तलाशना।
  • लापता लोगों की पहचान और सूची तैयार करना।
  • प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता पहुंचाना।
  • सड़क और संचार व्यवस्था बहाल करना।
  • भारतीय और अन्य विदेशी नागरिकों की स्थिति की पुष्टि करना।
  • संभावित दूसरी बाढ़ और भूस्खलन के खतरे पर नजर रखना।

नेपाल और चीन दोनों ओर राहत-बचाव अभियान जारी है।

हिंदी विंडो की सत्यापन टिप्पणी: इस खबर में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े 27 अगस्त 2026 को उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर दिए गए हैं। बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़े बदल सकते हैं। अंतिम सरकारी आंकड़े आने पर इस खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

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