हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

महाराष्ट्र में स्मार्ट मीटर विवाद ने पकड़ा तूल, विरोध जताने वाले वरिष्ठ इंजीनियर निलंबित

Smart Meter: एक-एक यूनिट बिजली का हिसाब देगा स्मार्ट मीटर, ऐसे होगा हर  समस्या का समाधान - Smart Prepaid Meter Benefits Lucknow Electricity  Consumers Doubts Addressed
                                                                                                                        स्मार्ट मीटर विवाद

महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर चल रही बहस के बीच राज्य बिजली वितरण कंपनी महावितरण (MSEDCL) ने एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पालघर सर्कल के अधीक्षण अभियंता मदन सांगले को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय अनुमति के बिना स्मार्ट मीटर परियोजना से जुड़ी कंपनी को पत्र लिखकर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर बदले जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

स्मार्ट मीटर विवाद :जानकारी के अनुसार, मदन सांगले ने हाल ही में एक पत्र के माध्यम से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि यदि घरेलू उपभोक्ताओं के मौजूदा बिजली मीटर उनकी स्पष्ट सहमति के बिना बदले जाते हैं, तो इससे जन असंतोष और विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि ऐसी परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाले विवादों और आंदोलनों की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी पर होगी।

पत्र सार्वजनिक होने के बाद महावितरण मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि किसी भी अधिकारी को विभागीय मंजूरी के बिना बाहरी संस्था को आधिकारिक नीति से संबंधित पत्राचार करने का अधिकार नहीं है। इसे प्रशासनिक नियमों और सेवा अनुशासन का उल्लंघन माना गया।

कोंकण क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त प्रबंध निदेशक द्वारा जारी आदेश में मदन सांगले के निलंबन की पुष्टि की गई। महावितरण का तर्क है कि स्मार्ट मीटर परियोजना केंद्र सरकार और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। कंपनी के अनुसार, बिजली खपत की सटीक निगरानी और त्रुटिरहित मीटरिंग सुनिश्चित करना भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 55 के तहत उसकी कानूनी जिम्मेदारी है।

उधर, महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में स्मार्ट मीटरों को लेकर पहले से ही विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस योजना पर सवाल उठाए हैं। ऐसे माहौल में एक वरिष्ठ इंजीनियर के निलंबन ने पूरे मुद्दे को और अधिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्मार्ट मीटर का मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल, महावितरण अपनी नीति पर कायम है, जबकि उपभोक्ता संगठनों और विरोधी पक्षों की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।