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हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर विवाद, योगी ने जताई आपत्ति; ओवैसी ने किया बचाव

18 सितंबर को ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने ए.जी. नूरानी की किताब का हवाला देते हुए जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक ऐतिहासिक टिप्पणी का उल्लेख किया। इसके बाद बीजेपी नेताओं और कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने उनकी आलोचना की, जबकि असदुद्दीन ओवैसी ने अंसारी का बचाव किया।

हामिद अंसारी ने क्या कहा, जिस पर योगी और ओवैसी आमने-सामने आए ? जानिए पूरा विवाद !

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में दी गई एक टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। अंसारी ने ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का संदर्भ देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक ऐतिहासिक टिप्पणी का उल्लेख किया। इस टिप्पणी में भारत के लिए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को एक खतरे के रूप में रेखांकित किया गया था।

अंसारी का यह वक्तव्य सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में एक कार्यक्रम के दौरान अंसारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अंसारी का बचाव करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक या वैचारिक बातों से असहमति हो सकती है, लेकिन इससे उसकी विद्वता या देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।

आखिर हामिद अंसारी ने क्या कहा ?

18 सितंबर को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित तीसरे ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर का विषय था—“Remembering a Polymath: The Life and Times of Abdul Ghafoor Noorani”। कार्यक्रम में अंसारी ने ए.जी. नूरानी के लेखन और उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े कामों पर चर्चा की।

अंसारी ने नूरानी की वर्ष 2019 में प्रकाशित किताब The RSS: A Menace to India के परिचय का संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि नूरानी ने किताब में जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक टिप्पणी का उल्लेख किया था। अंसारी के अनुसार, यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक के संदर्भ में थी और तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज की गई थी।

अंसारी ने इसी संदर्भ में वह पंक्ति उद्धृत की, जिसमें भारत के लिए कम्युनिज्म के बजाय “हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता” को खतरे के रूप में बताया गया था। यही हिस्सा बाद में राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया।

यहां यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है कि अंसारी अपने भाषण में इस कथन को ऐतिहासिक संदर्भ और नूरानी की किताब के हवाले के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नूरानी के काम और उसमें उद्धृत नेहरू संबंधी टिप्पणी पर बात की थी।

योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा ?

20 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंसारी की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है। योगी ने अंसारी की टिप्पणी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और हिंदू परंपरा के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया।

योगी ने यह भी कहा कि भारत के संविधान की भावना देश की एकता और अखंडता से जुड़ी है और महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों को इस भावना का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने अंसारी के वक्तव्य को भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कथित एजेंडे से भी जोड़ा।

बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया

अंसारी के बयान पर बीजेपी के कई नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। मीडिया रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी समेत कई नेताओं द्वारा टिप्पणी की आलोचना किए जाने का उल्लेख है। शाहनवाज हुसैन ने अंसारी से माफी की मांग की।

वहीं विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी अंसारी की टिप्पणी की आलोचना की। दूसरी ओर, कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी अंसारी के वक्तव्य से दूरी बनाई।

मुस्लिम धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई

ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने अंसारी के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी टिप्पणियां सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं और कहा कि अंसारी को ऐसे बयानों के बजाय सामाजिक सद्भाव से जुड़े सकारात्मक संदेशों पर भी ध्यान देना चाहिए।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी इस टिप्पणी से दूरी बनाते हुए धार्मिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया।

ओवैसी ने किया हामिद अंसारी का बचाव

विवाद के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अंसारी का बचाव किया। 20 सितंबर को लखनऊ में एएनआई से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि अंसारी एक प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं, उन्होंने भारतीय विदेश सेवा में देश की सेवा की है और वे विद्वान हैं।

ओवैसी ने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति संभव है, लेकिन केवल उनके विचारों के आधार पर उनकी विद्वता या देश के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। यह बयान उस समय आया जब बीजेपी और अन्य आलोचकों की ओर से अंसारी की टिप्पणी पर लगातार प्रतिक्रियाएं दी जा रही थीं।

विवाद का असली केंद्र क्या है ?

पूरे विवाद को समझने के लिए तीन अलग-अलग स्तरों को अलग करना जरूरी है।

पहला, हामिद अंसारी का भाषण—जिसमें उन्होंने ए.जी. नूरानी की किताब और उसमें उद्धृत नेहरू संबंधी ऐतिहासिक टिप्पणी का संदर्भ दिया।

दूसरा, बीजेपी और योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया—जिसमें इस टिप्पणी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया गया।

तीसरा, ओवैसी का बचाव—जिसमें उन्होंने अंसारी के विचारों से असहमति की गुंजाइश स्वीकार करते हुए उनकी विद्वता और देश सेवा को अलग विषय बताया।

इस विवाद ने भारत में धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिकता, राष्ट्रवाद, संवैधानिक पदों की सार्वजनिक भूमिका और राजनीतिक विमर्श की भाषा जैसे पुराने और संवेदनशील मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि अंसारी की 18 सितंबर की टिप्पणी के बाद 20 और 21 सितंबर को राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हुआ है। अलग-अलग पक्षों ने उसी वक्तव्य की अलग-अलग व्याख्या की है। इसलिए पाठकों के लिए जरूरी है कि मूल टिप्पणी, उसका संदर्भ और उसके बाद आए राजनीतिक दावों—इन तीनों को अलग-अलग समझें।