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जन्माष्टमी पर देशभर में भक्तिमय माहौल, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

नई दिल्ली/मथुरा, 4 सितंबर 2026। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को देशभर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। मथुरा से मुंबई, जयपुर से चेन्नई और केरल तक प्रमुख कृष्ण मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। मंदिरों में विशेष आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।

डीडी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर और मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। जन्माष्टमी के कारण कई प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दिखाई दी।

मथुरा में कृष्ण जन्मोत्सव का विशेष आकर्षण

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर को इस वर्ष ‘समुद्र मंथन’ थीम पर सजाया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मंदिर परिसर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।

मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए।

भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल ‘Incredible India’ ने भी 4 सितंबर 2026 को मथुरा में कृष्णोत्सव का आयोजन दर्ज किया है और बताया है कि ब्रज क्षेत्र में मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया तथा भजन, कीर्तन, रासलीला और विशेष पूजा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

मुंबई में मंगला आरती से शुरू हुआ उत्सव

मुंबई के गिरगांव चौपाटी स्थित इस्कॉन मंदिर में शुक्रवार सुबह भव्य मंगला आरती के साथ जन्माष्टमी के धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

मुंबई में जन्माष्टमी के अगले चरण के रूप में शनिवार को दही-हांडी उत्सव की तैयारियां भी तेज रहीं। विभिन्न गोविंदा मंडलियां ऊंचाई पर लटकाए गए दही और दूध से भरे मटकों को फोड़ने की तैयारी में जुटी हैं।

जयपुर में देर रात से मंदिर पहुंचने लगे श्रद्धालु

राजस्थान की राजधानी जयपुर में ऐतिहासिक गोविंददेवजी मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी का विशेष उत्साह दिखाई दिया।

डीडी न्यूज़ के अनुसार, गोविंददेवजी मंदिर में श्रद्धालु बृहस्पतिवार देर रात से ही पहुंचने लगे थे। शुक्रवार सुबह करीब चार बजे मंगला आरती के साथ दर्शन शुरू हुए, जबकि मंदिर प्रशासन के अनुसार मुख्य जन्मोत्सव शुक्रवार मध्यरात्रि को मनाया जाना था।

चेन्नई में दो दिवसीय जन्माष्टमी उत्सव

चेन्नई के इस्कॉन मंदिर में भी जन्माष्टमी धार्मिक उत्साह के साथ मनाई गई। मंदिर के अनुसार, ईसीआर स्थित परिसर में दो दिवसीय उत्सव की शुरुआत 3 सितंबर से हो चुकी थी।

कार्यक्रम में परिवारों, युवाओं और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लिया। व्रत रखने वाले भक्त भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे।

केरल में ‘अष्टमी रोहिणी’ पर विशेष आयोजन

केरल में जन्माष्टमी को अष्टमी रोहिणी के रूप में भी विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना की गई।

प्रसिद्ध अरनमुला पार्थसारथी मंदिर में भी ‘अष्टमी रोहिणी सद्या’ यानी विशेष प्रसाद भोज की तैयारियां की गईं। डीडी न्यूज़ के अनुसार, मंदिर सूत्रों ने इस आयोजन में कम से कम 25,000 लोगों को भोजन परोसे जाने की जानकारी दी।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

जन्माष्टमी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और शिक्षाओं को सत्य, धर्म, न्याय, करुणा और निष्काम कर्म की प्रेरणा बताया। राष्ट्रपति ने लोगों से सद्भाव, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा की भावना अपनाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जन्माष्टमी पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों में निःस्वार्थ कर्म की प्रेरणा का उल्लेख किया और कामना की कि यह अवसर लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार करे।

भक्ति के साथ कृष्ण के संदेश को याद करने का अवसर

जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व नहीं, बल्कि उनके जीवन और शिक्षाओं को स्मरण करने का अवसर भी माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी परंपराओं में भक्ति, धर्म, कर्तव्य और निष्काम कर्म का विशेष महत्व है।

राष्ट्रपति के संदेश में भी श्रीमद्भगवद्गीता में निहित कृष्ण के उपदेशों को कठिन परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने और नैतिक मूल्यों पर दृढ़ रहने की प्रेरणा बताया गया है।

देशभर के मंदिरों में दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के बाद कई स्थानों पर मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। यही वह समय है जब भक्त शंखनाद, आरती, भजन और जयकारों के बीच बाल गोपाल के जन्म का उत्सव मनाते हैं।

‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष के साथ देशभर में कृष्ण भक्ति का यह पर्व आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा है।

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