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“भारत गरीब नहीं था, उसे गरीब बनाया गया”: न्यूयॉर्क की महिला ने पश्चिमी देशों की सोच पर उठाए सवाल, गांधी और भारतीय संस्कृति की भी की तारीफ

नई दिल्ली/जयपुर। भारत को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बनी धारणाओं पर अब न्यूयॉर्क की एक टैटू आर्टिस्ट के वीडियो ने नई बहस छेड़ दी है। भारत की यात्रा पर आईं जेमा फेरर जु्ल्का ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में भारत के इतिहास, संस्कृति और औपनिवेशिक अतीत को लेकर अपनी बात रखी है।

जेमा का कहना है कि भारत को लंबे समय से पश्चिमी लोकप्रिय संस्कृति में गरीबी, भीड़भाड़ और खराब जीवन-स्थितियों जैसी छवियों के साथ प्रस्तुत किया जाता रहा है। उनके मुताबिक, भारत का इतिहास और उसकी सांस्कृतिक उपलब्धियां इस एकतरफा तस्वीर से कहीं अधिक व्यापक हैं।

‘भारत गरीब नहीं था’—क्या है जेमा का दावा  ?

अपने एक वीडियो में जेमा ने भारत को हमेशा से गरीब देश मानने वाली धारणा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत कभी दुनिया की प्रमुख टेक्सटाइल शक्तियों में शामिल था और यहां के कॉटन, सिल्क और मलमल जैसे कपड़ों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी प्रतिष्ठा थी।

जेमा ने आगे दावा किया कि ब्रिटिश शासन के दौरान व्यापारिक नीतियों में हुए बदलावों ने भारतीय उत्पादकों को नुकसान पहुंचाया और ब्रिटिश निर्माताओं को फायदा मिला। उनके अनुसार, इसका असर भारतीय बुनकरों और कारीगरों की आजीविका पर पड़ा और पारंपरिक उद्योगों को नुकसान हुआ।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बातें जेमा द्वारा अपने वीडियो में प्रस्तुत ऐतिहासिक व्याख्या हैं। भारत के औपनिवेशिक आर्थिक इतिहास में ब्रिटिश नीतियों, भारतीय उद्योगों और धन के हस्तांतरण के प्रभाव को लेकर लंबे समय से अकादमिक बहस और शोध मौजूद है।

भारत की संस्कृति पर भी खुलकर बोलीं

जेमा ने केवल आर्थिक इतिहास की बात नहीं की। उन्होंने भारत की संस्कृति से जुड़ी कई परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि योग, आयुर्वेद, ध्यान, मंडला कला, बोहो एस्थेटिक्स तथा भारतीय टेक्सटाइल और हस्तशिल्प ने दुनिया में व्यापक लोकप्रियता हासिल की है।

उनका सवाल यह था कि जब भारतीय संस्कृति से जुड़े कई तत्व दुनिया भर में लोकप्रिय और व्यावसायिक रूप से सफल हुए हैं, तो उन परंपराओं और समुदायों को पर्याप्त पहचान और सम्मान क्यों नहीं मिलता जिन्होंने उन्हें विकसित और संरक्षित किया।

‘संस्कृति का जश्न मनाएं, लेकिन उसके लोगों को कमतर न समझें’

जेमा ने भारतीय संस्कृति को लेकर प्रचलित रूढ़ छवियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत को अक्सर गरीबी, मजाक उड़ाए जाने वाले लहजे और खराब स्वच्छता जैसी धारणाओं के जरिए प्रस्तुत किया जाता है।

इसके विपरीत, उनका तर्क है कि भारतीय संस्कृति के कई हिस्से पश्चिमी समाजों में लोकप्रिय हैं और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल भी होता है। इसलिए संस्कृति की सराहना करने के साथ-साथ उस संस्कृति से जुड़े लोगों को भी सम्मान दिया जाना चाहिए।

गांधी और भारत के अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन की तारीफ

जेमा ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए महात्मा गांधी और अहिंसा की भी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि भारत ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष में एक अलग रास्ता चुना और अहिंसा को प्रतिरोध के महत्वपूर्ण साधन के रूप में इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक, भारत का स्वतंत्रता आंदोलन यह दिखाता है कि बिना व्यापक सशस्त्र हिंसा के भी एक शक्तिशाली साम्राज्य को चुनौती दी जा सकती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आए वीडियो

जेमा के ये वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। विभिन्न रिपोर्टों में उनके जयपुर दौरे और भारत की संस्कृति व इतिहास पर की गई टिप्पणियों को प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया है।

उनकी बातों का मूल संदेश भारत की गरीबी से इनकार करने से ज्यादा भारत को केवल गरीबी की रूढ़ छवि के जरिए देखने पर सवाल उठाना है।