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हरीश रावत की बड़ी इच्छा बोले “अब आनंद रावत को चुनावी मैदान में मिले मौका, मैंने हर बार कहा था ‘वेट, योर टर्न विल कम’”

हरीश रावत की बड़ी इच्छा

हरीश रावत की बड़ी इच्छा बोले – कई मौकों पर उन्होंने खुद आनंद को चुनाव लड़ने से रोका और उन्हें इंतजार करने के लिए कहा। उनके शब्दों में, वह बेटे से बार-बार कहते रहे कि “वेट, योर टर्न विल कम” यानी इंतजार करो, तुम्हारा समय आएगा !

देहरादून | 29 सितंबर 2026

पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपनी राजनीतिक विरासत और अगली पीढ़ी को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक विशेष बातचीत में रावत ने कहा कि उनकी दिली इच्छा है कि उनके छोटे बेटे आनंद रावत इस बार चुनावी मैदान में उतरें और उत्तराखंड को लेकर उनकी सोच और उनके राजनीतिक रिश्ते को आगे बढ़ाएं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टिकट का फैसला पार्टी को करना है और किसी ऐसे दावेदार का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए, जो संबंधित सीट से चुनाव लड़ने का हक रखता हो।

रावत के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के सामने यह इच्छा रखी है कि ऐसी सीट, जिस पर कांग्रेस लंबे समय से जीत दर्ज नहीं कर पाई है और जहां कोई मजबूत दावेदार मौजूद नहीं है, वहां आनंद रावत को अवसर दिया जा सकता है। उनके अनुसार आनंद ने भी ऐसी सीट चुनी है, जिस पर कांग्रेस वर्ष 1984 से चुनाव नहीं जीत पाई है।

हरीश रावत ने बातचीत में अपने राजनीतिक अनुभव और बेटे के चुनावी अवसरों से जुड़े पुराने फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर उन्होंने खुद आनंद को चुनाव लड़ने से रोका और उन्हें इंतजार करने के लिए कहा। उनके शब्दों में, वह बेटे से बार-बार कहते रहे कि “वेट, योर टर्न विल कम” यानी इंतजार करो, तुम्हारा समय आएगा।

लालकुआं से जसपुर तक का जिक्र

हरीश रावत ने बताया कि जब आनंद उत्तराखंड यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने लालकुआं से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। लेकिन उस समय हरीश रावत ने स्वयं लालकुआं से चुनाव न लड़ने का फैसला किया और पार्टी हित में दूसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारने की बात कही। रावत के मुताबिक 2017 में आनंद ने जसपुर को अपनी पसंद के रूप में चुना, लेकिन उस समय भी उन्होंने पार्टी हित में दूसरे उम्मीदवार को चुनाव लड़ाने का फैसला किया।

यह पहली बार नहीं है जब हरीश रावत ने आनंद रावत के राजनीतिक भविष्य को लेकर सार्वजनिक रूप से इच्छा जाहिर की हो। 2024 में भी उन्होंने कहा था कि आनंद लंबे समय से समाज और पार्टी संगठन के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। उस समय भी उन्होंने पार्टी से आनंद को चुनाव लड़ाने की इच्छा जताई थी।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आनंद रावत उत्तराखंड यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था।

‘परिवारवाद’ के सवाल पर हरीश रावत का जवाब

बेटे को चुनावी मौका देने की इच्छा के बीच परिवारवाद का सवाल भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकता है। इस पर हरीश रावत ने बातचीत में खुद कहा कि यदि पार्टी में किसी दूसरे व्यक्ति का उस सीट पर हक बनता है और वह चुनाव जीतने की क्षमता रखता है, तो उसका अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि यदि आनंद का अवसर बनता है और वह चुनाव लड़ सकता है, तो उसे लड़ाया जा सकता है।

हरीश रावत ने अपनी बेटी अनुपमा रावत का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अनुपमा ने हरिद्वार ग्रामीण जैसी सीट चुनी, जहां कांग्रेस लंबे समय से जीत नहीं पाई थी। उनके अनुसार अनुपमा पिछला चुनाव वहां से लड़ चुकी हैं और पार्टी कहेगी तो वह आगे भी चुनाव लड़ सकती हैं।

इस पूरे बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि उत्तराखंड में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर संभावित उम्मीदवारों और सीटों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, आनंद रावत को किसी सीट से आधिकारिक कांग्रेस टिकट मिलने की पुष्टि इस बातचीत में नहीं हुई है। हरीश रावत ने केवल अपनी इच्छा और पार्टी नेतृत्व के सामने रखे गए सुझाव की बात कही है। अंतिम फैसला कांग्रेस संगठन और संबंधित चुनावी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

रावत का ताजा बयान उनके लंबे राजनीतिक सफर और परिवार की अगली पीढ़ी को सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ाने की इच्छा को सामने रखता है। वहीं, आनंद रावत की संभावित चुनावी एंट्री को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी संगठन किस सीट पर किस उम्मीदवार को मौका देता है और स्थानीय राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रकाशित इंटरव्यू और पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर पुनर्लिखित है। आनंद रावत की उम्मीदवारी या टिकट को अभी आधिकारिक घोषणा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।