हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, ECI के फैसलों में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर उठे सवाल

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका : सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर याचिका, अगले सप्ताह होगी सुनवाई !

याचिका में CEC को पद के कार्यों से अंतरिम रूप से रोकने और SIR से जुड़े फैसलों की वैधता की जांच की मांग; चुनाव आयोग का कहना—SIR समेत फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए !!

नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग के कुछ महत्वपूर्ण फैसले कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए या लागू किए गए। याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC के रूप में कार्य करने से अंतरिम रूप से रोकने सहित कई राहतों की मांग की गई है।

मामला मंगलवार, 29 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उठाया गया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने याचिका का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

विवाद की जड़ क्या है ?

इस मामले का केंद्र चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision—SIR से जुड़े निर्णय हैं। SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को अद्यतन करने से जुड़ा है।

Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं पर कम-से-कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाता सूची, Form-6 में बदलाव, चुनावी डेटा तक पहुंच, IT प्रणाली और कुछ राज्यों में मतदाता सूची से संबंधित कार्रवाई शामिल थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह सवाल उठाया कि आयोग के नाम से जारी किए गए निर्णय या संचार क्या उनकी जानकारी अथवा स्वीकृति के बिना किए गए थे। हालांकि, इन रिपोर्टों का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध हो चुके हैं। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में मूल रिकॉर्ड—जैसे बैठक के मिनट्स, एजेंडा, अनुमोदन दस्तावेज, फाइल नोटिंग और अन्य संबंधित रिकॉर्ड—की जांच की मांग की गई है।

कानून में सामूहिक निर्णय की व्यवस्था

इस विवाद को समझने के लिए Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 18 महत्वपूर्ण है। इस प्रावधान के अनुसार, चुनाव आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद हो, तो उस मामले का निर्णय बहुमत की राय के आधार पर किया जाता है।

यानी मौजूदा तीन-सदस्यीय आयोग में CEC का पद महत्वपूर्ण होने के बावजूद निर्णय प्रक्रिया को केवल एक व्यक्ति के निर्णय के रूप में नहीं देखा जाता। विवाद का मुख्य कानूनी प्रश्न यह है कि जिन निर्णयों को आयोग के सामूहिक निर्णय के रूप में पेश किया गया, क्या वे वास्तव में कानून के अनुरूप अधिकृत तरीके से लिए गए थे।

चुनाव आयोग का क्या कहना है ?

दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने मीडिया रिपोर्टों में सामने आई आंतरिक असहमति की व्याख्या से असहमति जताई है। आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR सहित आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी संकेत दिया कि आंतरिक टिप्पणियां या मतभेद संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकते हैं और उन्हें आयोग के कामकाज में किसी तरह की टूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

26 सितंबर को आयोग ने SIR से जुड़े कुछ प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों पर अतिरिक्त कदमों की घोषणा भी की। इनमें ECINET प्रणाली की समीक्षा, सुनवाई की प्रक्रिया को आसान बनाना और कुछ राज्यों में दावों तथा आपत्तियों की समयसीमा से संबंधित बदलाव शामिल थे। आयोग ने फिर दोहराया कि SIR से संबंधित आदेश और कार्यक्रम सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे।

याचिका में क्या मांग की गई है ?

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग की शक्तियों का प्रयोग किस तरह सामूहिक रूप से किया जाना चाहिए। याचिका में CEC के खिलाफ quo warranto सहित राहत की मांग और यह सवाल उठाया गया है कि क्या आयोग के नाम से आदेश या निर्देश तब जारी किए जा सकते हैं जब अन्य आयुक्तों की आवश्यक स्वीकृति मौजूद न हो।

याचिका में SIR से संबंधित कार्रवाई को भी चुनौती दी गई है और कुछ परिस्थितियों में उसके तहत किए गए निर्णयों को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है। साथ ही चुनावी डेटा और संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।

अभी क्या तय हुआ है ?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केवल याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। अदालत ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि ज्ञानेश कुमार ने व्यक्तिगत रूप से या चुनाव आयोग ने सामूहिक रूप से कानून का उल्लंघन किया है। यह भी स्पष्ट है कि याचिका में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।

Election Commission of India की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें CEC के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके साथ सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त के रूप में आयोग का हिस्सा हैं।

अगले सप्ताह की सुनवाई में अब मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि आयोग के निर्णयों की वैधानिक प्रक्रिया क्या थी, रिकॉर्ड में दर्ज आपत्तियों का वास्तविक स्वरूप क्या है और SIR से जुड़े विवाद में संवैधानिक तथा वैधानिक प्रावधानों की व्याख्या किस तरह की जाती है।


🔎 तथ्य-जांच | HindiWindow Fact Check

दावा/मुद्दा स्थिति
सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह याचिका सुनेगा पुष्ट
याचिका CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को चुनौती देती है पुष्ट
याचिका में CEC को कार्यों से रोकने की मांग है पुष्ट
दो ECs ने कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज कीं रिपोर्टेड/दस्तावेजी दावों पर आधारित
14 आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई Indian Express द्वारा रिपोर्टेड
ECI ने SIR के फैसलों को सर्वसम्मत बताया ECI का आधिकारिक पक्ष
सुप्रीम कोर्ट ने CEC को दोषी ठहराया गलत
सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निलंबित कर दिया गलत
SIR को सुप्रीम कोर्ट ने अभी अवैध घोषित किया गलत