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हरिद्वार: हर की पौड़ी पर गंगा का जलस्तर घटा, श्रद्धालुओं को स्नान में परेशानी

हर की पौड़ी पर गंगा का जलस्तर घटा !

हर की पौड़ी : अपर गंगा नहर की वार्षिक बंदी और मरम्मत कार्य का असर; गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु यात्रा से पहले ताजा स्थिति जरूर जान लें।

हिंदी विंडो | उत्तराखंड | 22 अक्टूबर 2026

हरिद्वार के प्रसिद्ध तीर्थस्थल हर की पौड़ी पर गंगा का जलस्तर घटने से श्रद्धालुओं को पवित्र स्नान करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए हरिद्वार पहुंचे कई श्रद्धालुओं को अपेक्षित जलप्रवाह नहीं मिलने के कारण अपनी धार्मिक गतिविधियों में बदलाव करना पड़ा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गंगा के जलप्रवाह में इस गिरावट का संबंध अपर गंगा नहर की वार्षिक बंदी से है। इस अवधि में नहर की सफाई, गाद निकालने, संरचनात्मक मरम्मत और तटबंधों से जुड़े रखरखाव के कार्य किए जा रहे हैं। आगामी कुंभ मेले की तैयारियों को भी इन कार्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

हर की पौड़ी पर क्या है स्थिति ?

हर की पौड़ी हरिद्वार का प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा के जलस्तर में कमी आने से यात्रियों की धार्मिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ श्रद्धालुओं को गंगा में सामान्य तरीके से डुबकी लगाने में कठिनाई हुई। कुछ लोगों ने घाट की सीढ़ियों पर उपलब्ध पानी से सीमित रूप में स्नान और धार्मिक क्रियाएं पूरी कीं।

हालांकि, किसी एक समय पर हर की पौड़ी की स्थिति को पूरे हरिद्वार के सभी घाटों की स्थिति नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग घाटों पर जलस्तर और स्नान की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

क्यों कम हुआ गंगा का जलप्रवाह ?

रिपोर्टों में बताया गया है कि अपर गंगा नहर को वार्षिक रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद किया गया है। इस दौरान नहर की सफाई, गाद निकालने और मरम्मत जैसे काम किए जाते हैं। इन कार्यों के चलते हरिद्वार के कुछ प्रमुख घाटों पर जलप्रवाह प्रभावित हुआ है।

रखरखाव का उद्देश्य नहर की संरचना और जलप्रबंधन व्यवस्था को दुरुस्त रखना है। आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों का महत्व भी बढ़ गया है।

हालांकि, नहर बंदी की अवधि को लेकर अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में 18 और 20 दिन का उल्लेख मिलता है। इसलिए नहर को दोबारा खोलने की अंतिम तारीख और जलप्रवाह बहाल होने की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग की ताजा सूचना से की जानी चाहिए।

श्रद्धालुओं के लिए क्या है जरूरी ?

यदि आप आने वाले दिनों में गंगा स्नान के लिए हरिद्वार जाने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले हर की पौड़ी और संबंधित घाटों की वर्तमान स्थिति की जानकारी लें। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित सिंचाई विभाग की आधिकारिक सूचनाओं को प्राथमिकता दें।

केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो या पुरानी तस्वीरों के आधार पर यात्रा का निर्णय न लें। घाट पर स्नान की अनुमति, पानी की उपलब्धता और सुरक्षा संबंधी निर्देशों की पुष्टि करना आवश्यक है।

निष्कर्ष

हर की पौड़ी पर गंगा के जलस्तर में कमी श्रद्धालुओं के लिए असुविधा का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टें इसे अपर गंगा नहर के वार्षिक रखरखाव से जोड़ती हैं। लेकिन जलप्रवाह कब सामान्य होगा और अलग-अलग घाटों पर स्नान की क्या स्थिति रहेगी, इसका सटीक आकलन आधिकारिक अपडेट के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए फिलहाल सबसे जरूरी सलाह यही है—यात्रा से पहले ताजा जानकारी लें और स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

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