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केदारताल में लापता 7 ट्रेकर्स और गाइड की तलाश जारी, हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई रेकी; भारी बर्फबारी बनी चुनौती

केदारताल में 8 लोग फंसे ! हेलीकॉप्टर से तलाश जारी

उत्तरकाशी के केदारताल ट्रेक पर सात ट्रेकर्स और एक गाइड की तलाश जारी है। हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई रेकी के बावजूद स्पष्ट सुराग नहीं मिला। भारी बर्फबारी और हिमस्खलन से बचाव अभियान प्रभावित।

उत्तरकाशी, 1 नवंबर 2026 | हिंदी विंडो न्यूज़ डेस्क

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल ट्रेक पर लापता सात ट्रेकर्स और एक गाइड की तलाश लगातार जारी है। दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी, प्रतिकूल मौसम और हिमस्खलन के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। रविवार को हेलीकॉप्टर की मदद से प्रभावित क्षेत्र की दो बार हवाई रेकी की गई, लेकिन लापता लोगों या उनके टेंट का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल सका। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) ने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पर्वतारोहण टीम भी रवाना की है।

हेलीकॉप्टर से तलाश, लेकिन नहीं मिला स्पष्ट सुराग

केदारताल क्षेत्र में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बचाव एजेंसियां अलग-अलग विकल्पों पर काम कर रही हैं। पैदल रास्ते पर बर्फ जमने और हिमस्खलन के कारण आगे बढ़ना कठिन हो रहा है। ऐसे में हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण कर संभावित ठिकानों की पहचान करने का प्रयास किया गया।

अमर उजाला की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई रेकी की गई। इसके बावजूद लापता ट्रेकर्स या उनके टेंट का स्पष्ट दृश्य संकेत नहीं मिल पाया। इससे तलाशी अभियान की चुनौती और बढ़ गई है। हवाई रेकी में स्पष्ट संकेत न मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित लोग सुरक्षित हैं या असुरक्षित; उनकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए प्रत्यक्ष संपर्क अथवा बचाव दल का उन तक पहुंचना जरूरी है।

भोजखड़क के आगे फंसे हैं सात ट्रेकर्स और एक गाइड

प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, सात ट्रेकर्स और एक गाइड केदारताल ट्रेक पर भोजखड़क के आगे फंसे हुए हैं। ये ट्रेकर्स उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से संबंधित बताए गए हैं। उनके साथ गए तीन पोर्टर और एक कुक सुरक्षित लौट आए थे। उन्होंने अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी, जिसके बाद खोज और बचाव अभियान तेज किया गया।

जानकारी के मुताबिक, ट्रेकिंग दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल की ओर रवाना हुआ था। उसकी वापसी 29 अक्टूबर के आसपास निर्धारित थी। लेकिन मौसम बिगड़ने, भारी बर्फबारी और रास्ते में हिमस्खलन की स्थिति बनने के कारण वापसी का मार्ग बाधित हो गया। इसके बाद दल के कुछ सदस्यों तक पहुंचने और शेष लोगों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास शुरू किए गए।

Search continues for seven trekkers and guide missing at Kedartal sorties conducted by helicopter

                                                                                                                 Photo Credit : संवाद न्यूज एजेंसी

SDRF की अतिरिक्त टीम रवाना, कई एजेंसियां कर रहीं समन्वय

बचाव अभियान में SDRF, राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (NDRF), वन विभाग, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के कर्मियों और ट्रेकिंग एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है। SDRF की ओर से विशेष पर्वतारोहण टीम को अभियान में लगाया गया है। अतिरिक्त टीम को जरूरी रेस्क्यू और पर्वतारोहण उपकरणों के साथ रवाना किए जाने की जानकारी भी दी गई है।

इससे पहले जमीन के रास्ते तलाशी और रेकी की कोशिशें की गई थीं। हालांकि, बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहा। ऐसे इलाकों में बचाव दल को केवल दूरी ही नहीं, बल्कि बर्फ की गहराई, ढलानों की स्थिति, हिमस्खलन की आशंका, दृश्यता और मौसम में अचानक बदलाव जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

प्रशासन और बचाव एजेंसियों के सामने प्राथमिकता फंसे लोगों तक सुरक्षित पहुंचने और उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने की है। हेलीकॉप्टर से निकासी हो या पैदल बचाव, दोनों ही विकल्प मौसम और उड़ान अथवा मार्ग की सुरक्षा पर निर्भर करते हैं।

हिमालयी ट्रेकिंग में मौसम की चुनौती फिर सामने

केदारताल गंगोत्री क्षेत्र का एक ऊंचाई वाला हिमालयी ट्रेक है। यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और बर्फबारी के बाद परिचित रास्ते भी पहचानना मुश्किल हो सकता है। हिमस्खलन की स्थिति में मार्ग अचानक बंद हो सकता है और बचाव दलों के लिए आगे बढ़ना जोखिमपूर्ण बन सकता है।

यह घटना पर्वतीय ट्रेकिंग के दौरान मौसम की जानकारी, स्थानीय परिस्थितियों के आकलन, प्रशिक्षित गाइड, आवश्यक उपकरणों और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित करती है। ऊंचाई वाले इलाकों में जाने से पहले ट्रेकर्स को संबंधित प्रशासन और वन विभाग से मार्ग की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। मौसम खराब होने या हिमस्खलन का खतरा होने पर यात्रा जारी रखने के बजाय सुरक्षा संबंधी निर्देशों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

आगे क्या ?

फिलहाल सात ट्रेकर्स और एक गाइड की तलाश जारी होने की सूचना है। हेलीकॉप्टर से की गई रेकी में स्पष्ट सुराग नहीं मिलने के बाद अतिरिक्त पर्वतारोहण टीम की तैनाती के साथ आगे की रणनीति पर काम किया जा रहा है। अभियान की अगली कार्रवाई मौसम, दृश्यता और स्थल की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जाएगी।

हिंदी विंडो इस मामले में आधिकारिक प्रशासनिक अपडेट और संबंधित बचाव एजेंसियों से प्राप्त पुष्टि के आधार पर आगे की जानकारी साझा करेगा। जब तक प्रत्यक्ष पुष्टि उपलब्ध न हो, लापता लोगों की स्थिति या संभावित परिणामों के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

संपादकीय नोट: यह समाचार 1 नवंबर 2026 को उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। बाद में जारी आधिकारिक अपडेट के अनुसार स्थिति बदल सकती है।

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