हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

मंगल पांडे जयंती: 1857 की क्रांति के प्रथम नायक को राष्ट्र का नमन, क्यों आज भी अमर है उनका साहस?

नई दिल्ली। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) के अग्रदूत माने जाने वाले महान क्रांतिकारी मंगल पांडे की जयंती पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित अनेक नेताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि मंगल पांडे ने मातृभूमि के स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका साहसिक जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय को गर्व से भर देता है तथा उनकी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत शौर्यगाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे द्वारा प्रदर्शित अदम्य साहस भारतीय इतिहास का वह निर्णायक क्षण था जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को चुनौती दी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मंगल पांडे ने विदेशी शासन के विरुद्ध जिस निर्भीकता से क्रांति का शंखनाद किया, उसने पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और लाखों भारतीयों को मातृभूमि की आज़ादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि मंगल पांडे ने 1857 की क्रांति का बिगुल फूंककर स्वसंस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित की जनचेतना को जागृत किया। उनका बलिदान आगे चलकर स्वतंत्रता की महाज्वाला का आधार बना।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध मंगल पांडे के साहस और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मजबूत नींव रखी तथा आज भी उनका जीवन राष्ट्रसेवा का प्रेरणास्रोत है।

इतिहासकारों के अनुसार, 29 मार्च 1857 को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर छावनी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत सिपाही मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारियों के विरुद्ध विद्रोह किया। माना जाता है कि नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की आशंका ने सैनिकों में गहरा असंतोष पैदा किया था। इसी घटना ने कुछ ही सप्ताह बाद पूरे उत्तर भारत में फैले 1857 के व्यापक विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार की।

मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को फांसी दी गई। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में आज भी स्मरण किया जाता है।

हिंदीविंडो संपादकीय दृष्टिकोण :

इतिहास के महानायकों का सम्मान केवल स्मारकों और समारोहों से नहीं, बल्कि उनके मूल्यों को जीवन में उतारने से होता है। मंगल पांडे का साहस हमें याद दिलाता है कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसका आत्मसम्मान और स्वतंत्र चेतना होती है।