
नई दिल्ली।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को भविष्य में ऑनलाइन (Computer Based Test) कराने की संभावना पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि वह केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स की सिफारिशों का अध्ययन करने के बाद ही इस विषय पर आगे विचार करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे शामिल थे, ने कहा कि यदि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा को ऑनलाइन कराया जाता है तो साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा से ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली की ओर बढ़ना केवल तकनीकी बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसके लिए नई सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना भी आवश्यक होगा।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
यह सुनवाई राजद सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका पर हुई। याचिका में 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को कथित पेपर लीक के बाद रद्द किए जाने और दोबारा परीक्षा कराने से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High Power Task Force) गठित की है। इस समिति की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी और इसकी अध्यक्षता तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं।
टास्क फोर्स में कौन-कौन हैं?
समिति में कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हैं—
- नंदन नीलेकणि (अध्यक्ष)
- पूर्व ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ
- पूर्व IB निदेशक तपन डेका
- IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि
- पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
- लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा
इन विशेषज्ञों को परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है। इससे पहले अदालत 1 जून को कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की मांग पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर चुकी थी।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने कथित पेपर लीक के बाद 3 मई को आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया था। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। पूरे मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है।
संपादकीय विचार (Opinion):
जब आज देश में अरबों-खरबों रुपये का बैंकिंग लेन-देन, शेयर बाजार, टैक्स भुगतान और सरकारी सेवाएं सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित हो रही हैं, तब भविष्य में उचित साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और पारदर्शी तकनीकी ढांचे के साथ राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं तथा अन्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में डिजिटल विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। हालांकि ऐसी किसी भी व्यवस्था का आधार पूर्ण सुरक्षा, समान पहुंच, विश्वसनीयता और व्यापक सार्वजनिक विश्वास होना चाहिए।











