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UPI पर MDR को लेकर बड़ा अपडेट: ग्राहकों और छोटे दुकानदारों से शुल्क नहीं, बड़े कारोबारियों पर शुल्क की चर्चा

UPI पर शुल्क को लेकर तस्वीर साफ, ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को राहत

नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI को लेकर Merchant Discount Rate (MDR) की संभावित वापसी पर चल रही बहस के बीच Payments Council of India (PCI) ने उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। PCI ने कहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान मुफ्त बना रहेगा और छोटे कारोबारियों को UPI भुगतान स्वीकार करने पर MDR नहीं देना होगा।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब भारत में UPI के विशाल डिजिटल भुगतान ढांचे को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने और इसके संचालन, साइबर सुरक्षा तथा तकनीकी उन्नयन की लागत को लेकर बहस तेज हुई है।

ग्राहकों से UPI भुगतान का शुल्क नहीं

PCI के अनुसार, UPI की शुरुआत 2016 में होने के बाद से यह उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यानी सामान्य ग्राहक अपने बैंक खाते से UPI के जरिए भुगतान करते समय अलग से ट्रांजैक्शन फीस नहीं देगा।

NPCI के अनुसार UPI को 11 अप्रैल 2016 को पायलट रूप में लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य अलग-अलग बैंक खातों को एक सहज डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से जोड़ना था।

छोटे दुकानदारों पर भी MDR नहीं

PCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे व्यापारियों को UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए MDR नहीं देना होगा। इसका सीधा फायदा किराना दुकानों, छोटे स्थानीय कारोबार, रेहड़ी-पटरी वालों और अन्य छोटे व्यापारियों को मिलता है।

UPI के विस्तार में छोटे कारोबारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है क्योंकि QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करने के लिए पारंपरिक कार्ड मशीन जैसी महंगी व्यवस्था की जरूरत नहीं होती।

फिर MDR की चर्चा क्यों?

मामला यहीं खत्म नहीं होता। हालिया बहस मुख्य रूप से UPI के बड़े और तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान ढांचे की वित्तीय स्थिरता को लेकर है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है जिससे भविष्य में UPI जैसे इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर merchant fees लगाने की संभावना खुल सकती है। हालांकि, शुल्क की अंतिम दर और उसका वास्तविक दायरा अभी तय नहीं हुआ है।

रिपोर्ट में बड़े कारोबारियों के लिए संभावित MDR मॉडल पर चर्चा का उल्लेख है, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को शुल्क से बाहर रखने की दिशा में जोर है।

MDR आखिर होता क्या है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान प्रक्रिया में शामिल संस्थाओं के बीच लिया जा सकता है।

इसलिए MDR और ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला UPI शुल्क एक ही चीज नहीं हैं।

यही वजह है कि मौजूदा बहस में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि किस श्रेणी के कारोबारियों पर शुल्क लागू होगा, कितना होगा और उसका आर्थिक असर किस पर पड़ेगा।

UPI की स्थिरता भी बड़ा मुद्दा

भारत में UPI लेनदेन का पैमाना लगातार बढ़ा है। इसके साथ भुगतान प्रणाली के संचालन, सर्वर क्षमता, तकनीकी उन्नयन, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था पर निवेश की जरूरत भी बढ़ती है।

PCI का तर्क है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए उसके बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश जरूरी है। इस पूरे विमर्श में उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को डिजिटल भुगतान से दूर किए बिना आर्थिक स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

बैंकों, फिनटेक और भुगतान संस्थाओं का निवेश

UPI का मौजूदा नेटवर्क केवल एक मोबाइल ऐप आधारित सुविधा नहीं है। इसके पीछे बैंक, फिनटेक कंपनियां, भुगतान सेवा प्रदाता और NPCI सहित कई संस्थाएं तकनीकी एवं परिचालन ढांचे को संचालित करती हैं।

इसलिए UPI की अगली नीति को लेकर मूल सवाल यही है कि दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल भुगतान नेटवर्क में से एक को कम लागत, व्यापक पहुंच और मजबूत सुरक्षा के साथ कैसे कायम रखा जाए।

ग्राहकों के लिए अभी क्या मतलब है?

फिलहाल आम UPI ग्राहक के लिए संदेश स्पष्ट है-UPI भुगतान के लिए सीधे ग्राहक से शुल्क लेने की बात नहीं है। वहीं छोटे कारोबारियों को भी UPI भुगतान स्वीकार करने पर MDR से राहत जारी रखने की बात PCI ने कही है।

हालांकि बड़े कारोबारियों के संदर्भ में शुल्क व्यवस्था को लेकर नीति और व्यावसायिक मॉडल पर चर्चा जारी है। इसलिए इस विषय में अंतिम सरकारी/नियामकीय व्यवस्था सामने आने तक किसी निश्चित MDR दर को लागू मानना सही नहीं होगा।

हिंदी विंडो फैक्ट-चेक निष्कर्ष:
“UPI पर शुल्क लगना तय हो गया” कहना अभी सही नहीं है। सही स्थिति यह है कि UPI शुल्क व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है, जबकि PCI ने उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को शुल्क से बाहर रखने का स्पष्ट संदेश दिया है।