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अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों को हाईकोर्ट से भी जमानत नहीं, भाजपा नेता ने मजबूत अभियोजन को बताया वजह

नैनीताल/देहरादून, 21 अगस्त 2026:
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2026 को तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने की।

तीनों दोषियों को इससे पहले 30 मई 2025 को कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र अदालत ने अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील के साथ जमानत और सजा पर रोक की मांग की थी।

भाजपा नेता मनवीर सिंह चौहान का दावा

Garhwal Post की 21 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने जमानत याचिकाएं खारिज होने को मजबूत अभियोजन और विस्तृत जांच का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि मामले में लगातार प्रभावी पैरवी के कारण आरोपी अदालत से राहत हासिल नहीं कर सके। यह उनका राजनीतिक बयान है और इसे अदालत की टिप्पणी के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

चौहान के अनुसार, मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया गया था और करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और विभिन्न महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया था। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुकदमे के दौरान अभियोजन ने 47 गवाहों को अदालत में पेश किया था।

सरकार की कार्रवाई पर भी बयान

मनवीर सिंह चौहान ने दावा किया कि राज्य सरकार ने अंकिता के परिवार की मांगों और भावनाओं को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि परिवार की मांग पर सरकारी अधिवक्ताओं में बदलाव किए गए और परिवार द्वारा CBI जांच की मांग किए जाने पर सरकार ने जांच CBI को सौंपने का निर्णय लिया था। उन्होंने सरकार की ओर से परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया।

इन दावों को अलग से राजनीतिक बयान के तौर पर देखना जरूरी है। समाचार की तथ्यात्मक प्रस्तुति में अदालत के आदेश, पूर्व न्यायिक फैसले और आधिकारिक रिकॉर्ड को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड ?

19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनके लापता होने के बाद मामला सामने आया और बाद में उनका शव चीला नहर से बरामद किया गया। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई थी।

जांच के बाद पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ मामला चला। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोटद्वार अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।

हाईकोर्ट के फैसले का फिलहाल क्या मतलब है ?

हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने का सीधा अर्थ है कि तीनों दोषियों को इस स्तर पर जेल से रिहाई की राहत नहीं मिली है। उनकी ओर से निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों की न्यायिक प्रक्रिया अलग विषय है और उसका अंतिम परिणाम इस जमानत आदेश से अलग है।

हिंदी विंडो फैक्ट-चेक नोट:
इस खबर में राजनीतिक नेताओं के बयानों और न्यायिक रूप से स्थापित तथ्यों को अलग-अलग रखा गया है। “मजबूत अभियोजन के कारण जमानत खारिज हुई” को भाजपा नेता का दावा बताया गया है, जबकि सत्यापित न्यायिक तथ्य यह है कि हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं।