हरिद्वार | 23 अगस्त 2026
हरिद्वार में रविवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। ज्वालापुर मार्ग स्थित श्रीजी वाटिका में संत समाज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, योग गुरु स्वामी रामदेव और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी सहित संत समाज तथा कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से देश में चुनावी प्रक्रिया को लेकर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा पर चर्चा और विचार-विमर्श किया गया। आयोजन को लेकर हरिद्वार में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तौर पर देखा गया।
श्रीजी वाटिका में जुटे प्रमुख चेहरे
ज्वालापुर मार्ग स्थित श्रीजी वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और योग गुरु स्वामी रामदेव भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी समेत संत समाज के कई प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य लोगों ने भी इसमें भाग लिया।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर चर्चा
कार्यक्रम का केंद्र बिंदु ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ रहा। इस अवधारणा के तहत देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने का विचार सामने रखा जाता है। वर्तमान व्यवस्था में लोकसभा और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं।
हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम में इसी विषय को लेकर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं द्वारा दिए गए विस्तृत भाषण अथवा किसी नए निर्णय का विवरण उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा के भी किए गए पुख्ता इंतजाम
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोगों की मौजूदगी को देखते हुए आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ यातायात व्यवस्था पर भी विशेष निगरानी रखी गई।
क्यों महत्वपूर्ण है ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ ?
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का विचार भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक समान चुनावी चक्र में कराने से जुड़ा है। इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे बार-बार होने वाले चुनावों से जुड़े प्रशासनिक और संसाधन संबंधी दबाव को कम किया जा सकता है। दूसरी ओर, इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक, संवैधानिक और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
हरिद्वार में संत समाज की मौजूदगी में इस विषय पर आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर इस बहस को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।











