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अमेरिका में ट्रंप से दूर हो रहे भारतीय-अमेरिकी ? सर्वे में डेमोक्रेट्स को बड़ी बढ़त, मिडटर्म चुनाव से पहले रिपब्लिकन के लिए चेतावनी

US: भारतीय-अमेरिकी वोटरों का बदला रुख, ट्रंप के लिए मिडटर्म से पहले बढ़ी चिंता

वॉशिंगटन: अमेरिका में नवंबर 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत सामने आया है। नए 2026 Asian American Voter Survey (AAVS) के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को रिपब्लिकन उम्मीदवारों की तुलना में स्पष्ट बढ़त हासिल है।

सर्वे के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट के चुनाव में 66 प्रतिशत Asian Indian voters ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में यह आंकड़ा 22 प्रतिशत रहा। यह अंतर भारतीय-अमेरिकी समुदाय में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति की ओर इशारा करता है।

पूरे Asian American and Pacific Islander यानी AAPI मतदाता समूह की बात करें तो सीनेट चुनाव में 60 प्रतिशत मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और 24 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव में भी डेमोक्रेट्स 64 प्रतिशत समर्थन के साथ आगे रहे, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 22 प्रतिशत समर्थन मिला।

2024 में ट्रंप की बढ़त के बाद क्या बदला ?

भारतीय-अमेरिकी मतदाता लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति अपेक्षाकृत झुकाव रखते रहे हैं। हालांकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने इस समुदाय में पहले की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की थी।

अब 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप के प्रति यह आकर्षण कमजोर पड़ा है। लेकिन इसे भारतीय-अमेरिकी समुदाय का पूरी तरह रिपब्लिकन पार्टी से मुंह मोड़ना कहना जल्दबाजी होगी।

Carnegie Endowment for International Peace के 2026 Indian American Attitudes Survey में भी 71 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं ने ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में प्रदर्शन को अस्वीकार किया, जबकि केवल 29 प्रतिशत ने उनके प्रदर्शन को मंजूरी दी।

इसी अध्ययन के मुताबिक, भारतीय-अमेरिकियों में डेमोक्रेट के रूप में पहचान रखने वालों का अनुपात 2020 के 52 प्रतिशत से घटकर 2026 में 46 प्रतिशत हुआ, जबकि रिपब्लिकन पहचान 15 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हुई। वहीं स्वतंत्र मतदाताओं का अनुपात बढ़कर 29 प्रतिशत पहुंच गया। यानी तस्वीर सिर्फ Democrat बनाम Republican की नहीं है—एक बड़ा वर्ग दोनों पार्टियों से दूरी भी बना रहा है।

ट्रंप की भारत नीति पर भी असंतोष

भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में ट्रंप प्रशासन के प्रति असंतोष दिखाई देता है।

Carnegie के सर्वे में केवल 20 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने ट्रंप के भारत के साथ संबंधों को संभालने के तरीके को मंजूरी दी, जबकि 55 प्रतिशत ने इसे अस्वीकार किया। लगभग एक-चौथाई लोगों ने कोई राय नहीं दी।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय-अमेरिकी समुदाय को लंबे समय से भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह माना जाता रहा है।

महंगाई बना सबसे बड़ा मुद्दा

2026 AAPI Voter Survey का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष है कि चुनावी फैसले में महंगाई और Cost of Living सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।

लगभग 90 प्रतिशत Asian American voters ने कहा कि महंगाई और जीवन-यापन की लागत उनके मतदान निर्णय में बहुत महत्वपूर्ण या बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, Social Security और Medicare जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

महंगाई और Cost of Living के मुद्दे पर 44 प्रतिशत AAPI voters ने डेमोक्रेट्स को बेहतर विकल्प माना, जबकि 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन पार्टी को बेहतर बताया।

भारतीय-अमेरिकी मतदाता कितने महत्वपूर्ण हैं ?

2026 में अमेरिका में करीब 16 मिलियन eligible AAPI voters हैं। इनमें लगभग 1.6 मिलियन ऐसे मतदाता हैं जो 2022 के बाद eligible हुए हैं। ऐसे में Asian-American voters कई करीबी मुकाबलों में चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

AAPI Data और APIAVote के सर्वे में कुल 2,066 registered AAPI voters शामिल हुए, जिनमें 1,896 Asian Americans और 170 Pacific Islanders थे। सर्वेक्षण राष्ट्रीय voter file और ethnicity की पहचान के लिए अतिरिक्त डेटा पर आधारित था।

क्या यह ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक खतरा है ?

निश्चित तौर पर इसे ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए चेतावनी संकेत माना जा सकता है, खासकर उन राज्यों और congressional districts में जहां चुनाव बेहद करीबी हो सकते हैं।

लेकिन इसे सीधे तौर पर “भारतीय-अमेरिकियों ने ट्रंप को पूरी तरह छोड़ दिया” कहना आंकड़ों से समर्थित नहीं है। Carnegie के सर्वे से संकेत मिलता है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय में ट्रंप के प्रति असंतोष बढ़ा है, लेकिन साथ ही दोनों प्रमुख पार्टियों से दूरी रखने वाले मतदाताओं की संख्या भी बढ़ी है।

इसलिए नवंबर के मध्यावधि चुनावों में भारतीय-अमेरिकी वोट किस पार्टी के पक्ष में निर्णायक रूप से जाता है, यह कई मुद्दों और स्थानीय चुनावी मुकाबलों पर निर्भर करेगा।

हिंदी विंडो निष्कर्ष:
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए 2024 जैसी राजनीतिक बढ़त फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है। डेमोक्रेट्स को स्पष्ट बढ़त जरूर मिली है, लेकिन समुदाय के भीतर स्वतंत्र और कम-दलीय मतदाताओं की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि 2026 का चुनाव केवल पार्टी पहचान के आधार पर तय नहीं होगा।

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