
नई दिल्ली। देशभर में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों पर सख्ती दिखाते हुए केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए नया संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश करने जा रही है। ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों की जांच अनिवार्य रूप से दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके साथ ही आरोप पत्र दाखिल होने के बाद विशेष अदालतों को तीन महीने के भीतर मुकदमे का निस्तारण करने का लक्ष्य दिया गया है।
विधेयक में केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (Special Task Force) गठित करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष त्वरित अदालतें (Fast Track Courts) स्थापित करने तथा विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति करने का अधिकार मिलेगा।
सरकार ने संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। ऐसे मामलों में कम से कम सात वर्ष की सजा, गंभीर मामलों में अधिकतम दस वर्ष तक का कारावास तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। साथ ही कुछ अपराधों में न्यूनतम सजा को तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने का भी प्रस्ताव है।
विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं ने सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। संशोधित कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करना है।
प्रस्तावित कानून के दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) तथा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) जैसी प्रमुख संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाएं शामिल होंगी।










