हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति, 5,585 आवेदनों में से हुआ चयन

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति

अयोध्या | 2 सितंबर 2026

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासन को अधिक पेशेवर और संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है।

जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं। उन्होंने करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवा की और 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वे पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।

यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर परिसर का विस्तार जारी है और मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, प्रशासनिक जिम्मेदारियों, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय को व्यवस्थित करने की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

5,585 आवेदनों में से हुआ चयन

राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के पद के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई।

रिपोर्टों के मुताबिक इस प्रक्रिया की शुरुआत हजारों आवेदनों के साथ हुई। कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,577 उम्मीदवार प्रारंभिक मूल्यांकन में शामिल हुए। 600 अंकों के मूल्यांकन ढांचे में 470 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना गया।

इसके बाद 108 उम्मीदवारों के साथ वर्चुअल इंटरैक्शन हुआ और अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने इंटरव्यू लिया गया। चयन समिति ने अंतिम रूप से तीन नामों की सिफारिश की, जिनमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर ट्रस्ट ने मुहर लगाई।

इस चयन प्रक्रिया के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय खोज समिति बनाई गई थी। समिति में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वैज्ञानिक-उद्योगपति सुरेश हावरे भी शामिल थे।

क्यों महत्वपूर्ण है CEO का पद ?

राम मंदिर ट्रस्ट में CEO का पद केवल प्रशासनिक नियुक्ति नहीं माना जा रहा है। ट्रस्ट की गतिविधियों का विस्तार होने के साथ-साथ एक ऐसे पूर्णकालिक अधिकारी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जो रोजमर्रा के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन, संस्थागत व्यवस्था और दीर्घकालिक योजनाओं के क्रियान्वयन को एकीकृत तरीके से संभाल सके।

ट्रस्ट के अनुसार CEO सरकार के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बिना काम करेगा और ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेगा। CEO से मंदिर और ट्रस्ट की गतिविधियों के लिए दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने तथा प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करने की अपेक्षा है।

ट्रस्ट डीड में बदलाव की तैयारी

CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को औपचारिक रूप देने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है।

ट्रस्ट की बैठक में डीड में संशोधन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई है, जिसके जरिए CEO की शक्तियों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं, जिम्मेदारियों और विभिन्न समितियों के बीच समन्वय को अधिक स्पष्ट बनाना है।

इस व्यवस्था के तहत CEO को वैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों के साथ-साथ संगठनात्मक प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली को मजबूत करने की भूमिका मिलने की उम्मीद है।

दान और चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच नियुक्ति

CEO की नियुक्ति उस दौर में हुई है जब मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।

मामले की जांच और उससे जुड़े कानूनी घटनाक्रम की भी ट्रस्ट स्तर पर समीक्षा की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और विवाद के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा तथा एक अन्य पदाधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दिया था।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में आरोप और जांच की स्थिति को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी फोकस

राम मंदिर परिसर में बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए सुरक्षा समन्वय भी ट्रस्ट के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल है।

ट्रस्ट स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय को संस्थागत रूप देने के लिए एक स्थायी स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा ट्रस्ट के लिए आधिकारिक प्रेस प्रवक्ता नियुक्त करने का मुद्दा भी एजेंडे में रहा है।

नए ट्रस्टी भी नियुक्त

CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति भी की गई है। रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली के महेश भगचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी बनाया गया है।

अब आगे क्या ?

जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।

अब सबसे बड़ी चुनौती होगी—बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं के आवागमन, मंदिर परिसर के विस्तार, सुरक्षा, वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था तैयार करना।

रक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक कमान और प्रशासन संभालने वाले अधिकारी के रूप में जितेंद्र मिश्रा का अनुभव इस नई भूमिका में कितना प्रभावी साबित होता है, इस पर अब सबकी नजर रहेगी।

हिंदी विंडो का निष्कर्ष:
राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक पद भरने का फैसला नहीं है। यह संकेत है कि मंदिर से जुड़ी गतिविधियों का आकार बढ़ने के साथ ट्रस्ट अपने प्रबंधन को अधिक पेशेवर, संस्थागत और जवाबदेह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

#HindiWindow #RamMandir #Ayodhya #JeetendraMishra #RamMandirTrust #RamJanmabhoomi #AyodhyaNews #IndiaNews #HindiNews #BreakingNews