दुर्गा पूजा में मांसाहार से परहेज की धीरेंद्र शास्त्री की अपील पर बंगाल में विवाद; BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य पहले ही कह चुके हैं—लोग क्या खाएं, यह कोई बाहर से आकर तय नहीं कर सकता।
कोलकाता | 11 सितंबर 2026
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक परंपरा के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी मुद्दा बन गया है। इसी बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर में मां काली की पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक मछली का भोग ग्रहण किया।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में कौशिकी अमावस्या के अवसर पर पूजा की। इसके बाद उन्होंने जिस भोग को ग्रहण किया, उसमें मछली का सिर, तली हुई मछली और बासंती पुलाव शामिल था। कालीघाट में देवी काली को मछली और बलि की बकरी का मांस अर्पित करने की परंपरा का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है।
अधिकारी का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली हिंदुओं से मांसाहारी भोजन से परहेज करने के आह्वान को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद चल रहा है।
धीरेंद्र शास्त्री ने पश्चिम बंगाल में एक कार्यक्रम के दौरान दुर्गा पूजा के समय मांसाहारी भोजन नहीं खाने और इसकी बिक्री पर रोक की अपील की थी। उन्होंने मांसाहार करने वालों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया, जिसके बाद बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई।
इस विवाद पर BJP की पश्चिम बंगाल इकाई ने भी धीरेंद्र शास्त्री के रुख से दूरी बनाने का संकेत दिया। BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के लोगों के खान-पान और पहनावे का फैसला कोई बाहर से आकर नहीं कर सकता। उन्होंने बंगाली परंपरा में मछली और मांस के महत्व का उल्लेख करते हुए स्वामी विवेकानंद का भी संदर्भ दिया।
शुभेंदु अधिकारी ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान को उनकी व्यक्तिगत राय बताया। NDTV के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि व्यक्ति उनकी राय को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने अपने धार्मिक आचरण का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ अवसरों पर वह सात्त्विक भोजन करते हैं, जबकि मां काली को अर्पित किए गए मांसाहारी भोग को भी ग्रहण करते हैं।
कालीघाट के भोग ने दिया राजनीतिक संदेश ?
शुभेंदु अधिकारी का कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण करना केवल धार्मिक रस्म के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में इसे बंगाली सांस्कृतिक परंपरा और खान-पान को लेकर एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मंदिर में मछली का भोग ग्रहण करना कालीघाट की धार्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसे केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। दूसरी ओर, मौजूदा राजनीतिक विवाद के कारण इस घटना का राजनीतिक अर्थ निकाला जाना स्वाभाविक है।

कालीघाट: मछली-बकरे का मांस चढ़ाने की परंपरा
विवाद की बड़ी तस्वीर
इस पूरे घटनाक्रम में तीन अलग-अलग बातें सामने आती हैं—धार्मिक आस्था, क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपरा और राजनीतिक बयानबाजी।
एक तरफ धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार से परहेज की अपील की। दूसरी तरफ बंगाल BJP ने कहा कि बंगाल के लोगों के भोजन का फैसला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता। अब कालीघाट में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा पारंपरिक मछली का भोग ग्रहण करने से यह संदेश और स्पष्ट हुआ है कि बंगाल में खान-पान की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर बहस अभी खत्म नहीं हुई है।
हिंदी विंडो फैक्ट चेक नोट:
यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित है। धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर अलग-अलग पक्षों की मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए पाठकों को बयान और तथ्य के बीच अंतर समझना चाहिए।











