रायबरेली, 24 अगस्त 2026।
मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रायबरेली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से देश को भले ही कोई बड़ी अपेक्षा न हो, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के कारण उनकी संवैधानिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री योगी ने राहुल गांधी के पुणे में दिए गए उस बयान का संदर्भ दिया, जिसमें कांग्रेस नेता ने महिलाओं की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता की बात करते हुए मनुस्मृति में महिलाओं की स्थिति से जुड़े एक कथन की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं की पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं होनी चाहिए और उन्हें अपनी स्वतंत्र पहचान तथा स्वतंत्रता का अधिकार है।
योगी ने संविधान और भारतीय विरासत का मुद्दा उठाया
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है। ऐसे में उन्हें लोकतंत्र, संविधान और देश की परंपराओं एवं विरासत के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत की परंपराओं और विरासत पर टिप्पणी करते हैं, इसलिए उन्हें भारतीय प्राचीन ग्रंथों और परंपराओं को व्यापक रूप से समझना चाहिए।
योगी ने कहा कि यदि राहुल गांधी मनु और भारतीय परंपरा को समझना चाहते हैं तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण जैसे ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए।
राहुल गांधी ने पुणे में क्या कहा था?
22 अगस्त को पुणे में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर बात की थी। उन्होंने मनुस्मृति से संबंधित एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति या पुत्र के अधीन रखने की अवधारणा स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने महिलाओं को अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने भारत की महिलाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि महिलाओं के अपने सपने, कल्पनाएं और जीवन की अलग-अलग यात्राएं हैं।
विवाद का केंद्र क्या है ?
पूरे विवाद का केंद्र केवल मनुस्मृति का उल्लेख नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और आधुनिक संवैधानिक मूल्यों की व्याख्या को लेकर दो अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण हैं।
राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समानता को केंद्र में रखा, जबकि योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की टिप्पणी को भारतीय परंपरा और विरासत के संदर्भ में चुनौती दी।
योगी ने प्रधानमंत्री के बारे में की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों का भी जिक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री का पद केवल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक संस्था है। उनके मुताबिक संस्थाओं के प्रति अवमाननापूर्ण भाषा लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
अयोध्या को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई और उसके प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने अयोध्या में हनुमानगढ़ी दर्शन और उसके बाद मांसाहार से संबंधित एक कथित घटना का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर ‘दोहरे रवैये’ का आरोप लगाया।
यह आरोप मुख्यमंत्री योगी के राजनीतिक संबोधन का हिस्सा था; उपलब्ध रिपोर्ट में इस दावे के स्वतंत्र सत्यापन का उल्लेख नहीं है। इसलिए इसे तथ्य के बजाय राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी और उस पर योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर भारतीय परंपरा, महिलाओं की स्वतंत्रता, सामाजिक समानता और संविधान के मूल्यों को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
एक तरफ राहुल गांधी महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और समान अधिकारों को अपनी बात का केंद्र बना रहे हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ भारतीय विरासत और परंपरा की व्यापक समझ के साथ ऐसी टिप्पणियों को देखने की बात कर रहे हैं।
हिंदी विंडो का निष्पक्ष निष्कर्ष: दोनों नेताओं के वक्तव्यों को उनके राजनीतिक संदर्भ में पढ़ना जरूरी है। किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक ग्रंथ को लेकर बहस में मूल पाठ, संदर्भ और प्रमाण की जांच करना राजनीतिक दावों से अलग एक आवश्यक प्रक्रिया है।











