आतंकवाद पर भारत का बदला रुख :
ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट और सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख कर रक्षा मंत्री ने सक्रिय कार्रवाई की नीति पर दिया जोर; AI, नए सुरक्षा खतरों और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बताया महत्वपूर्ण।
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति, आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता—ये तीन प्रमुख विषय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया संबोधन के केंद्र में रहे। नई दिल्ली में आयोजित रक्षा सम्मेलन में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमले और सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आतंकवाद विरोधी नीति अब केवल राजनयिक निंदा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सक्रिय कार्रवाई पर भी जोर देती है।
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से होने वाले किसी भी आतंकी कृत्य के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत शांति और संवाद में विश्वास रखता है, लेकिन देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का संदेश
राजनाथ सिंह ने तीन प्रमुख सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए उन्हें भारत की सुरक्षा नीति में आए बदलाव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, इन अभियानों से यह संदेश गया कि आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगी।
हालांकि, किसी सैन्य अभियान की सफलता और उसके दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव का आकलन अलग-अलग तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। रक्षा मंत्री का बयान सरकार के सुरक्षा दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए शक्ति और तैयारी आवश्यक हैं। भारत की प्राथमिकता शांति है, लेकिन किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए रक्षा क्षमता मजबूत रहनी चाहिए।
अकेले हमलावर और डिजिटल दुष्प्रचार से बढ़ती चुनौती
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए अकेले हमला करने वाले व्यक्तियों और कथित ‘व्हाइट-कॉलर आतंकवाद’ का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल संगठित आतंकी समूहों पर नजर रखने तक सीमित नहीं है।
उन्होंने डिजिटल युग के पाँच प्रमुख खतरों की चर्चा की—दुष्प्रचार, अस्थिरता, व्यवधान, छल और विनाश। ये चुनौतियाँ सूचना प्रौद्योगिकी, संचार व्यवस्था और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
रक्षा मंत्री ने एक विमानन घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर सह-पायलट द्वारा विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस को रेखांकित करते हुए कहा कि सतर्कता और जिम्मेदारी किसी बड़े खतरे को रोकने में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस घटना के तकनीकी और जाँच संबंधी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
उन्होंने नागरिकों से भी जिम्मेदार सतर्कता बरतने का आह्वान किया। हालांकि, किसी व्यक्ति पर संदेह मात्र के आधार पर आरोप लगाने के बजाय ठोस प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देना जरूरी है।
‘स्मार्ट पावर’ से मजबूत होगी रक्षा तैयारी?
आधुनिक युद्ध की जरूरतों पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने ‘स्मार्ट पावर’ का दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। इसका आशय उन्नत हथियारों, मानवीय खुफिया जानकारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और किफायती रक्षा तकनीकों के बेहतर समन्वय से है।
आज रक्षा तैयारियों का मतलब केवल अधिक हथियार जुटाना नहीं है। सटीक जानकारी, तेज संचार, साइबर सुरक्षा, विश्वसनीय उपकरण और समय पर निर्णय लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ड्रोन, रोबोटिक्स, AI और उन्नत सेंसर जैसी तकनीकें भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन इनके प्रभावी उपयोग के लिए परीक्षण, प्रशिक्षण, तकनीकी विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।
रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा
रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा उत्पादन में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में यह लगभग 40,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने रक्षा निर्यात में भी वृद्धि का दावा किया। उनके प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 में रक्षा निर्यात लगभग 686 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर करीब 39,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँच गया। उन्होंने बताया कि भारतीय रक्षा उत्पाद लगभग 100 देशों तक पहुँच रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने वर्ष 2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल करने का विश्वास जताया। ये भविष्य के लक्ष्य हैं, न कि पहले से प्राप्त उपलब्धियाँ।
इन आंकड़ों का मूल्यांकन करते समय संबंधित वित्त वर्ष, गणना पद्धति और सरकारी आंकड़ों की परिभाषा स्पष्ट रखना जरूरी है।
स्वदेशी रक्षा उद्योग और स्टार्टअप को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने घरेलू उद्योग को मजबूत करने के लिए रक्षा खरीद में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रक्षा आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है।
उन्होंने स्वदेशीकरण की पाँच सूचियों का उल्लेख किया, जिनमें रक्षा उपकरणों, हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म सहित 509 वस्तुएँ शामिल हैं। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने स्वदेशीकरण के लिए 5,012 वस्तुओं की पहचान की थी, जिनमें से 3,255 का स्वदेशीकरण किए जाने की जानकारी उन्होंने दी।
iDEX, iDEX Prime और ADITI जैसी पहलों के माध्यम से स्टार्टअप तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रक्षा तकनीक विकसित करने के अवसर मिल रहे हैं। रक्षा मंत्री के अनुसार, मार्च 2026 तक iDEX कार्यक्रम में 676 स्टार्टअप और नवोन्मेषक शामिल हुए थे तथा 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने में सहायता मिली थी।
उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 का उत्पादन अब भारत में किया जाता है।
हालांकि, वास्तविक आत्मनिर्भरता का आकलन केवल उत्पादन की मात्रा से नहीं, बल्कि गुणवत्ता, लागत, आपूर्ति की निरंतरता और वास्तविक परिचालन प्रदर्शन से भी किया जाना चाहिए।
आगे की राह: सुरक्षा के साथ तकनीकी क्षमता
राजनाथ सिंह के संबोधन का व्यापक संदेश था कि भारत को शांति के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए अपनी रक्षा क्षमता लगातार मजबूत करनी होगी। सीमा पार आतंकवाद के साथ साइबर हमले, डिजिटल दुष्प्रचार, ड्रोन तकनीक और AI के दुरुपयोग जैसी चुनौतियाँ भी सुरक्षा नीति का हिस्सा बनती जा रही हैं।
इनसे निपटने के लिए सैन्य शक्ति के अलावा बेहतर खुफिया समन्वय, तकनीकी नवाचार, विश्वसनीय जाँच, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत घरेलू रक्षा उद्योग की जरूरत होगी।
निष्कर्ष: आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय नीति और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, दोनों भारत की सुरक्षा रणनीति के महत्वपूर्ण पहलू हैं। इन प्रयासों की वास्तविक सफलता का आकलन सरकारी घोषणाओं के साथ-साथ सत्यापित आंकड़ों, तकनीकी विश्वसनीयता और ठोस परिणामों से किया जाना चाहिए।
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