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उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार, PMGSY-4 के पहले चरण में 309 गांव जुड़ेंगे सड़क नेटवर्क से

उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार : तीन चरणों में 21,915 किमी सड़कों का निर्माण पूरा, 1,860 गांवों को मिला लाभ; चौथे चरण में 13 जिलों के लिए 9,344 किमी सड़क नेटवर्क का लक्ष्य !

PMGSY-4 की बड़ी पहल: 309 गांव जुड़ेंगे सड़क नेटवर्क से, 1,228 किमी सड़कों का निर्माण !!

उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार, PMGSY-4 के पहले चरण में 309 गांव जुड़ेंगे सड़क नेटवर्क से !!!

“प्रदेश सरकार दूरदराज के सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएमजीएसवाई सड़कों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की राह आसान होने के साथ ही पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है। विद्यार्थियों को कठिन रास्ता तय नहीं करना पड़ता। बीमारों को समय से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है, किसान अपनी फसल को मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं।”
-पुष्कर सिंह धामी
-मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी पीएमजीएसवाई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के अनुसार, योजना के तीन चरणों के तहत राज्य में अब तक 21,915 किलोमीटर लंबाई की 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इन सड़कों से प्रदेश के 1,860 गांव लाभान्वित हुए हैं।

अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अपने चौथे चरण में प्रवेश कर चुकी है। पीएमजीएसवाई-4 के पहले चक्र में उत्तराखंड के 309 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए कुल 184 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिनकी कुल लंबाई 1,228.20 किलोमीटर बताई गई है। इन परियोजनाओं पर करीब 1,707 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क संपर्क केवल आवागमन का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। दुर्गम पहाड़ी गांवों में सड़क पहुंचने से लोगों को रोजमर्रा की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बनाने में आसानी होती है। विद्यार्थियों के लिए स्कूल-कॉलेज तक पहुंच आसान होती है, जबकि आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों को शामिल किया गया है। उपलब्ध योजना विवरण में कुल 1,490 गांवों और 9,344 किलोमीटर सड़क लंबाई का उल्लेख है। वहीं योजना के अंतर्गत कुल 1,479 सड़कों के निर्माण का लक्ष्य बताया गया है।

पौड़ी में सबसे अधिक 68 गांव पहले चक्र में शामिल

पीएमजीएसवाई-4 के पहले चक्र में पौड़ी गढ़वाल जिले के 68 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की योजना है। इसके बाद अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47 गांव, बागेश्वर के 35 गांव और पिथौरागढ़ के 25 गांव इस चरण में शामिल हैं।

नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24 गांवों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है। चमोली के 17, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 तथा हरिद्वार के 2 गांवों को इस चरण में लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

इस आंकड़े से यह भी स्पष्ट होता है कि पहले चरण में विशेष रूप से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

किस जिले में कितनी सड़क योजना ?

पीएमजीएसवाई-4 के उपलब्ध जिलेवार विवरण के मुताबिक पिथौरागढ़ में 249 गांवों के लिए 1,819.6 किलोमीटर सड़क लंबाई का प्रावधान है। अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1,395.5 किलोमीटर, जबकि पौड़ी में 185 गांवों के लिए 1,227.8 किलोमीटर सड़क लंबाई दर्ज है।

चमोली में 175 गांवों के लिए 996.15 किलोमीटर, टिहरी में 168 गांवों के लिए 941.5 किलोमीटर और उत्तरकाशी में 112 गांवों के लिए 721.99 किलोमीटर सड़क लंबाई का विवरण दिया गया है।

रुद्रप्रयाग में 111 गांवों के लिए 469.2 किलोमीटर, बागेश्वर में 101 गांवों के लिए 569.82 किलोमीटर और नैनीताल में 67 गांवों के लिए 399.55 किलोमीटर सड़क लंबाई बताई गई है।

देहरादून में 52 गांवों के लिए 390 किलोमीटर, चंपावत में 39 गांवों के लिए 387.3 किलोमीटर, ऊधमसिंह नगर में 9 गांवों के लिए 22.3 किलोमीटर तथा हरिद्वार में एक गांव के लिए 3.1 किलोमीटर सड़क लंबाई का विवरण दिया गया है।

सड़क से बदल सकती है ग्रामीण अर्थव्यवस्था

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण का प्रभाव सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रहता। बेहतर सड़क संपर्क किसानों को अपनी उपज बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। पर्यटन की दृष्टि से भी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने पर स्थानीय होमस्टे, छोटे कारोबार और स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी सड़क संपर्क महत्वपूर्ण है। पहाड़ी इलाकों में लंबी दूरी और कठिन रास्तों के कारण अस्पताल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सड़क नेटवर्क का विस्तार आपातकालीन परिवहन को सुगम बनाने में सहायक हो सकता है।

उत्तराखंड सरकार ने दूरदराज के गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने को प्राथमिकता बताया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, पीएमजीएसवाई सड़कों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की राह आसान होने के साथ पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है।

केंद्र से भी मिल चुकी है वित्तीय सहायता

पीएमजीएसवाई के लिए केंद्र सरकार से उत्तराखंड को वित्तीय सहायता भी मिलती रही है। अगस्त 2025 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए योजना के तहत राज्य को 350 करोड़ रुपये की पहली केंद्रीय सहायता किस्त मंजूर की थी। PIB के अनुसार इसमें 342 करोड़ रुपये कार्यक्रम फंड और 8 करोड़ रुपये प्रशासनिक मद के लिए थे।

जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने पीएमजीएसवाई-IV के तहत उत्तराखंड समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी थी। PIB के अनुसार इन परियोजनाओं से पहले से अलग-थलग लगभग 3,270 बस्तियों को कनेक्टिविटी और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच मिलने की बात कही गई थी।

आगे क्या ?

पीएमजीएसवाई-4 के तहत उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क का विस्तार आने वाले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। हालांकि किसी भी सड़क परियोजना का वास्तविक लाभ निर्माण की गुणवत्ता, समय पर पूरा होने, रखरखाव और मौसम जैसी स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

फिलहाल उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले से बने 21,915 किलोमीटर सड़क नेटवर्क के बाद अब योजना का चौथा चरण राज्य के उन गांवों तक सड़क पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो अभी भी बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता रखते हैं।

यानी उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क अब केवल रास्ता नहीं, बल्कि गांवों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनती जा रही है।