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ऋषिकेश में कराटे का राष्ट्रीय मंच, 400 खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम; बेटियों के लिए आत्मरक्षा का सशक्त माध्यम

ऋषिकेश में कराटे का राष्ट्रीय मंच :

ऋषिकेश, 22 अगस्त 2026: तीर्थनगरी ऋषिकेश इन दिनों कराटे के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आयोजनों का केंद्र बन गई है। शनिवार से यहां द्वितीय ऑल इंडिया कराटे चैंपियनशिप 2026 का आयोजन शुरू हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से करीब 400 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। वहीं मायाकुंड स्थित हनुमान मंदिर हॉल में 15वीं उत्तराखंड राज्य अंतर विद्यालय कराटे प्रतियोगिता का भी आगाज हुआ, जिसमें प्रदेशभर से लगभग 300 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में करीब 400 खिलाड़ी

इंद्रमणि बडोनी चौक के समीप एक होटल में आयोजित द्वितीय ऑल इंडिया कराटे चैंपियनशिप में सब-जूनियर से लेकर सीनियर वर्ग तक के खिलाड़ी मुकाबलों में उतर रहे हैं। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु और भार वर्गों के खिलाड़ी अपनी तकनीक, फिटनेस और खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन समिति के महासचिव राजेंद्र गुप्ता के अनुसार, शनिवार को 300 से अधिक खिलाड़ियों की भारतोल प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। प्रतियोगिता के उद्घाटन के लिए उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को आमंत्रित किया गया था।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 300 खिलाड़ी

इसी बीच मायाकुंड स्थित हनुमान मंदिर हॉल में दो दिवसीय 15वीं उत्तराखंड राज्य अंतर विद्यालय कराटे प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ। इसमें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 300 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा और तकनीक को राज्य स्तरीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

‘बेटियों के लिए कराटे आत्मरक्षा का सशक्त माध्यम’

प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि बदलते दौर में बेटियों का आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कराटे को बेटियों के लिए केवल खेल नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ आगे बढ़ने और अपने प्रदर्शन से प्रदेश तथा देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

दोनों आयोजनों से यह संकेत भी मिलता है कि ऋषिकेश में कराटे को केवल प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, फिटनेस और आत्मविश्वास विकसित करने वाले माध्यम के तौर पर भी बढ़ावा मिल रहा है।