हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

हवाईअड्डों पर फुल-बॉडी स्कैनर में बड़ा बदलाव, मंगलसूत्र-जनेऊ जैसे भारतीय परिधानों से अनावश्यक अलार्म कम करने की तैयारी

हवाईअड्डों पर फुल-बॉडी स्कैनर में बड़ा बदलाव

हवाईअड्डों पर फुल-बॉडी स्कैनर में बड़ा बदलाव :

बेंगलुरु और कोच्चि एयरपोर्ट पर चल रहे ट्रायल से जुटाया जा रहा डेटा, भारतीय यात्रियों के अनुरूप स्कैनर के एल्गोरिदम को किया जा रहा है रिफाइन !

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट सिक्योरिटी से जुड़ी एक अहम तकनीकी पहल सामने आई है। भारत में फुल-बॉडी सिक्योरिटी स्कैनर की तकनीक को भारतीय यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया चल रही है। खास तौर पर ऐसे पारंपरिक आभूषण और धार्मिक वस्तुओं को लेकर स्कैनर की अनावश्यक चेतावनियों को कम करने पर काम किया जा रहा है, जिन्हें बड़ी संख्या में भारतीय यात्री सामान्य रूप से पहनते हैं।

नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो यानी BCAS बेंगलुरु और कोच्चि एयरपोर्ट पर फुल-बॉडी स्कैनर के ट्रायल से डेटा जुटा रहा है। इस डेटा में स्कैन के दौरान कितने अलार्म सक्रिय होते हैं और किन परिस्थितियों में मशीन किसी वस्तु को संभावित खतरे के रूप में पहचानती है, जैसी जानकारियां शामिल हैं। ट्रायल के नतीजों के आधार पर स्कैनर के एल्गोरिदम में बदलाव किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यह जानकारी BCAS के महानिदेशक राजेश निर्वाण के हवाले से PTI समेत कई रिपोर्टों में सामने आई है।

मंगलसूत्र और जनेऊ का मुद्दा क्यों आया ?

फुल-बॉडी स्कैनर का उद्देश्य यात्रियों के शरीर पर छिपी ऐसी वस्तुओं की पहचान करना है, जो विमानन सुरक्षा के लिहाज से संभावित खतरा हो सकती हैं। लेकिन जिस तकनीक और सॉफ्टवेयर को अलग-अलग देशों की जरूरतों के हिसाब से विकसित किया गया है, उसमें स्थानीय परिस्थितियों के कारण false alarms की समस्या पैदा हो सकती है।

BCAS DG राजेश निर्वाण के अनुसार, भारत में इस्तेमाल की जा रही तकनीक के एल्गोरिदम मुख्य रूप से विदेशी बाजारों के लिए डिजाइन किए गए हैं। भारत में लोग कुछ ऐसी पारंपरिक वस्तुएं पहनते हैं, जिन्हें विदेशी यात्रियों के संदर्भ में बनाए गए सिस्टम अलग तरीके से पहचान सकते हैं। इसलिए भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एल्गोरिदम को लगातार refine किया जा रहा है। रिपोर्टों में मंगलसूत्र और जनेऊ जैसे उदाहरणों का उल्लेख इसी संदर्भ में किया गया है।

यहां एक जरूरी तथ्य-जांच भी समझना महत्वपूर्ण है। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत के सभी एयरपोर्ट पर मंगलसूत्र या जनेऊ पहनने से फुल-बॉडी स्कैनर निश्चित रूप से अलार्म नहीं बजाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रक्रिया अभी ट्रायल और तकनीकी सुधार के चरण में है। अलग-अलग एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रक्रियाएं भी अलग हो सकती हैं।

बेंगलुरु और कोच्चि में क्या हो रहा है ?

BCAS के मुताबिक फुल-बॉडी स्कैनर के ट्रायल बेंगलुरु और कोच्चि एयरपोर्ट पर किए जा रहे हैं। इन ट्रायल से हासिल डेटा का मूल्यांकन किया जाएगा और उसके आधार पर आगे तकनीक में सुधार किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार आठ एयरपोर्ट पर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग में इन आठों एयरपोर्ट के नामों की पूरी सूची स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है। कोच्चि उन आठ एयरपोर्ट में शामिल नहीं है जहां स्कैनर लगाने का आदेश बताया गया है, लेकिन वहां तकनीक का ट्रायल चल रहा है।

प्राइवेसी को लेकर भी बदली जा रही है तकनीक

फुल-बॉडी स्कैनर को लेकर केवल false alarms ही नहीं, बल्कि यात्रियों की privacy भी लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। पुराने प्रकार की स्कैनिंग तकनीक में शरीर की विस्तृत छवि दिखाई देने की चिंता जताई गई थी।

BCAS DG के अनुसार नई तकनीक को “image agnostic” बनाया जा रहा है। इसका अर्थ है कि स्क्रीन पर यात्री की वास्तविक या विस्तृत शारीरिक छवि दिखाने के बजाय एक सामान्य मॉडल या mannequin जैसी आकृति दिखाई जाएगी। यदि मशीन को किसी संदिग्ध वस्तु का संकेत मिलता है तो स्क्रीन पर संबंधित हिस्से की जानकारी दी जाएगी। इससे सुरक्षा जांच के साथ यात्रियों की निजता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

फुल-बॉडी स्कैनर कैसे काम करता है ?

Airports Authority of India के अनुसार एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था में कई तरह के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें X-ray baggage inspection systems, Door Frame Metal Detectors, Hand-Held Metal Detectors, Explosive Detection Systems और Body Scanners शामिल हैं।

AAI की 2026-27 procurement projection में millimetre-wave full-body scanners का भी उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार इस प्रकार के स्कैनर कपड़ों के नीचे छिपी वस्तुओं का पता लगाने के लिए electromagnetic radiation का इस्तेमाल करते हैं और इनमें ionising radiation उत्पन्न नहीं होती।

सरकार की व्यापक सुरक्षा तैयारी

भारत में एयरपोर्ट सुरक्षा तकनीक को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया केवल फुल-बॉडी स्कैनर तक सीमित नहीं है। अप्रैल 2026 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया था कि BCAS और Rashtriya Raksha University के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत फुल-बॉडी स्कैनर और अन्य सुरक्षा स्क्रीनिंग उपकरणों के परीक्षण, performance evaluation और certification के लिए स्वदेशी Testing Centre स्थापित किया जाना है।

इससे संकेत मिलता है कि भारत एयरपोर्ट सुरक्षा तकनीक को केवल खरीदने के बजाय उसके परीक्षण और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप मूल्यांकन की व्यवस्था भी विकसित कर रहा है।

यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है ?

फिलहाल यात्रियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हर एयरपोर्ट पर नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो चुकी है। सुरक्षा जांच के दौरान एयरपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों के मौजूदा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

BCAS की आधिकारिक यात्री जानकारी में भी धातु की वस्तुओं, आभूषण, चाबियों और अन्य सामान को सुरक्षा जांच के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रखने की सलाह दी गई है। इसलिए यात्रियों को किसी नई मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अपनी सुरक्षा जांच प्रक्रिया में स्वयं बदलाव नहीं करना चाहिए।

कुल मिलाकर, भारत में फुल-बॉडी स्कैनर को अधिक प्रभावी, privacy-friendly और भारतीय यात्रियों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की दिशा में काम चल रहा है। मंगलसूत्र, जनेऊ और अन्य सामान्य भारतीय वस्तुओं से जुड़े false alarms को कम करना इस तकनीकी refinement का एक हिस्सा है। लेकिन इसका अंतिम स्वरूप और देशभर में व्यापक लागू होने की स्थिति ट्रायल और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

फैक्ट-चेक निष्कर्ष:
स्थिति — ट्रायल/तकनीकी सुधार जारी।
अभी यह दावा नहीं किया जाना चाहिए कि पूरे भारत में मंगलसूत्र या जनेऊ से स्कैनर अलार्म पूरी तरह बंद हो चुके हैं।