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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ का कहर: 750 के करीब मौतें, 3,000 से ज्यादा लापता; भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल बाढ़: तबाही के बीच भारत की मदद, नेपाली विदेश मंत्री ने जताया आभार; 3,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता

काठमांडू/नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026:
नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानी मलबे के खिसकने से शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा ने नदी घाटियों, बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।

ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या करीब 750 तक पहुंच गई है, जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में मृतकों की संख्या 734 और चीन के तिब्बत क्षेत्र में 16 बताई गई है।

नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और आसपास के क्षेत्रों में राहत एवं खोज-बचाव अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम, मलबे, क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था में आई बाधाओं के कारण बचाव दलों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

नेपाल ने भारत की मदद को सराहा

नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal ने अंतरराष्ट्रीय सहायता को लेकर भारत सहित मित्र देशों के प्रति आभार जताया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार सरकार की प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना, लोगों की जान बचाना, राहत पहुंचाना और प्रभावित नागरिकों को सहायता देना है।

भारत ने भी राहत अभियान को तेज कर दिया है। भारतीय वायुसेना का C-130J विमान राहत सामग्री की चौथी खेप लेकर नेपाल पहुंचा है। इस उड़ान में 11 टन राहत सामग्री, खोज एवं बचाव उपकरण, तकनीकी सहायता और फोरेंसिक/डीएनए विश्लेषण से जुड़े संसाधन भेजे गए।

भारत की ओर से अब तक 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। इसमें जरूरी दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य सामग्री, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और तकनीकी उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा पुलों के पुनर्निर्माण के लिए उपकरण भी भेजे गए हैं।

सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने पर विशेष ध्यान

बाढ़ ने नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी प्रभावित किया है। कुछ परियोजनाओं की सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते विशेष बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

भारत की विशेषज्ञ टीम ने प्रभावित जलविद्युत सुरंगों का निरीक्षण किया है। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर विशेष रूप से टनल रेस्क्यू, फोरेंसिक पहचान और डीएनए परीक्षण जैसे कार्यों में सहायता कर रही हैं।

नदियों के जलस्तर को लेकर फिर चेतावनी

आपदा के कई दिन बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भोटेकोशी नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद नेपाली अधिकारियों ने रासुवा तथा आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों और राहत-बचाव कर्मियों को सतर्क रहने को कहा है। नुवाकोट, धादिंग और अन्य नदी किनारे के क्षेत्रों में भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

अमेरिका ने भी बढ़ाया सहायता का हाथ

नेपाल की इस मानवीय त्रासदी के बीच अमेरिका ने भी 3.6 मिलियन डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इस सहायता में लगभग 10,000 बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तीन महीने तक आपातकालीन खाद्य सहायता शामिल है।

लापता लोगों के परिजनों का इंतजार

आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू हजारों लोगों का अब तक लापता होना है। नेपाल और तिब्बत में बड़ी संख्या में नेपाली, भारतीय और अन्य देशों के नागरिक प्रभावित हुए हैं। परिवार अस्पतालों, राहत केंद्रों और प्रशासनिक कार्यालयों में अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों के समन्वय के लिए Emergency Response Team बनाई है और लोगों से अपुष्ट सूचनाएं साझा न करने तथा आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करने की अपील की है।

स्थिति लगातार बदल रही है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े खोज एवं पहचान अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं।

स्रोत: नेपाल विदेश मंत्रालय, भारत का विदेश मंत्रालय, Reuters, AP, India Today तथा अन्य विश्वसनीय रिपोर्टें।

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