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पेरिस स्पेस समिट में पीएम मोदी का बड़ा संदेश: ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना से अंतरिक्ष को बनाएं सुरक्षित और टिकाऊ

मोदी ने कहा—भारत अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा, दुनिया के देशों से ‘को-ट्रैवलर’ बनने का आह्वान; 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय भेजने का लक्ष्य

नई दिल्ली/पेरिस, 10 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेरिस में आयोजित पहले International Space Summit को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य को लेकर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक कल्पना का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पृथ्वी पर जीवन, अर्थव्यवस्था, मौसम, कृषि, महासागर और संचार सहित अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बन चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ अंतरिक्ष क्षेत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल मानवता के साझा हित में होना चाहिए और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, जिम्मेदार व्यवहार तथा वैश्विक सहयोग को मजबूत करना जरूरी है।

‘भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब नई सीमा की ओर’

पीएम मोदी ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की कई पीढ़ियों की मेहनत ने ISRO को वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद संस्था बनाया है।

उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता का उल्लेख किया, जिसके जरिए भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। प्रधानमंत्री ने सूर्य के अध्ययन के लिए भारत के आदित्य-L1 मिशन का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं अब और आगे बढ़ रही हैं। भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन उपलब्धियों का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय गौरव तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक का लाभ व्यापक मानवता तक पहुंचाना है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को भी बढ़ावा

पीएम मोदी ने भारत के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ISRO की वैज्ञानिक क्षमता के साथ भारत की निजी कंपनियों और उद्यमियों की ऊर्जा जुड़ रही है, जिससे देश के स्पेस इकोसिस्टम को नई गति मिल रही है।

भारत सरकार भी अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी, नई तकनीक और उद्योग सहयोग को बढ़ावा दे रही है। हाल के वर्षों में भारत ने स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट सर्विसिंग, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अन्य उभरती तकनीकों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया है।

फ्रांस के साथ अंतरिक्ष सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और फ्रांस के लंबे अंतरिक्ष सहयोग को भी रेखांकित किया। भारत और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसियां ISRO और CNES लंबे समय से संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। दोनों देशों के सहयोग में Megha-Tropiques और SARAL जैसे संयुक्त उपग्रह मिशन शामिल रहे हैं।

भारत और फ्रांस अब पृथ्वी अवलोकन, उन्नत अंतरिक्ष तकनीक, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष उद्योगों के बीच सहयोग को और बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सितंबर 2026 में पेरिस International Space Summit और बेंगलुरु Space Expo इसी व्यापक सहयोग की पृष्ठभूमि में आयोजित किए गए।

‘दुनिया भारत की अगली अंतरिक्ष यात्रा में साथ चले’

पीएम मोदी ने फ्रांस और दुनिया के अन्य देशों को भारत की अगली अंतरिक्ष यात्रा में साझेदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक सहयोग और मानवता के हित से जोड़ते हुए देशों से मिलकर आगे बढ़ने की अपील की।

उन्होंने संदेश दिया कि अंतरिक्ष की खोज केवल प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं होनी चाहिए। दुनिया को अंतरिक्ष में साथ मिलकर खोज, नवाचार और संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

अंतरिक्ष में बढ़ती चुनौतियां

अंतरिक्ष गतिविधियों के बढ़ने के साथ-साथ अंतरिक्ष मलबा, उपग्रहों की सुरक्षा, स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट, ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

भारत ने अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता यानी Space Situational Awareness (SSA) को मजबूत करने के लिए ISRO के IS4OM और NETRA जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया है। इनका उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं और संभावित टकराव के जोखिमों की निगरानी तथा भारतीय अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा को मजबूत करना है।

भारत का संदेश—अंतरिक्ष सबके लिए

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का व्यापक संदेश यही रहा कि अंतरिक्ष आने वाले समय में मानव विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगा, लेकिन इसके इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार और टिकाऊ व्यवस्था जरूरी होगी।

भारत ने पेरिस समिट में अंतरिक्ष के सतत उपयोग, अंतरिक्ष-आधारित वैज्ञानिक आंकड़ों की पहुंच और अखंडता तथा रेडियो फ्रीक्वेंसी प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय ढांचे को समर्थन देने की बात कही है।

इस तरह पेरिस स्पेस समिट में भारत ने एक ओर अपनी बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर वैश्विक सहयोग, सुरक्षित अंतरिक्ष वातावरण और मानवता-केंद्रित अंतरिक्ष विकास का संदेश भी दिया।