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BRICS Summit 2026 में इंडोनेशिया का फोकस: Global South की मजबूत आवाज और व्यावहारिक आर्थिक सहयोग

BRICS Summit 2026 में इंडोनेशिया का फोकस: Global South की मजबूत आवाज और व्यावहारिक आर्थिक सहयोग

जकार्ता से रिपोर्ट:
डॉ. डी. ए. पुतु (Dr. Dewa Ayu Putu Mariana Kencanawati, S.Si.T, M.Kes)
Indonesia Correspondent, ‘Hindi Window’

नई दिल्ली/जकार्ता, 12 सितंबर 2026।
भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आज से नई दिल्ली में शुरू हो रहा है। दो दिवसीय यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है और सम्मेलन की थीम है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”, यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए मिलकर आगे बढ़ना।

इसी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शुक्रवार रात नई दिल्ली पहुंचे। भारत में उनका स्वागत केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने किया। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की यह यात्रा 18वें BRICS Summit में उनकी भागीदारी के लिए है।

इंडोनेशिया के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?

इंडोनेशिया अब BRICS का पूर्ण सदस्य है। इंडोनेशिया ने 1 जनवरी 2025 को BRICS की पूर्ण सदस्यता ग्रहण की थी। भारत की 2026 अध्यक्षता के दौरान यह इंडोनेशिया के लिए BRICS में सक्रिय भूमिका को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

जकार्ता BRICS को केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी बनाने वाले मंच के रूप में देख रहा है।

इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो ने मई 2026 में BRICS Foreign Ministers’ Meeting में कहा था कि BRICS का सबसे बड़ा महत्व विकासशील देशों की आवाज को भविष्य की वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में मजबूत करने में है।

गुटों की राजनीति नहीं, Strategic Diversification

इंडोनेशिया की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है—स्वतंत्र और सक्रिय विदेश नीति।

जकार्ता ने स्पष्ट किया है कि BRICS में उसकी भागीदारी किसी एक भू-राजनीतिक खेमे को चुनने के लिए नहीं है। इंडोनेशियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, BRICS, G20, APEC और अन्य बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भागीदारी का उद्देश्य इंडोनेशिया के रणनीतिक विकल्पों को व्यापक बनाना और विभिन्न पक्षों के हितों के बीच पुल बनाने की क्षमता मजबूत करना है।

यानी इंडोनेशिया का संदेश है—किसी एक शक्ति-गुट के साथ खड़े होने के बजाय, राष्ट्रीय हितों के आधार पर विभिन्न वैश्विक मंचों में सक्रिय भागीदारी।

खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

BRICS Summit में खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और कृषि जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा क्षेत्रों में शामिल हैं। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत इन विषयों को व्यापक आर्थिक और विकास एजेंडे का हिस्सा बनाया गया है।

इंडोनेशिया के लिए यह प्राथमिकता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रपति प्रबोवो के नेतृत्व में देश घरेलू स्तर पर खाद्य और ऊर्जा संप्रभुता को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्यों में रखता है।

इंडोनेशियाई आर्थिक नीति से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों में भी खाद्य संप्रभुता, ऊर्जा संप्रभुता, डिजिटल परिवर्तन और आर्थिक मजबूती को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया है।

व्यापार, निवेश और डिजिटल सहयोग

BRICS के आर्थिक एजेंडे में व्यापार, निवेश, अंतरराष्ट्रीय वित्त, डिजिटल तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन भी महत्वपूर्ण विषय हैं।

भारत की अध्यक्षता में BRICS के एजेंडे में WTO, IMF और World Bank जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार, वित्तीय सहयोग, Local Currency Settlement यानी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की संभावनाएं और अधिक resilient global supply chains जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इंडोनेशिया के लिए इसका अर्थ है कि BRICS के जरिए वह व्यापार और निवेश के नए अवसरों, डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी सहयोग और विकास वित्त जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों का भी महत्व

नई दिल्ली में राष्ट्रपति प्रबोवो की मौजूदगी भारत और इंडोनेशिया के बढ़ते रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।

जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो के बीच बातचीत में दोनों देशों ने Comprehensive Strategic Partnership को और मजबूत करने तथा Indo-Pacific की स्थिरता और Global South के साझा हितों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।

इसलिए नई दिल्ली BRICS Summit इंडोनेशिया के लिए केवल बहुपक्षीय सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने का भी अवसर है।

निष्कर्ष

इंडोनेशिया का BRICS दृष्टिकोण तीन प्रमुख शब्दों में समझा जा सकता है—
Global South, Strategic Diversification और Practical Cooperation.

जकार्ता BRICS को किसी टकरावपूर्ण भू-राजनीतिक गठबंधन के बजाय विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थानों में अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में एक उपयोगी मंच के रूप में देख रहा है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि 18वें BRICS Summit में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो इंडोनेशिया की इन प्राथमिकताओं को किस तरह सामने रखते हैं और BRICS के भीतर खाद्य, ऊर्जा, व्यापार, वित्त तथा वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों पर क्या ठोस सहमति बनती है।