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AIIMS ऋषिकेश भर्ती फर्जीवाड़ा: किच्छा सैटेलाइट सेंटर में नौकरी के नाम पर पैसे लेने का आरोप, ₹2 लाख नकद और फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद; आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका भी जांच के घेरे में

AIIMS Rishikesh Recruitment Scam: नौकरी के नाम पर कथित फर्जीवाड़ा, ₹2 लाख नकद और फर्जी Appointment Letters बरामद

AIIMS ऋषिकेश के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान ₹2 लाख नकद और संदिग्ध नियुक्ति पत्र बरामद होने की जानकारी सामने आई है। मामले में AIIMS के एक आउटसोर्स कर्मचारी और आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि निर्माणाधीन AIIMS सैटेलाइट सेंटर में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम मांगी जा रही थी और कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी तैयार किए गए थे।

मामले ने उस समय गंभीर रूप लिया जब 15 सितंबर को AIIMS ऋषिकेश के सुरक्षा विभाग की इंटेलिजेंस टीम ने संस्थान के प्रशासन के समन्वय से बैराज रोड क्षेत्र में कार्रवाई की। उपलब्ध पुलिस-आधारित विवरण के मुताबिक, कुछ लोगों के बीच निर्माणाधीन AIIMS किच्छा में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 3.20 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर बातचीत की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद AIIMS प्रशासन की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर ऋषिकेश कोतवाली में मामला दर्ज किया गया।

पुलिस की कार्रवाई में ₹2 लाख नकद बरामद होने की बात सामने आई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, रकम ₹500 के 400 नोटों के रूप में एक पीले रंग के लिफाफे में थी। इसके अलावा Rajdeep Enterprise के लेटरहेड पर तैयार दो संदिग्ध नियुक्ति पत्र भी बरामद किए गए। अलग-अलग रिपोर्टों में इन नियुक्ति पत्रों को MTS तथा अन्य पदों से संबंधित बताया गया है।

पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया। उपलब्ध रिपोर्टों में गिरफ्तार लोगों में सुब्रत बछाड़, दीपांशु मंडल, गणेश, दीपक गुसाईं और दीपना मंडल के नाम बताए गए हैं। इनमें दीपक गुसाईं का संबंध AIIMS में आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में काम करने से बताया गया है। पुलिस जांच में कथित धनराशि के लेनदेन और फर्जी नियुक्ति दस्तावेजों के संबंध में इन लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू AIIMS में काम करने वाली आउटसोर्स एजेंसी Rajdeep Enterprises से जुड़ा है। अमर उजाला की 18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की प्रारंभिक जांच में एजेंसी के मैनेजर विनायक और शिवा नामक व्यक्ति की भूमिका भी जांच के केंद्र में आई। रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी दीपक गुसाईं ने पूछताछ में अलग-अलग लोगों से नौकरी लगवाने के नाम पर रकम प्राप्त करने तथा उसमें से ₹2.40 लाख शिवा सिंह को दिए जाने की बात बताई। वहीं, सुब्रत बछाड़ से जुड़ी पूछताछ में शिवा सिंह और Rajdeep Enterprises के मैनेजर विनायक से संपर्क की बात सामने आने की रिपोर्ट है। इन दावों की जांच पुलिस कर रही है।

जांच का एक और महत्वपूर्ण बिंदु कथित नियुक्ति पत्र हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ दस्तावेज Rajdeep Enterprises के लेटरहेड पर तैयार पाए गए। नियुक्ति पत्रों पर कंपनी की मोहर होने और उस मोहर के इस्तेमाल से संबंधित एक कर्मचारी के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस ने इन दावों की अंतिम पुष्टि नहीं की है और दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

19 सितंबर की रिपोर्टिंग में एक और सवाल उठाया गया कि FIR में ₹2 लाख की बरामदगी का उल्लेख होने के बावजूद AIIMS की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में संबंधित आउटसोर्स कर्मचारी का नाम क्यों नहीं था। इस अंतर को लेकर संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस अंतर का आधिकारिक कारण क्या था, यह जांच से ही स्पष्ट होगा। किसी व्यक्ति को केवल प्रेस विज्ञप्ति में नाम न होने के आधार पर दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा।

मामले में अंशुल नाम के एक व्यक्ति की भूमिका की जांच किए जाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है। आरोप है कि उसने दीपक गुसाईं को बचाने का प्रयास किया। यह भी फिलहाल जांच का विषय है और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इधर, जांच के बीच Rajdeep Enterprises का कार्यालय भी कुछ दिनों तक बंद रहने की खबर सामने आई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यालय में स्टाफ मौजूद नहीं था और स्थानीय मैनेजर का मोबाइल बंद बताया गया। इससे एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे अन्य कर्मचारियों के वेतन को लेकर चिंता पैदा हुई। AIIMS के PRO डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन संबंधी समस्या न हो, इसके लिए एजेंसी से बातचीत की जाएगी।

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि AIIMS ऋषिकेश अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित भर्ती विज्ञापन प्रकाशित करता है। सितंबर 2026 में भी आधिकारिक पोर्टल पर विभिन्न प्रोजेक्ट और अन्य पदों के लिए भर्ती विज्ञापन उपलब्ध हैं। इसलिए नौकरी चाहने वाले अभ्यर्थियों के लिए किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंसी को नौकरी के बदले पैसे देने से पहले आधिकारिक भर्ती विज्ञापन और प्रक्रिया की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल पुलिस की जांच का फोकस कथित रकम के लेनदेन, फर्जी नियुक्ति पत्रों की तैयारी, दस्तावेजों पर लगी मोहर, आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका और अन्य संभावित अभ्यर्थियों से धनराशि लिए जाने की जांच पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग वास्तव में शामिल थे।

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Hindi Window की सावधानी: उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर यह मामला अभी जांचाधीन है। गिरफ्तारियां और पुलिस द्वारा बरामदगी अपने आप में न्यायिक दोषसिद्धि नहीं हैं। आगे की पुलिस जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।