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सोमालिया में भारतीय नौसेना का समुद्री रेस्क्यू ऑपरेशन: 20 नाविकों की सुरक्षित वापसी

समुद्र में 48 घंटे से अधिक चला ऑपरेशन, भारतीय नौसेना और वायुसेना ने बचाए 20 नाविक

मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ को समुद्री डाकुओं के कब्जे से छुड़ाया गया। नौसेना, वायुसेना और मरीन कमांडो के संयुक्त अभियान ने हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की तैयारियों को फिर चर्चा में ला दिया।

नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। भारतीय नौसेना ने सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास हथियारबंद समुद्री लुटेरों के कब्जे से मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ (Azini) को सफलतापूर्वक मुक्त करा लिया है। 48 घंटे से अधिक समय तक चले इस अभियान में जहाज पर सवार सभी 20 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में किसी के हताहत होने या घायल होने की खबर नहीं है।

यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्री लुटेरों के कब्जे में आया कोई जहाज केवल अपने चालक दल के लिए ही खतरा नहीं बनता। यदि उसका इस्तेमाल दूसरे जहाजों पर हमले करने के लिए किया जाए, तो आसपास के समुद्री मार्गों पर चलने वाले व्यापारिक पोतों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

कैसे शुरू हुआ समुद्री सुरक्षा का यह अभियान ?

भारतीय नौसेना के अनुसार, जहाज ‘अजिनी’ का पिछले महीने सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद आशंका पैदा हुई कि लुटेरे इस मछली पकड़ने वाले जहाज को ‘मदर शिप’ यानी आधार जहाज के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा होने पर वे इससे छोटी नौकाओं के जरिए दूसरे व्यापारिक जहाजों पर हमले करने की कोशिश कर सकते थे।

समुद्र में किसी जहाज की पहचान करना और उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखना आसान काम नहीं है। विशाल समुद्री क्षेत्र, बदलता मौसम, सीमित दृश्यता और जहाजों की लगातार आवाजाही सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती पेश करती है। ऐसी परिस्थितियों में निगरानी, सूचना साझा करने और सही समय पर कार्रवाई करने का तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है।

युद्धपोत और समुद्री निगरानी विमान ने संभाला मोर्चा

खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना ने मिशन पर तैनात एक युद्धपोत को कार्रवाई के लिए भेजा। इसके साथ समुद्री निगरानी विमान की मदद भी ली गई। दोनों ने समन्वित तरीके से लगातार निगरानी की, अपहृत जहाज का पता लगाया और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी।

सरकारी जानकारी के मुताबिक, जहाज की आवाजाही सीमित करने और उसे भागने से रोकने के लिए नियंत्रित गैर-घातक उपाय भी अपनाए गए। इसका उद्देश्य स्थिति पर नियंत्रण स्थापित करना और आगे की सामरिक कार्रवाई के लिए परिस्थितियां तैयार करना था।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि समुद्री सुरक्षा अभियान केवल हथियारों के इस्तेमाल का नाम नहीं है। ऐसी कार्रवाई में सही जानकारी जुटाना, जोखिम का आकलन करना, जहाज पर मौजूद निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत के मुताबिक बल का इस्तेमाल करना भी महत्वपूर्ण होता है।

INDIAN NAVY'S MARITIME SECURITY STRATEGY: AN ASSESSMENT - National Maritime Foundation

भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से पहुंचाए गए अतिरिक्त मरीन कमांडो

इस अभियान का एक खास पहलू भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के बीच समन्वय रहा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मरीन कमांडो की संख्या बढ़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से सटीक एयरड्रॉप के जरिए अतिरिक्त कमांडो तैनात किए गए।

इसके बाद भारतीय नौसेना ने सामरिक कार्रवाई करते हुए जहाज को अपने नियंत्रण में लिया और समुद्री लुटेरों के खतरे को निष्क्रिय कर दिया। जहाज पर मौजूद सभी 20 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया।

इस कार्रवाई से पता चलता है कि जटिल समुद्री अभियानों में केवल एक युद्धपोत की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होती। निगरानी, हवाई परिवहन, विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कमांडो और समुद्र में तैनात सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय अभियान की सफलता में अहम भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में अभियान के हर सामरिक चरण, कमांडो की सटीक संख्या और समुद्री लुटेरों की गिरफ्तारी या हिरासत के बारे में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन पहलुओं पर बिना अतिरिक्त पुष्टि के कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।

आखिर क्या होता है ‘मदर शिप’ ?

समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में ‘मदर शिप’ उस बड़े जहाज को कहा जाता है जिसका इस्तेमाल छोटी नौकाओं, चालक दल, ईंधन या दूसरे संसाधनों को साथ लेकर दूर तक गतिविधियां संचालित करने के लिए किया जा सकता है।

समुद्री लुटेरों के मामले में किसी बड़े जहाज पर कब्जा करके उसे आधार के रूप में इस्तेमाल करने से उनकी परिचालन पहुंच बढ़ सकती है। छोटी और तेज नौकाओं के जरिए वे दूसरे जहाजों के करीब पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि, हर मछली पकड़ने वाला जहाज मदर शिप नहीं होता और न ही किसी जहाज का अपहरण अपने आप यह साबित करता है कि उसका इस्तेमाल आगे हमलों के लिए किया ही जाना था। ‘अजिनी’ के मामले में यह एक संभावित खतरा था, जिसकी आशंका भारतीय नौसेना ने आधिकारिक तौर पर व्यक्त की।

समुद्री डकैती आज भी क्यों है गंभीर चुनौती ?

दुनिया के कई देशों के बीच सामान, ऊर्जा संसाधन, खाद्य उत्पाद और औद्योगिक कच्चा माल समुद्री मार्गों से पहुंचता है। ऐसे में जहाजों पर हमला, चालक दल को बंधक बनाना या फिरौती की मांग करना केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि व्यापार और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौती भी है।

सोमालिया के आसपास का समुद्री क्षेत्र लंबे समय से समुद्री डकैती की समस्या के कारण अंतरराष्ट्रीय ध्यान में रहा है। हालांकि, समुद्री सुरक्षा की स्थिति समय और क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती है। किसी एक घटना के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरे क्षेत्र में समुद्री डकैती बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) समुद्री डकैती और जहाजों के खिलाफ सशस्त्र लूट की घटनाओं को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज करता है। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में होने वाली समुद्री डकैती और किसी देश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में होने वाली सशस्त्र लूट के बीच कानूनी अंतर भी है।

सोमालिया के तट के पास भारतीय नौसेना ने समुद्री लुटेरों से मछली पकड़ने वाले जहाज को छुड़ाया

हिंद महासागर में भारत की भूमिका

भारतीय नौसेना ने इस अभियान को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री यात्रियों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से जोड़ा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई नौसेना की परिचालन तैयारी और विभिन्न सैन्य सेवाओं के बीच समन्वय का उदाहरण है। भारत ने इस क्षेत्र में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ और ‘पसंदीदा सुरक्षा साझेदार’ की भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।

इस संदर्भ में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ का अर्थ संकट की स्थिति में शुरुआती सहायता या कार्रवाई करने वाले पक्ष से है। वहीं, ‘पसंदीदा सुरक्षा साझेदार’ एक रणनीतिक अभिव्यक्ति है, जिसका इस्तेमाल क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा में भारत की भूमिका बताने के लिए किया जाता है। इसे किसी औपचारिक अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग के रूप में नहीं समझना चाहिए।

निष्कर्ष: आधुनिक समुद्री डकैती के खिलाफ तकनीक, तैयारी और सहयोग जरूरी

जहाज ‘अजिनी’ की सुरक्षित रिहाई ने एक बार फिर दिखाया कि समुद्र में सुरक्षा बनाए रखना कितना जटिल काम है। इसमें केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि लगातार निगरानी, समय पर सूचना, प्रशिक्षित कर्मियों और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल की जरूरत होती है।

इस अभियान का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि सभी 20 नाविक सुरक्षित बचा लिए गए। अब इस घटना से जुड़े विस्तृत सामरिक पहलुओं और आगे की कानूनी कार्रवाई के बारे में अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

हिंदी विंडो का निष्कर्ष: समुद्री डकैती कोई बीते जमाने की कहानी नहीं है। आधुनिक जहाजों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उन्नत तकनीक के दौर में भी समुद्र की सुरक्षा एक साझा वैश्विक जिम्मेदारी है।

स्रोत: भारत सरकार का रक्षा मंत्रालय/प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), 3 नवंबर 2026; DD News।

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