UNGA में जेलेंस्की की बड़ी अपील, भारत समेत 47 देशों के नागरिकों को लेकर जताई चिंता
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दावा किया कि रूस 47 देशों के नागरिकों को युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है। भारत सरकार के अनुसार 227 भारतीय नागरिकों के रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की जानकारी है, जिनमें 139 को डिस्चार्ज किया जा चुका है और 51 की मृत्यु की जानकारी सामने आई है।
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | 24 सितंबर 2026
न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध में विदेशी नागरिकों की भागीदारी का मुद्दा उठाया है। बुधवार, 23 सितंबर 2026 को महासभा के सामान्य विमर्श को संबोधित करते हुए जेलेंस्की ने भारत समेत 47 देशों से अपने नागरिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध से दूर रखने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस विभिन्न देशों के नागरिकों की भर्ती कर उन्हें युद्ध के मैदान में भेज रहा है।
जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि रूस के युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने जिन देशों के नाम लिए, उनमें भारत के अलावा घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, कुछ विदेशी नागरिक रूस पहुंचने के बाद युद्ध में शामिल हुए और इनमें से कई लोगों की युद्ध के मैदान में मौत भी हुई है।
जेलेंस्की ने 47 देशों के प्रतिनिधियों को सीधे संबोधित करते हुए उनसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके नागरिक रूस-यूक्रेन युद्ध का हिस्सा न बनें। उन्होंने रूस पर विदेशी नागरिकों को कथित तौर पर “धोखे और चालों” के जरिए युद्ध में शामिल करने का आरोप लगाया। यह ध्यान रखना जरूरी है कि भर्ती के तौर-तरीकों और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को लेकर जेलेंस्की के ये दावे यूक्रेन के राष्ट्रपति के सार्वजनिक आरोप हैं; इन्हें हर मामले में स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
भारत से जुड़ा आंकड़ा क्या है ?
इस पूरे घटनाक्रम का भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती से जुड़ा आधिकारिक आंकड़ा है।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सितंबर के पहले सप्ताह में बताया था कि भारत को 227 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने की जानकारी मिली है। इनमें से 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों से डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 51 भारतीय नागरिकों की मृत्यु होने की जानकारी भारत के पास है। मिसरी ने यह भी कहा था कि भारतीय नागरिकों की भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है और नई दिल्ली ऐसे मामलों में लोगों की रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए मॉस्को के संपर्क में है।
इस आंकड़े को जेलेंस्की के बयान से अलग-अलग समझना जरूरी है। जेलेंस्की ने 47 देशों के नागरिकों की बात व्यापक संदर्भ में की, जबकि भारत सरकार का 227 का आंकड़ा उन भारतीय नागरिकों से संबंधित है जिनके रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की जानकारी भारत के पास है। इसलिए दोनों आंकड़ों को सीधे एक ही श्रेणी का आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।
जेलेंस्की ने रूस की आर्थिक क्षमता पर भी निशाना साधा
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में केवल विदेशी नागरिकों की भर्ती का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने रूस की युद्ध क्षमता और उसे मिलने वाली आर्थिक ताकत को सीमित करने की भी अपील की।
जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ व्यापार से मिलने वाला पैसा युद्ध को जारी रखने की उसकी क्षमता को प्रभावित करता है। उन्होंने देशों से रूस की आय के स्रोतों और युद्ध को वित्त उपलब्ध कराने वाली गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने की अपील की। उन्होंने रूस के तेल क्षेत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि यूक्रेन का लक्ष्य केवल तेल या ईंधन को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रूस की युद्ध को वित्तपोषित करने की क्षमता को सीमित करना है।
उन्होंने रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का भी उल्लेख किया। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि उत्तर कोरिया रूस को सैनिक उपलब्ध करा रहा है और इसके बदले उसे उन्नत सैन्य क्षमताओं तक पहुंच मिल रही है। इस संदर्भ में उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन तकनीक का भी उल्लेख किया।
युद्ध के अगले चरण को लेकर भी चेतावनी
जेलेंस्की ने अपने भाषण में आने वाली सर्दियों का जिक्र करते हुए यूक्रेन की ऊर्जा और हीटिंग व्यवस्था पर संभावित दबाव की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रखता है, तो यूक्रेन रूस के ऊर्जा और हीटिंग ढांचे को निशाना बनाकर जवाब दे सकता है।
इससे साफ है कि यूएन में जेलेंस्की का संबोधन केवल कूटनीतिक अपील तक सीमित नहीं था। इसमें विदेशी लड़ाकों की भर्ती, रूस की अर्थव्यवस्था, सैन्य उत्पादन, ऊर्जा ढांचा, उत्तर कोरिया के साथ सहयोग और युद्ध की आगे की दिशा जैसे कई मुद्दे शामिल रहे।
भारत के लिए इसका क्या महत्व है ?
भारत लंबे समय से रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के संदर्भ में बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है। ऐसे में भारतीय नागरिकों की रूसी सेना में भर्ती का मुद्दा नई दिल्ली के लिए मानवीय और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
जेलेंस्की का बयान भारत पर किसी नई अंतरराष्ट्रीय बाध्यता की घोषणा नहीं है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक राजनीतिक और कूटनीतिक अपील है। दूसरी ओर, भारत पहले ही अपने नागरिकों की भर्ती और उनकी वापसी का मुद्दा रूस के साथ उठा चुका है। इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत-रूस संपर्क के जरिए शेष भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी स्वदेश वापसी के संबंध में क्या प्रगति होती है।
हिंदी विंडो फैक्ट चेक नोट:
इस खबर में जेलेंस्की के आरोपों को आरोप/दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 227 भारतीयों, 139 डिस्चार्ज और 51 मौतों का आंकड़ा भारतीय विदेश सचिव द्वारा बताए गए सरकारी आंकड़े पर आधारित है।











