UNGA में पाकिस्तान का भारत पर तीखा हमला :
81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ ने कश्मीर, सिंधु जल समझौते और भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के मुद्दे उठाए; भारत की ओर से पाकिस्तान के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के आम वाद-विवाद सत्र में भारत के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। अपने करीब 23 मिनट के संबोधन में शरीफ ने जम्मू-कश्मीर, भारत-पाकिस्तान संबंध, सिंधु जल, धार्मिक स्वतंत्रता और कथित इस्लामोफोबिया जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। पाकिस्तान सरकार ने पहले ही संकेत दिया था कि प्रधानमंत्री के संबोधन में कश्मीर, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक सुरक्षा और इस्लामोफोबिया समेत कई मुद्दे शामिल होंगे।
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान की विदेश नीति का प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए कश्मीर विवाद का समाधान आवश्यक है। उन्होंने कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की बात दोहराई और पाकिस्तान के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराया, जिसके तहत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के संदर्भ में उठाया जाता रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीर को पाकिस्तान की “jugular vein” यानी बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
शरीफ ने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का भी उल्लेख किया। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया और पाकिस्तानी सेना की प्रशंसा की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी धन्यवाद दिया और दावा किया कि उनके हस्तक्षेप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित बड़े संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई। इस घटनाक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग दावे और राजनीतिक व्याख्याएं सामने आती रही हैं। इसलिए इस हिस्से को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दावे के रूप में देखना महत्वपूर्ण है।
भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और हिंदुत्व से जुड़े आरोपों पर केंद्रित रहा। शहबाज शरीफ ने भारत में मुसलमानों के खिलाफ कथित भेदभाव, धार्मिक स्थलों पर हमलों और सांप्रदायिक हिंसा का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से “RSS-driven Hindutva ideology” का उल्लेख करते हुए इसे धार्मिक नफरत बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण का भी संदर्भ दिया और इसे अपने आरोपों के उदाहरण के तौर पर पेश किया। ये आरोप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्र में रखे गए राजनीतिक दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
कश्मीर के साथ-साथ सिंधु जल का मुद्दा भी भाषण में प्रमुख रहा। शहबाज शरीफ ने सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पानी को राजनीतिक या सैन्य हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत द्वारा पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान “act of war” यानी युद्ध की कार्रवाई मानेगा। यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ओर से दिया गया स्पष्ट राजनीतिक और कूटनीतिक बयान था।
सिंधु जल संधि के संदर्भ में पाकिस्तान और भारत की स्थिति अलग है। पाकिस्तान ने संधि की वैधता और निरंतरता पर जोर दिया है, जबकि भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को “abeyance” यानी स्थगित स्थिति में रखने की घोषणा की थी और इसे आतंकवाद के खिलाफ व्यापक नीति से जोड़ा है। मौजूदा विवाद इसलिए केवल पानी के बंटवारे का विषय नहीं, बल्कि भारत-पाकिस्तान के व्यापक संबंधों से जुड़ा हुआ है।
भारत की ओर से भी शहबाज शरीफ के भाषण पर प्रतिक्रिया सामने आई। संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक पेटल गेहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बयानों को खारिज किया और पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया। भारतीय पक्ष ने विशेष रूप से ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का संदर्भ देते हुए पाकिस्तान पर आतंकवाद के सवालों से बचने का आरोप लगाया।
भारत का जम्मू-कश्मीर पर आधिकारिक रुख भी पाकिस्तान से अलग है। नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताती है और पाकिस्तान के साथ विवादों को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने की बात करती है। भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है और 1972 के शिमला समझौते का भी उल्लेख करता है। सितंबर 2026 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा UNGA में कश्मीर का उल्लेख किए जाने पर भी भारत ने इसी रुख को दोहराया था।
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में सिर्फ भारत और कश्मीर पर ही बात नहीं की। उन्होंने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, गाजा, फिलिस्तीन, आतंकवाद, अफगानिस्तान, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक असमानता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे विषय भी उठाए। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदब को वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इन्हें संघर्ष का केंद्र नहीं बनने देने की अपील की।
कुल मिलाकर, 81वीं UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भाषण भारत-पाकिस्तान संबंधों के कई संवेदनशील मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से सामने लाने वाला रहा। कश्मीर, पानी और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाकिस्तान ने अपना पारंपरिक कूटनीतिक रुख दोहराया, जबकि भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को चुनौती देते हुए आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े अपने पक्ष को सामने रखा। ऐसे में UNGA का यह भाषण दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक मतभेदों का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।












