एशियाई खेलों में बेटियों का शानदार जलवा : क्रिकेट में स्वर्ण से लेकर कबड्डी, निशानेबाजी, स्क्वैश, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स तक—Aichi-Nagoya Asian Games 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने लगातार देश का मान बढ़ाया !
नागोया/टोक्यो, जापान | 26 सितंबर 2026
कभी बेटियों के सपनों को बेटों के सपनों से छोटा समझा जाता था। परिवारों में बेटों की सफलता को प्राथमिकता देने की सामाजिक सोच लंबे समय तक दिखाई देती रही। लेकिन आज भारतीय खेल जगत की तस्वीर इस सोच को चुनौती देती नजर आ रही है। एशियाई खेलों के मैदान से लगातार ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां भारतीय बेटियां न केवल पदक जीत रही हैं, बल्कि मुश्किल मुकाबलों में देश के लिए निर्णायक प्रदर्शन भी कर रही हैं।
Aichi-Nagoya Asian Games 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों ने एक बार फिर यह दिखाया है कि अवसर, प्रशिक्षण और भरोसा मिलने पर बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
26 सितंबर को भारतीय महिला कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दैनिक ट्रिब्यून के लाइव अपडेट के मुताबिक भारत ने पहले हाफ में 22-16 की बढ़त बनाई थी। दूसरे हाफ में ईरान ने जोरदार वापसी करते हुए अंतर को सिर्फ एक अंक तक ला दिया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने निर्णायक क्षणों में संयम बनाए रखा और अंततः टीम ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में अपना चौथा स्वर्ण पदक हासिल किया।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कबड्डी में भारत और ईरान के बीच मुकाबले लंबे समय से कड़े रहे हैं। भारतीय महिला टीम 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण नहीं जीत सकी थी, लेकिन इसके अलावा अन्य संस्करणों में उसने स्वर्ण पदक हासिल किया है। 2026 के फाइनल में दबाव के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने मुकाबले के अंतिम हिस्से में अपनी बढ़त कायम रखी।
भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रभाव केवल कबड्डी तक सीमित नहीं रहा है। इससे पहले 22 सितंबर को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 147 रन से हराकर एशियाई खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 216 रन बनाए, जो एशियाई खेलों में किसी महिला टीम का रिकॉर्ड स्कोर बताया गया है। जवाब में श्रीलंकाई टीम 69 रन पर सिमट गई।
इस मुकाबले में स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा और रिचा घोष जैसी खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गेंदबाजी में भी भारतीय टीम ने विपक्षी बल्लेबाजी को लगातार दबाव में रखा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इस जीत के साथ हांगझोउ 2022 में जीते स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव किया।
निशानेबाजी में भी भारतीय बेटियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में सोनम उत्तम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन और विदर्सा विनोद के भारतीय दल ने रजत पदक जीता। भारत ने 1903.3 अंक हासिल किए, जबकि चीन ने स्वर्ण पदक के साथ 1904.2 अंक बनाए।
एलावेनिल वलारिवन ने इसी एशियाई खेलों में व्यक्तिगत 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भी रजत पदक हासिल किया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने उसी दिन टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा में दो रजत पदक जीते।
26 सितंबर को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस टीम स्पर्धा में तिलोत्तमा सेन, विदर्सा विनोद और आशी चौकसी की भारतीय तिकड़ी ने भी रजत पदक जीता। भारतीय टीम ने 1763 अंक हासिल किए, जबकि चीन 1773 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। व्यक्तिगत क्वालीफिकेशन में तिलोत्तमा और विदर्सा ने फाइनल के लिए जगह बनाई।
स्क्वैश में 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने महिला एकल सेमीफाइनल में जापान की विश्व नंबर छह खिलाड़ी सतोमी वातानाबे को 3-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। खास बात यह रही कि अनाहत शुरुआती दो गेम हारने के बाद भी मुकाबले में लौटीं और लगातार तीन गेम जीतकर मैच अपने नाम किया।
भारोत्तोलन में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया। उनके 198 किलोग्राम के कुल वजन ने भारत को इस स्पर्धा में लंबे अंतराल के बाद एशियाई खेलों का पदक दिलाया।
एथलेटिक्स में भी भारतीय महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां सामने आईं। महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में सीमा ने कांस्य पदक जीता। OCA के अनुसार उन्होंने 32:39.18 के समय के साथ स्वर्ण पदक विजेता विनफ्रेड यावी और रजत पदक विजेता नोजोमी तनाका के पीछे तीसरा स्थान हासिल किया।
इन उपलब्धियों को केवल पदकों की संख्या के रूप में देखना अधूरा होगा। इनके पीछे वर्षों की मेहनत, अभ्यास, परिवार का सहयोग, कोचों का मार्गदर्शन और खिलाड़ियों का व्यक्तिगत संघर्ष शामिल है। भारत ने Aichi-Nagoya Asian Games के लिए 492 खिलाड़ियों का दल घोषित किया था, जिसमें 227 महिला खिलाड़ी शामिल थीं।
(महिलाओं का कबड्डी फ़ाइनल जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ी टीम फ़ोटो के लिए पोज़ देते हुए। इमेज क्रेडिट/AP/PTI)
यह तस्वीर भारतीय समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। बेटियों को यदि शिक्षा, खेल, संसाधन, सुरक्षा और अवसर दिए जाएं, तो वे केवल परिवार का नाम नहीं बल्कि देश का नाम भी रोशन कर सकती हैं।
आज एशियाई खेलों से आती इन तस्वीरों को देखकर उस भाव को महसूस किया जा सकता है—हम बेटों को संभालते, संवारते और उनकी सफलता के सपने देखते रहे; उधर बेटियों ने अपने दम पर सीमाएं पार कर आसमान छू लिया।
इन भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां उन तमाम परिवारों के लिए प्रेरणा हैं, जहां कोई बेटी अपने सपनों को लेकर अभी शुरुआत कर रही है।
बधाई बेटियों… भारत को तुम पर गर्व है।












