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कचरे से ₹5,102 करोड़ की कमाई और संसाधनों की बचत: विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में ई-कचरे पर जोर

कचरे से ₹5,102 करोड़ की कमाई
कचरे से ₹5,102 करोड़ की कमाई और संसाधनों की बचत !

E-Waste से ₹5,102 करोड़ की कमाई: Special Swachhata Campaign 6.0 में कबाड़ से संपदा तक !

विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से पांच वर्षों में ₹5,102.91 करोड़ की आय हुई। जानिए अभियान के आंकड़े, ई-कचरा प्रबंधन और Waste to Wealth की पूरी कहानी !!

पांच साल में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से ₹5,102.91 करोड़ की आय, 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक सरकारी कार्यालयी जगह हुई खाली

कचरे से ₹5,102 करोड़ की कमाई :

नई दिल्ली। जिसे आम तौर पर कूड़ा-कचरा या कबाड़ समझकर अनुपयोगी मान लिया जाता है, वही सरकारी व्यवस्था में संसाधन और राजस्व का जरिया भी बन सकता है। केंद्र सरकार के विशेष स्वच्छता अभियानों के तहत पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से ₹5,102.91 करोड़ की आय होने की जानकारी सामने आई है। इसी अवधि में सरकारी कार्यालयों में 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक जगह खाली कराई गई, जिसका बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग समेत कई विभागों के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर 2026 को विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के कार्यान्वयन चरण की शुरुआत के दौरान दी। DD News की रिपोर्ट के अनुसार अभियान अब केवल कार्यालयों की सामान्य साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन, अनुपयोगी सामान के निपटान, ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल तक इसका दायरा बढ़ा है।

स्वच्छता अभियान से संसाधन प्रबंधन तक

विशेष स्वच्छता अभियान की शुरुआत 2021 में सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी और अनुपयोगी रिकॉर्ड तथा सामान के निपटान जैसे उद्देश्यों के साथ हुई थी। समय के साथ इसका दायरा बढ़ता गया। अब इसमें पुरानी फाइलों और रिकॉर्ड के साथ-साथ बेकार फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ई-कचरे के व्यवस्थित निपटान को भी महत्व दिया जा रहा है।

PIB के मुताबिक, 2021 से विशेष अभियानों के पांच संस्करणों और जुलाई 2026 तक की मासिक सचिवालय सुधार निगरानी के दौरान 24.20 लाख से अधिक साइटों को कवर किया गया, 180.48 लाख से अधिक फाइलों को हटाया या बंद किया गया और कबाड़ के निपटान से ₹5,102.91 करोड़ से अधिक राजस्व अर्जित हुआ।

इसका अर्थ यह है कि अभियान का एक हिस्सा सीधे सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता और संसाधन उपयोग से जुड़ गया है। अनुपयोगी रिकॉर्ड और कबाड़ हटने से जगह खाली होती है, जबकि निपटान योग्य सामग्री से राजस्व प्राप्त होता है।

ई-कचरा क्यों है महत्वपूर्ण ?

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या बढ़ने के साथ ई-कचरे का प्रबंधन पर्यावरणीय और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो गया है। कंप्यूटर, मॉनिटर, प्रिंटर, नेटवर्क उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को सामान्य कचरे के साथ मिलाकर फेंकना उचित नहीं माना जाता।

भारत में ई-कचरे का प्रबंधन E-Waste (Management) Rules, 2022 के तहत किया जाता है। ये नियम 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हुए। नियमों में निर्माता, उत्पादक, रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और डिस्मैंटलर जैसे संबंधित पक्षों की भूमिकाएं निर्धारित की गई हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य ई-कचरे का ऐसा प्रबंधन सुनिश्चित करना है जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव कम हो। नियमों में उत्पादकों के लिए Extended Producer Responsibility यानी EPR व्यवस्था भी शामिल है और ई-कचरे के पुनर्चक्रण के लिए पंजीकृत रिसाइक्लरों के माध्यम से प्रबंधन पर जोर दिया गया है।

इस बार अभियान में क्या खास है ?

Special Campaign 6.0 का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। सरकार ने इस संस्करण में ई-कचरे की प्रभावी collection, segregation और disposal पर विशेष जोर दिया है। इसके साथ ही लंबित मामलों को कम करना, रिकॉर्ड की समीक्षा और छंटाई, कार्यालयी जगह का बेहतर उपयोग तथा अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान भी अभियान का हिस्सा है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी अभियान के तहत ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार अभियान उसके अधीन कार्यालयों, क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य संस्थानों में लागू किया जा रहा है।

100 से अधिक विज्ञान संस्थान भी अभियान में शामिल

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और CSIR से जुड़े 100 से अधिक वैज्ञानिक संस्थानों ने 2 अक्टूबर से विशेष अभियान 6.0 में भाग लेना शुरू किया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत पृथ्वी भवन और मौसम भवन में ई-कचरे तथा अनुपयोगी उपकरणों की पहचान और निपटान की प्रक्रिया शुरू की गई। वहां 705 वस्तुओं की पहचान की गई है।

अभियान को केवल कबाड़ हटाने तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक संस्थानों में ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसमें अनुपयोगी सामग्री को संसाधन के रूप में देखा जा सके।

‘Waste to Wealth’ की अवधारणा

सरकार ने इस पहल को ‘Waste to Wealth’ यानी कचरे से संपदा की अवधारणा से भी जोड़ा है। इसका मूल विचार यह है कि किसी वस्तु के अनुपयोगी हो जाने का अर्थ यह नहीं कि उसमें कोई आर्थिक या उपयोगी मूल्य नहीं बचा है।

CSIR के तकनीकी पोर्टफोलियो में नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक पुनर्चक्रण, ई-कचरे से महत्वपूर्ण धातुओं और खनिजों की रिकवरी, लिथियम-आयन बैटरी पुनर्चक्रण, बायोमेथेनेशन और अपशिष्ट जल से संसाधन पुनर्प्राप्ति जैसी तकनीकें शामिल हैं।

हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹5,102.91 करोड़ की राशि केवल ई-कचरे से हुई कमाई नहीं है। आधिकारिक आंकड़ा ई-कचरे और अन्य कबाड़ के निपटान से हुई कुल आय को दर्शाता है। इसलिए इसे केवल ई-कचरे से प्राप्त राजस्व बताना सही नहीं होगा। PIB और DD News दोनों के विवरण में इसे e-waste और scrap disposal से जुड़ी संयुक्त राशि के रूप में बताया गया है।

सफाई से आगे बढ़कर प्रशासनिक सुधार

विशेष स्वच्छता अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसका उद्देश्य केवल दिखाई देने वाली गंदगी हटाना नहीं है। पुराने रिकॉर्ड, अनुपयोगी सामान और लंबित फाइलों को व्यवस्थित तरीके से हटाने से कार्यालयों में उपलब्ध भौतिक स्थान और प्रशासनिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

पिछले पांच वर्षों के अभियान में 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक कार्यालयी जगह खाली कराई गई है। सरकार का कहना है कि ऐसी खाली हुई जगह का उपयोग बेहतर कार्यालय व्यवस्था या अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

तथ्य-जांच निष्कर्ष

तथ्य: पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से ₹5,102.91 करोड़ की आय का आधिकारिक आंकड़ा दिया गया है।
तथ्य: 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक कार्यालयी जगह खाली कराई गई।
तथ्य: 180.48 लाख से अधिक फाइलें हटाई/बंद की गईं।
तथ्य: 24.20 लाख से अधिक साइटों को अभियान के तहत कवर किया गया।
स्पष्टीकरण: ₹5,102.91 करोड़ को केवल ई-कचरे से हुई कमाई बताना सही नहीं होगा; यह ई-कचरे और अन्य कबाड़ के निपटान से जुड़ा संयुक्त आंकड़ा है।
वर्तमान स्थिति: Special Campaign 6.0 का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है।

Source: ddnews.gov.in

यानी जिस कचरे को अक्सर केवल समस्या समझा जाता है, उसके व्यवस्थित निपटान में स्वच्छता, संसाधन बचत, जगह का बेहतर इस्तेमाल और राजस्व—चारों पहलू जुड़े हो सकते हैं। लेकिन इस मॉडल की वास्तविक पर्यावरणीय सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ई-कचरे का संग्रह, पृथक्करण और अंतिम पुनर्चक्रण निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और अधिकृत चैनलों के माध्यम से कितना प्रभावी ढंग से किया जाता है।