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हरिद्वार में औद्योगिक विकास पर धामी का जोर, बोले— उद्योगों के लिए नियामक नहीं, सहयोगी की भूमिका निभा रही सरकार

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हरिद्वार में औद्योगिक विकास :

7वें सीआईआई उत्तराखंड इंडस्ट्रियल समिट एंड एक्सपो-2026 में निवेश और रोजगार पर फोकस; सरकार ने 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयों और 1.27 लाख युवाओं को रोजगार मिलने की जानकारी दी  !

हरिद्वार, 9 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित 7वें सीआईआई उत्तराखंड इंडस्ट्रियल समिट एंड एक्सपो-2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को उद्योगों के लिए अनुकूल गंतव्य बनाने पर जोर दिया। हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए केवल नियामक की भूमिका में नहीं, बल्कि सहयोगी और सहभागी के रूप में काम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने उद्योग, व्यापार, निवेश और नवाचार को राज्य की आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण आधार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार की पहचान केवल धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में भी विकसित हुई है। इस प्रकार के आयोजन सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद बढ़ाने, नई तकनीकों को सामने लाने तथा निवेश की संभावनाओं पर विचार करने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराते हैं।

उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

मुख्यमंत्री के अनुसार किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति में उद्यमियों, व्यापारियों और निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, नई तकनीक और नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और सरल व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। निवेशकों और उद्यमियों के सामने आने वाली प्रक्रियागत कठिनाइयों को कम करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार की ओर से निवेश मित्र व्यवस्था और सिंगल विंडो सिस्टम को भी इसी उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के वक्तव्य के अनुसार, सिंगल विंडो व्यवस्था के अंतर्गत 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि, इन सेवाओं की उपलब्धता अपने आप में सभी निवेश प्रस्तावों के समयबद्ध निस्तारण या परियोजनाओं के धरातल पर उतरने का प्रमाण नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव निवेशकों के अनुभव, स्वीकृतियों की समयसीमा और शुरू हुई परियोजनाओं के आधार पर आंका जाना चाहिए।

29 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयों का दावा

कार्यक्रम के दौरान राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं और इनके माध्यम से लगभग 1.27 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।

एमएसएमई क्षेत्र उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से विविध राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है। बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ छोटे और मध्यम उद्यम स्थानीय स्तर पर उत्पादन, सेवाओं, आपूर्ति श्रृंखला और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। पहाड़ी जिलों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय कौशल को बाजार से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

हालांकि, रोजगार के इन आंकड़ों का पूरा आकलन करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का कितना हिस्सा है, रोजगार कितने समय तक कायम रहा और कितने अवसर स्थानीय युवाओं को मिले। उपलब्ध जानकारी में इन सभी बिंदुओं का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।

स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले उद्यमी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस संदर्भ में उत्तराखंड स्टार्टअप नीति और स्टार्टअप को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थापित 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड का उल्लेख किया गया।

स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्यम नए उत्पादों, सेवाओं तथा तकनीकी समाधानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन किसी भी फंड की प्रभावशीलता केवल उसकी घोषित राशि से नहीं, बल्कि वास्तविक आवंटन, निवेश प्राप्त करने वाले स्टार्टअप, उनके कारोबार की वृद्धि और सृजित रोजगार जैसे परिणामों से मापी जाती है।

इसलिए राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास का आकलन करते समय वित्तीय सहायता की उपलब्धता के साथ उद्यमों के टिकाऊ विकास और बाजार तक उनकी पहुंच पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

कनेक्टिविटी और औद्योगिक ढांचे पर फोकस

मुख्यमंत्री ने सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार को राज्य की औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी से माल की आवाजाही, बाजारों तक पहुंच और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं।

इस संदर्भ में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना का उल्लेख किया गया। औद्योगिक विकास के लिए केवल परिवहन ढांचा ही पर्याप्त नहीं होता; इसके साथ बिजली, पानी, भूमि, कुशल श्रमिक, पर्यावरणीय अनुपालन और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं भी आवश्यक होती हैं।

राज्य में ऊधमसिंह नगर जिले के खुरपिया क्षेत्र में लगभग 1,002 एकड़ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जाने की जानकारी भी दी गई। यह परियोजना औद्योगिक गतिविधियों और निवेश के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करने की क्षमता रखती है। हालांकि, परियोजना की प्रगति, निवेश प्रतिबद्धताओं और वास्तविक उत्पादन शुरू होने की स्थिति अलग-अलग चरण हैं, जिन्हें एक-दूसरे के समान नहीं माना जाना चाहिए।

पहाड़ी जिलों तक औद्योगिक विकास पहुंचाने की पहल

उत्तराखंड में औद्योगिक गतिविधियां लंबे समय से मैदानी क्षेत्रों और स्थापित औद्योगिक केंद्रों में अधिक केंद्रित रही हैं। ऐसे में चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में विशेष औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में काम किए जाने की बात महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, छोटे उद्यमियों को आधुनिक औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार में फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही है। भविष्य में सेलाकुई और पंतनगर में भी ऐसी सुविधाएं विकसित करने की योजना बताई गई।

फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल में सीमित भूमि पर कई इकाइयों के लिए साझा या बहुस्तरीय औद्योगिक स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे उन छोटे उद्यमियों को लाभ मिल सकता है जिनके लिए अलग औद्योगिक भूखंड खरीदना या विकसित करना कठिन होता है। हालांकि, इसकी सफलता सुविधाओं की लागत, उपयोगिता, परिवहन, बिजली-पानी और उद्यमियों की वास्तविक मांग पर निर्भर करेगी।

स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्यमों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ जैसी पहलों का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाना और उनके विपणन की संभावनाओं को बढ़ाना है।

उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों, औषधीय और हर्बल उत्पादों, आयुष, इंजीनियरिंग तथा ऑटो कंपोनेंट जैसे क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की संभावनाएं मौजूद हैं। इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए गुणवत्ता मानकों, उत्पाद प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, कौशल विकास और बाजार संपर्क को मजबूत करना आवश्यक होगा।

राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक प्रतिस्पर्धा की चुनौती

मुख्यमंत्री ने राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों और कारोबारी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, राज्य को बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान में ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी और एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स-2024 में अपनी श्रेणी में शीर्ष स्थान मिलने की बात कही गई।

ऐसी उपलब्धियां कारोबारी माहौल और निर्यात तैयारी के आकलन में महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती हैं। फिर भी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए वास्तविक निवेश, निर्यात वृद्धि, उत्पादकता, रोजगार की गुणवत्ता और क्षेत्रीय संतुलन जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

निवेश से रोजगार तक पहुंचना होगी असली कसौटी

7वें सीआईआई उत्तराखंड इंडस्ट्रियल समिट एंड एक्सपो-2026 ने राज्य में उद्योग, निवेश, तकनीक और रोजगार को लेकर सरकार तथा उद्योग जगत के संवाद को मंच प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन से जुड़े सीआईआई प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं तथा औद्योगिक इकाइयों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

उत्तराखंड के सामने प्रमुख अवसर यह है कि औद्योगिक निवेश को स्थानीय युवाओं के लिए टिकाऊ रोजगार, छोटे उद्यमियों के लिए कारोबार के अवसर और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए संतुलित आर्थिक विकास में बदला जाए। इसके लिए नीतियों की घोषणा के साथ उनका क्रियान्वयन, परियोजनाओं की नियमित निगरानी और परिणामों की पारदर्शी जानकारी भी आवश्यक होगी।

राज्य के औद्योगिक भविष्य का आकलन अंततः इस आधार पर होगा कि निवेश की घोषणाएं कितनी वास्तविक परियोजनाओं में बदलती हैं, कितने रोजगार लंबे समय तक बने रहते हैं और विकास का लाभ प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों तक किस हद तक पहुंचता है।