उत्तराखंड : विपक्ष के हंगामे पर सीएम धामी का हमला, भ्रष्टाचार और यूसीसी पर भी रखी बात
गैरसैंण/भराड़ीसैंण, 28 अक्टूबर 2026 | हिंदी विंडो न्यूज़ डेस्क
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आयोजित दो दिवसीय विधानसभा सत्र का समापन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और विपक्ष के विरोध के बीच हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्र के समापन के बाद कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसके विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने राज्य में अपनी सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए फैसलों, भ्रष्टाचार, समान नागरिक संहिता और मदरसा व्यवस्था में बदलाव का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने इस सत्र को मौजूदा सरकार के कार्यकाल का अंतिम विधानसभा सत्र बताया। उनके अनुसार, इस वर्ष गैरसैंण में दो बार विधानसभा सत्र आयोजित किया गया और पिछले पांच वर्षों में यहां सबसे अधिक समय तक सदन की कार्यवाही चली।
विपक्ष के विरोध पर मुख्यमंत्री का पलटवार
सत्र के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शनों की आलोचना की। उन्होंने विपक्ष के रवैये को अराजकता फैलाने वाला बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक असंतोष और टकराव की राजनीति करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के राज्य आंदोलन और रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के लोगों की भावनाओं और आंदोलन के इतिहास का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के संदर्भ में भी टिप्पणी की और कांग्रेस के राजनीतिक सहयोगियों के रुख पर सवाल उठाए।
ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान हैं। संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया और आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र प्रमाणों का अलग से परीक्षण किया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी हुई राजनीतिक बहस
मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला और अपनी सरकार में किसी घोटाले से इनकार किया। उन्होंने मंत्री रेखा आर्य से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए अपना पक्ष रखा।
हालांकि, किसी सरकार में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित शिकायतों, जांच एजेंसियों के निष्कर्षों, सरकारी अभिलेखों और न्यायिक स्थिति की स्वतंत्र जांच जरूरी है। इस रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के दावे को उनके बयान के रूप में ही दर्ज किया गया है।

Photo Credit: अमर उजाला
भू-कानून, मदरसा व्यवस्था और यूसीसी का जिक्र
मुख्यमंत्री ने राज्य में लागू किए गए सख्त भू-कानून, मदरसा बोर्ड की जगह नई व्यवस्था और समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को अपनी सरकार के प्रमुख फैसलों के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने दावा किया कि गलत तरीके से संचालित 250 से अधिक मदरसों को बंद किया गया है। इस संख्या, कार्रवाई के कानूनी आधार और संबंधित संस्थानों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक आदेशों तथा विभागीय आंकड़ों की जांच आवश्यक है।
यूसीसी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं को कुछ कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यह सरकार का पक्ष है; कानून के वास्तविक प्रभाव, उसके क्रियान्वयन और विभिन्न समुदायों पर पड़ने वाले असर का आकलन कानूनी प्रावधानों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
सदन में अनुपूरक बजट और विधेयक भी पारित
विधानसभा सत्र का समापन केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। अमर उजाला की अलग रिपोर्ट के अनुसार, सदन में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट और विनियोग विधेयक सहित कुल 10 विधेयक पारित किए गए। विपक्ष ने भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग की। विरोध के दौरान सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और अंततः विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
अब आगे क्या ?
विधानसभा सत्र के दौरान उठे मुद्दे उत्तराखंड की राजनीति में जवाबदेही, विकास, राज्य आंदोलन की विरासत और कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़े व्यापक सवाल सामने रखते हैं। सत्ता पक्ष ने अपने फैसलों का बचाव किया, जबकि विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की।
इन दावों और प्रतिदावों का मूल्यांकन सरकारी दस्तावेजों, विधानसभा की कार्यवाही, स्वतंत्र जांच और संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर किया जाना चाहिए।
हिंदी विंडो का संपादकीय दृष्टिकोण: राजनीतिक आरोपों को तथ्य के रूप में पेश करने के बजाय उनके स्रोत और संदर्भ को स्पष्ट करना जरूरी है। पाठकों तक विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों और सभी संबंधित पक्षों के पक्ष को महत्व दिया जाएगा।
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