
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले 15 जहाज़, भारत में उर्वरकों की आपूर्ति होगी मजबूत; सरकार ने कहा- किसानों को नहीं होगी खाद की कमी
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर पड़े प्रभाव के बावजूद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि उर्वरक एवं उर्वरक निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल लेकर आने वाले 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और तय कार्यक्रम के अनुसार भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इन जहाज़ों के भारत पहुंचने के साथ ही देश में उर्वरकों का भंडार और अधिक मजबूत होगा तथा आगामी कृषि सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
संकट के बीच भी नहीं टूटी आपूर्ति श्रृंखला
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव देखने को मिला। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ता है।
इसके बावजूद भारत सरकार ने समयबद्ध रणनीति, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय और लगातार निगरानी के माध्यम से उर्वरकों की आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया। सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से भी आयात सुनिश्चित कर आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया।
जेपी नड्डा ने बताया सरकार की रणनीति
केंद्रीय रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष का असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ा। उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई और परिवहन अवधि भी बढ़ी।
उन्होंने कहा कि भारत भी इस वैश्विक स्थिति से पूरी तरह अछूता नहीं रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पहले से ही सतर्क थी। समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए, जिसके कारण किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने में सफलता मिली।
28 भारतीय मिशनों ने निभाई अहम भूमिका
सरकार के अनुसार विदेशों में स्थित 28 भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों ने इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन मिशनों ने विभिन्न देशों के उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा तथा उर्वरक विभाग को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित कराने में सहयोग दिया।
यूरिया की आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड जैसे देशों से व्यवस्था की गई। वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब सहित कई देशों से सुनिश्चित की गई।
कितनी मात्रा में आ रहा है उर्वरक ?
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार—
- 8 जहाज़ों से लगभग 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया भारत आ रहा है।
- 4 जहाज़ों में लगभग 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी लदा है।
- 3 जहाज़ों में लगभग 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर भेजा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त पांच अन्य जहाज़ भी भारत के लिए निर्धारित हैं। इनमें अमोनिया, अतिरिक्त यूरिया और सल्फर की खेप लदी हुई है, जिनके भी निर्धारित समय के भीतर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने की संभावना है।
घरेलू उत्पादन ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
सरकार ने बताया कि कुछ समय पहले प्राकृतिक गैस की सीमित उपलब्धता के कारण उर्वरक संयंत्र प्रभावित हुए थे, लेकिन अब गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। इसके चलते देश के सभी यूरिया संयंत्र पूर्ण क्षमता पर उत्पादन कर रहे हैं।
उत्पादन के आंकड़े भी सकारात्मक रहे हैं—
- अप्रैल 2026 में लक्ष्य 20.34 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले 20.98 लाख मीट्रिक टन उत्पादन।
- मई 2026 में लक्ष्य 22.55 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले 25.19 लाख मीट्रिक टन उत्पादन।
- जून 2026 में लक्ष्य 24.96 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले 25.37 लाख मीट्रिक टन उत्पादन।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कुल 71.55 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य से 3.69 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
डीएपी उत्पादन में भी बढ़त
डीएपी उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
- अप्रैल: 3.03 लाख मीट्रिक टन
- मई: 3.93 लाख मीट्रिक टन
- जून: 2.88 लाख मीट्रिक टन
पहली तिमाही में कुल 9.84 लाख मीट्रिक टन डीएपी का उत्पादन हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य 8.61 लाख मीट्रिक टन से लगभग 1.23 लाख मीट्रिक टन अधिक रहा।
एनपीके और एसएसपी का उत्पादन भी मजबूत
सरकार के अनुसार पहली तिमाही के दौरान—
- एनपीके उर्वरकों का घरेलू उत्पादन 20.77 लाख मीट्रिक टन रहा।
- एसएसपी उर्वरकों का उत्पादन 13.50 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया।
देश में उपलब्ध है पर्याप्त खाद भंडार
सरकार का कहना है कि आयात और घरेलू उत्पादन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है कि देश में फिलहाल उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार वर्षभर की अनुमानित 383.90 लाख मीट्रिक टन आवश्यकता के मुकाबले 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडार पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है। यह कुल वार्षिक आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है।
सरकार का दावा है कि इससे आगामी खरीफ और अन्य कृषि मौसमों में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।











