
संपादकीय नोट:
यह रिपोर्ट वियतनाम के खान्ह होआ प्रांत के अस्पताल द्वारा जारी चिकित्सा आंकड़ों और विशेषज्ञों की सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी सलाह पर आधारित है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना है। यह रिपोर्ट किसी भारतीय क्षेत्र से संबंधित नहीं है।
खान्ह होआ (वियतनाम), 9 जुलाई 2026
वियतनाम के खान्ह होआ प्रांत से सामने आए स्वास्थ्य आंकड़ों ने परजीवी कृमि संक्रमण को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। महज चार महीनों में 12,541 लोगों ने अस्पताल पहुंचकर परजीवी संक्रमण की जांच करवाई, जिनमें से 3,427 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई।
खान्ह होआ प्रांतीय उष्णकटिबंधीय रोग अस्पताल के अनुसार सबसे अधिक मामले कुत्तों और बिल्लियों से फैलने वाले गोलकृमि (Roundworm) संक्रमण के मिले। इसके अलावा बड़ी संख्या में लिवर फ्लूक तथा स्ट्रॉन्गिलोइड्स संक्रमण भी सामने आए।
अस्पताल के उप निदेशक डॉ. ली थे हुई ने बताया कि 1 मार्च से 8 जुलाई के बीच किए गए परीक्षणों में 4,522 लोगों की जांच गोलकृमि, 3,280 लोगों की लिवर फ्लूक और 2,848 लोगों की स्ट्रॉन्गिलोइड्स संक्रमण के लिए की गई।
इनमें 2,049 लोग कुत्तों और बिल्लियों से फैलने वाले गोलकृमि, 699 लोग लिवर फ्लूक तथा 635 लोग स्ट्रॉन्गिलोइड्स संक्रमण से संक्रमित पाए गए।
एक मरीज ने बताया कि वह अक्सर अपने पालतू कुत्तों के साथ रहती थीं और उन्हें नियमित कृमिनाशक दवा नहीं देती थीं। शरीर पर लगातार खुजली होने के बाद जांच में पता चला कि उन्हें कुत्तों से फैलने वाला गोलकृमि संक्रमण हो गया है। समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. ली क्वोक कोंग का कहना है कि कई लोग आज भी बिना अच्छी तरह धोई गई कच्ची सब्जियां खाते हैं, असुरक्षित पानी पीते हैं और पालतू जानवरों की स्वच्छता को गंभीरता से नहीं लेते। यही आदतें परजीवी संक्रमण का बड़ा कारण बन रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लिवर फ्लूक के लार्वा शरीर में प्रवेश कर यकृत (लीवर) और पित्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण गंभीर जटिलताओं और कुछ मामलों में कैंसर जैसी स्थिति तक पहुंच सकता है।
इसी प्रकार कुत्तों और बिल्लियों के गोलकृमि संक्रमण से लगातार खुजली, एलर्जी, लीवर में सूजन, फेफड़ों की समस्या तथा गंभीर मामलों में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र तक प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की प्रमुख सलाह
- भोजन अच्छी तरह पकाकर खाएं।
- कच्ची सब्जियों और फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
- केवल सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल का उपयोग करें।
- पालतू कुत्तों और बिल्लियों को नियमित कृमिनाशक दवा दें।
- उनके मल का सुरक्षित तरीके से निपटान करें।
- पालतू जानवरों को सार्वजनिक स्थानों पर खुले में मल त्याग न करने दें।
- बच्चों को हाथ धोने की आदत सिखाएं।
- लगातार खुजली, एलर्जी या अन्य असामान्य लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं।















