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भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन पहुंचे अंतरिक्ष स्टेशन, 8 महीनों में करेंगे AI, बायोप्रिंटिंग और मेडिकल रिसर्च

भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने शुरू किया पहला अंतरिक्ष मिशन, ISS पर करेंगे भविष्य की तकनीकों पर शोध

नई दिल्ली/ह्यूस्टन।

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अपने करियर के पहले अंतरिक्ष मिशन की सफल शुरुआत करते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station-ISS) पर कदम रख दिया है। वे रूस के Soyuz MS-29 अंतरिक्ष यान से लगभग आठ महीने के वैज्ञानिक मिशन पर आईएसएस पहुंचे हैं। इस दौरान वे मानव अंतरिक्ष अन्वेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), चिकित्सा विज्ञान, माइक्रोग्रैविटी, बायोप्रिंटिंग और सेमीकंडक्टर तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोगों का हिस्सा बनेंगे।

कजाकिस्तान स्थित बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सफल प्रक्षेपण के बाद सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान ने लगभग तीन घंटे की उड़ान और दो ऑर्बिट पूरी कर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के Prichal Module से सफलतापूर्वक डॉकिंग की।

अनिल मेनन के साथ इस मिशन में रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos के कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी शामिल हैं।

आईएसएस पहुंचने के बाद अगले दो सप्ताह तक स्टेशन पर कुल 10 अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहेंगे।

लॉन्च से पहले जताया गर्व

रवाना होने से पहले अनिल मेनन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा—

“संयुक्त राज्य स्पेस फोर्स की सेवा करते हुए और नासा व अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के समर्थन में आज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरना मेरे लिए गर्व की बात है।”

उन्होंने अपने परिवार, मित्रों और नासा समुदाय का आभार भी व्यक्त किया।

मिशन में क्या करेंगे अनिल मेनन ?

यह मिशन केवल अंतरिक्ष यात्रा नहीं बल्कि भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

अनिल मेनन निम्न क्षेत्रों में शोध करेंगे—

AI आधारित मेडिकल जांच

वे Artificial Intelligence और Augmented Reality की मदद से अंतरिक्ष में अल्ट्रासाउंड करेंगे, जिससे भविष्य में पृथ्वी से डॉक्टरों की सहायता के बिना भी अंतरिक्ष यात्रियों का इलाज संभव हो सकेगा।

सेमीकंडक्टर क्रिस्टल रिसर्च

माइक्रोग्रैविटी में बेहतर गुणवत्ता वाले सेमीकंडक्टर क्रिस्टल विकसित करने पर शोध होगा।

इसका उपयोग—

  • सुपर कंप्यूटर
  • AI प्रोसेसर
  • मेडिकल उपकरण
  • आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स

के निर्माण में किया जा सकेगा।

अंतरिक्ष में रक्त प्रवाह का अध्ययन

वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने पर मानव शरीर में रक्त प्रवाह कैसे बदलता है।

बायोप्रिंटिंग तकनीक

माइक्रोग्रैविटी में Bio-Printed Vascular Constructs विकसित किए जाएंगे।

यह भविष्य में—

  • कृत्रिम अंग निर्माण
  • नई दवाओं के परीक्षण
  • उम्र बढ़ने की प्रक्रिया की समझ

में मदद कर सकता है।

कौन हैं अनिल मेनन ?

अनिल मेनन भारतीय मूल के अमेरिकी चिकित्सक, इंजीनियर और अंतरिक्ष यात्री हैं।

उनकी प्रमुख उपलब्धियां—

  • NASA Astronaut
  • Flight Surgeon
  • SpaceX के पहले फ्लाइट सर्जन
  • अमेरिकी स्पेस फोर्स में अधिकारी
  • आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ

उनका चयन वर्ष 2021 में NASA Astronaut Group में हुआ था।

ISS क्यों है दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला ?

1998 में शुरू हुए International Space Station पर पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से लगातार मानव उपस्थिति बनी हुई है।

यह पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा करता है।

यहां गुरुत्वाकर्षण लगभग शून्य होने के कारण ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग संभव होते हैं जिन्हें पृथ्वी पर करना कठिन होता है।

भविष्य के मिशनों की तैयारी

NASA का कहना है कि यह मिशन केवल वर्तमान अनुसंधान तक सीमित नहीं है।

इस मिशन से प्राप्त आंकड़े—

  • Artemis Mission
  • Moon Base
  • Mars Mission
  • Deep Space Exploration

जैसी भविष्य की योजनाओं के लिए बेहद उपयोगी होंगे।

वैज्ञानिकों की नजर इन प्रयोगों पर

विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह मिशन सफल रहता है तो—

  • अंतरिक्ष चिकित्सा में क्रांति आ सकती है।
  • AI आधारित हेल्थ मॉनिटरिंग विकसित होगी।
  • पृथ्वी पर गंभीर बीमारियों के इलाज में नई तकनीकें विकसित हो सकती हैं।
  • भविष्य के मंगल मिशनों की तैयारी आसान होगी।

प्रमुख तथ्य (Quick Facts)

विषय जानकारी
मिशन Soyuz MS-29
अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन
अवधि लगभग 8 महीने
स्थान International Space Station
मुख्य शोध AI, मेडिकल साइंस, BioPrinting, Semiconductor
साथ में Pyotr Dubrov, Anna Kikina
स्टेशन की ऊंचाई लगभग 400 किमी