संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्पष्ट संदेश, कश्मीर पर OIC की टिप्पणी पर जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक विषय है और ऐसे अंतर-क्षेत्रीय संगठनों को इस मुद्दे में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जिनका न तो क्षेत्रीय आधार है और न ही अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से प्रत्यक्ष संबंध।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद की “विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के तंत्र को मजबूत करने” विषय पर आयोजित खुली बहस के दौरान कहा कि ऐसे समूह, जिनके पास किसी क्षेत्र विशेष की पर्याप्त जानकारी और विषयगत विशेषज्ञता नहीं है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान में भूमिका निभाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
हालांकि उन्होंने अपने वक्तव्य में किसी संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत स्पष्ट रूप से ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की ओर माना गया, जो विभिन्न मंचों पर कई बार जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है।
भारत ने कहा कि स्थापित क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठन अपने क्षेत्र से जुड़े विवादों के समाधान में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के पूरक बन सकते हैं, लेकिन अंतर-क्षेत्रीय संगठन इस भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
यह टिप्पणी उस समय आई जब संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए इसे दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया।
OIC की भूमिका पर भारत की आपत्ति
57 सदस्य देशों वाला OIC मुख्य रूप से इस्लामी देशों के बीच धार्मिक सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा देने वाला संगठन है। भारत का मानना है कि यह संगठन अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से संबंधित कोई क्षेत्रीय संस्था नहीं है, इसलिए कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रीय विवादों में उसकी भूमिका उचित नहीं मानी जा सकती।
OIC ने अक्टूबर 2025 में जारी अपने एक बयान में जम्मू-कश्मीर को लेकर विभिन्न प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन की बात दोहराई थी।
भारत का ऐतिहासिक पक्ष
भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शुरुआती प्रस्तावों के अनुसार सबसे पहली शर्त पाकिस्तान द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से अपने सैनिकों और समर्थित लड़ाकों की पूर्ण वापसी थी। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने इन शर्तों का कभी पालन नहीं किया और सीमा पार आतंकवाद को समर्थन जारी रखा, जिसके कारण उन प्रस्तावों की मूल शर्तें कभी पूरी नहीं हो सकीं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दोहराया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में किसी भी बाहरी संगठन के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और इस विषय पर भारत का रुख स्पष्ट एवं स्थिर है।











