
नई दिल्ली, 29 जुलाई।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया। सोशल मीडिया मंच X पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि वे अपने शिष्यों के व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले मार्गदर्शक होते हैं।
प्रधानमंत्री ने लिखा-
“गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।”
इसके साथ उन्होंने संस्कृत का एक प्रेरक श्लोक भी साझा किया—
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”
इस श्लोक में गुरु के छह स्वरूप बताए गए हैं—प्रेरणा देने वाला, सही दिशा दिखाने वाला, ज्ञान का उपदेशक, मार्गदर्शक, शिक्षक तथा आत्मबोध कराने वाला।
प्रधानमंत्री पिछले कुछ दिनों से भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़े प्रेरक संदेश साझा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने प्रकृति संरक्षण और उत्तम चरित्र पर आधारित संस्कृत श्लोक भी साझा किए थे।

विशेष संपादकीय:
गुरु पूर्णिमा: जब ज्ञान केवल पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि जीवन बन जाता है
भारत को यदि किसी एक परंपरा ने हजारों वर्षों तक जीवित रखा है तो वह है गुरु-शिष्य परंपरा।
आज जब पूरी दुनिया सूचना (Information) से भर चुकी है, तब भी ज्ञान (Wisdom) दुर्लभ है। इंटरनेट हमें उत्तर दे सकता है, लेकिन सही प्रश्न पूछना गुरु ही सिखाता है।
गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है। वे केवल महाभारत के रचयिता नहीं थे, बल्कि उन्होंने वेदों का विभाजन कर ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का महान कार्य किया। इसलिए उन्हें ‘आदि गुरु’ कहा जाता है।
भारत में गुरु का स्थान माता-पिता के समान ही नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुँचाने वाले माध्यम के रूप में माना गया है—
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
यह केवल धार्मिक श्लोक नहीं बल्कि भारतीय शिक्षा दर्शन का मूल सिद्धांत है।
आधुनिक समय में गुरु का अर्थ
आज गुरु केवल विद्यालय के शिक्षक नहीं हैं।
- माता-पिता
- विद्यालय के शिक्षक
- जीवन मार्गदर्शक
- वैज्ञानिक
- कलाकार
- साहित्यकार
- आध्यात्मिक संत
- समाज सुधारक
जो भी व्यक्ति हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है, वह किसी न किसी रूप में हमारा गुरु है।
प्रधानमंत्री का संदेश क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश केवल शुभकामना नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की उस जड़ की याद दिलाता है, जहाँ शिक्षा का उद्देश्य नौकरी नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण माना गया है।
आज Artificial Intelligence के युग में भी एक गुरु की आवश्यकता समाप्त नहीं हुई है।
AI जानकारी दे सकता है।
लेकिन-
- विवेक गुरु देता है।
- संस्कार गुरु देता है।
- चरित्र गुरु गढ़ता है।
- आत्मविश्वास गुरु जगाता है।
गुरु पूर्णिमा हमें क्या सिखाती है?
- ज्ञान के प्रति विनम्रता
- अहंकार का त्याग
- जीवनभर सीखते रहने की प्रेरणा
- अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता
- भारतीय संस्कृति के मूल्यों का सम्मान
भारतीय परंपरा में गुरु
उपनिषदों से लेकर आधुनिक भारत तक—
- महर्षि वेदव्यास
- आदि शंकराचार्य
- स्वामी विवेकानंद
- महात्मा गांधी
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
इन सभी ने गुरु परंपरा को केवल जीवित नहीं रखा बल्कि उसे नई पीढ़ियों तक पहुँचाया।
निष्कर्ष
गुरु पूर्णिमा केवल कैलेंडर का एक पर्व नहीं।
यह स्वयं से पूछने का दिन है—
क्या हम अभी भी सीख रहे हैं?
क्या हम अपने जीवन के गुरुओं के प्रति कृतज्ञ हैं?
और क्या हम स्वयं किसी के जीवन में प्रेरणा बनने का प्रयास कर रहे हैं?
प्रधानमंत्री का संदेश इसी भारतीय चेतना को पुनः जागृत करता है कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह जीवन को बेहतर बनाए।















