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जौहर ट्रस्ट जांच में डमी ट्रस्टियों से पूछताछ तेज , आजम खां के मंत्री कार्यकाल में मिले सरकारी ठेकों का भी खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

जौहर ट्रस्ट जांच में डमी ट्रस्टियों से पूछताछ तेज : ईडी ने ट्रस्ट पदाधिकारियों को किया तलब; कथित डमी ट्रस्टी शहरयार खान से ट्रस्ट के फैसलों और संचालन को लेकर पूछताछ की तैयारी, जल निगम के ठेकों, भुगतान और संबंधित फर्मों की जानकारी भी जुटाई जा रही !

लखनऊ/रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां, उनके परिवार और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामलों की प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की जांच अब ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ-साथ उन लोगों की भूमिका पर भी केंद्रित हो रही है, जिन्हें जांच में कथित तौर पर ‘डमी ट्रस्टी’ बताया गया है। 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने इस सप्ताह जौहर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। इनमें शहरयार खान समेत ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके बारे में आयकर विभाग की जांच के दौरान ट्रस्ट में उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।

रिपोर्ट के अनुसार चौधरी शहरयार सलीम ने आयकर विभाग के समक्ष दिए अपने बयान में कहा था कि ट्रस्ट में उनकी भूमिका केवल नाममात्र की थी। उनके बयान के मुताबिक जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन से संबंधित एक बैठक में उनसे हस्ताक्षर कराए गए और इसके बाद उन्हें जाने दिया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रस्ट के निर्णयों में उनकी कोई वास्तविक भूमिका नहीं थी। अब ईडी की पूछताछ में इस बयान तथा ट्रस्ट के वास्तविक संचालन से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की बात सामने आई है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकारी धन और सरकारी ठेकों से जुड़ा है। रिपोर्ट में आरोपों के संदर्भ में बताया गया है कि रामपुर की कुछ निजी निर्माण कंपनियों को सरकारी काम मिलने और बाद में जौहर ट्रस्ट या जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े निर्माण कार्यों में सरकारी बजट के इस्तेमाल की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स से जुड़े करीब 86 करोड़ रुपये के सरकारी अनुबंधों के इस्तेमाल को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही होगी।

ईडी की जांच का दायरा केवल ट्रस्ट के मौजूदा संचालन तक सीमित नहीं बताया गया है। 26 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी ने आजम खां के मंत्री कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश जल निगम में हुए कार्यों का विस्तृत ब्योरा राज्य सरकार से मांगा है। इसमें निविदाओं, किन फर्मों को काम मिला, कितना भुगतान किया गया, कितने अनुबंध हुए और उस अवधि में जल निगम में किन अधिकारियों की तैनाती थी—जैसी जानकारियां शामिल हैं।

आजम खां वर्ष 2012 से 2017 के बीच नगर विकास विभाग के मंत्री रहे थे। उस समय जल निगम इसी विभाग के अधीन था। ईडी की जांच के संदर्भ में वर्ष 2012 से 2019 के बीच जल निगम से जुड़े कार्यों में कथित अनियमितताओं के सुराग मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि, किसी भी सरकारी ठेके, भुगतान या फर्म को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी की आधिकारिक जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

जौहर विश्वविद्यालय भी इस जांच का एक अहम हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जहीरूद्दीन से पूछताछ की है। उनसे जौहर ट्रस्ट में उनकी भूमिका, कुलपति पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया और विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी विभागों की रकम से बनाए गए बताए जा रहे भवनों से संबंधित सवाल किए गए। इसी दौरान ए एंड एस इंटरप्राइजेज से जुड़े सलीम से भी पूछताछ की गई। रिपोर्ट के अनुसार दोनों से कई घंटे तक पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया।

जौहर ट्रस्ट को लेकर आयकर विभाग की पिछली जांच भी इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग ने ट्रस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कथित बोगस डोनेशन, डमी ट्रस्टी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, सरकारी भूमि से जुड़े विवाद और विश्वविद्यालय के भवनों की लागत समेत कई मुद्दों पर सवाल उठाए थे। विभाग की जांच में ट्रस्ट की ओर से घोषित निर्माण लागत और जांच में सामने आई लागत के बीच बड़ा अंतर होने का भी उल्लेख किया गया था।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार आयकर विभाग ने बाद में जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त किए जाने की जानकारी दी थी और इसके पीछे कई कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। इनमें विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण, सरकारी भूमि, दान की रकम, ट्रस्ट की संरचना और भवन निर्माण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

दान के स्रोत भी जांच का एक अहम हिस्सा बताए जा रहे हैं। 28 सितंबर की रिपोर्ट में कई कंपनियों और व्यक्तियों के नाम दिए गए हैं, जिनके बारे में आयकर जांच के दौरान कथित तौर पर दानदाताओं के रूप में दावे की जांच की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें लखनऊ की पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, मुरादाबाद की सालार ओवरसीज लिमिटेड, दिल्ली की एआर एजूकेशन ट्रस्ट, नोएडा की अर्थ इंफ्राटेक, दिल्ली की रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स और अन्य नाम शामिल हैं। इन दानदाताओं से संबंधित दावों और लेनदेन की वास्तविक स्थिति जांच एजेंसियों के निष्कर्ष से स्पष्ट होगी।

इस पूरे मामले में अब जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान का है। एक तरफ ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कथित डमी ट्रस्टियों से ट्रस्ट के संचालन और फैसलों को लेकर जानकारी ली जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आजम खां के मंत्री कार्यकाल के दौरान जल निगम में हुए सरकारी कार्यों, निविदाओं, ठेकों और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि जांच में किसी व्यक्ति, संस्था या कंपनी से जुड़े आरोप या संदेह अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं। अंतिम स्थिति जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया से निर्धारित होगी।