PM मोदी के Deepfake वीडियो पर खुफिया एजेंसियों का बड़ा दावा, छात्रों को भड़काने की कथित पाकिस्तानी साजिश का आरोप
नई दिल्ली।
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े डीपफेक (Deepfake) वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाए जा रहे हैं। एजेंसियों के अनुसार, इन कथित फर्जी वीडियो का उद्देश्य विशेष रूप से छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम फैलाना तथा उन्हें दोबारा विरोध-प्रदर्शनों के लिए उकसाना है।
अधिकारियों का आरोप है कि ऐसे कई वीडियो कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया खातों के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कहते हुए दिखाया गया है।
एजेंसियों का दावा है कि ये वीडियो वास्तविक नहीं हैं, बल्कि डीपफेक तकनीक और एडिटिंग के जरिए तैयार किए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इन वीडियो का उद्देश्य हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों के बाद युवाओं में दोबारा असंतोष पैदा करना और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित करना है।
पाकिस्तान पर क्या आरोप?
एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी के अनुसार इन वीडियो को कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया नेटवर्क बड़े पैमाने पर साझा कर रहे हैं।
अधिकारी का दावा है कि इस अभियान का मकसद छात्रों का गुस्सा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर मोड़ना और भारत में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल तैयार करना है।
हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
NEET आंदोलन का भी किया गया उल्लेख
खुफिया अधिकारियों के अनुसार हालिया छात्र आंदोलनों का मुख्य मुद्दा NEET परीक्षा में पेपर लीक था।
एजेंसियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक कदमों के बाद स्थिति सामान्य होने लगी थी।
अधिकारियों का दावा है कि अब कथित विदेशी सोशल मीडिया नेटवर्क इस मुद्दे को दोबारा हवा देने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार का क्या कहना है?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दिल्ली सहित कई राज्यों ने भी छात्रों को आश्वस्त किया है कि केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
दिल्ली सरकार ने हाल ही में प्रदर्शन से जुड़े 13 एफआईआर मामलों की कार्यवाही समाप्त करने का भी निर्णय लिया।
Deepfake वीडियो में क्या दावा किया जा रहा है?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह कहते हुए दिखाया गया है कि विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
एजेंसियों का दावा है कि वीडियो में ऑडियो और विजुअल दोनों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
एक अन्य वीडियो में प्रधानमंत्री को भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हुए दिखाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार ये वीडियो वास्तविक नहीं हैं।
पुराने वीडियो से की गई कथित छेड़छाड़
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ वीडियो प्रधानमंत्री के पुराने भाषणों से तैयार किए गए हैं।
इनमें उन अंशों को काटकर और नए ऑडियो जोड़कर ऐसा प्रस्तुत किया गया है मानो प्रधानमंत्री छात्रों के खिलाफ बयान दे रहे हों।
जबकि मूल भाषण में प्रधानमंत्री ने पेपर माफिया के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों के सुझावों का स्वागत किया था।
भारत में भ्रम फैलाने की कोशिश?
एक अधिकारी का दावा है कि हालिया विरोध प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कथित विदेशी नेटवर्क निराश हैं और इसलिए अब फर्जी वीडियो के माध्यम से लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारी के अनुसार इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं और सरकार के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर करना हो सकता है।
लोगों से क्या अपील?
खुफिया एजेंसियों ने नागरिकों, विशेषकर छात्रों से अपील की है कि किसी भी वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें।
एजेंसियों ने कहा है कि यदि कोई संदिग्ध वीडियो दिखाई दे तो उसे बिना सत्यापन के साझा न करें।
Deepfake क्या होता है?
Deepfake ऐसी AI तकनीक है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या वीडियो इस तरह बदला जा सकता है कि वह वास्तविक प्रतीत हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का दुरुपयोग गलत सूचना फैलाने और लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा सकता है।
















