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2035 तक अंतरिक्ष में होगा भारत का अपना स्पेस स्टेशन, 2027 में रवाना होगा पहला मानवयुक्त ‘गगनयान’ मिशन

नई दिल्ली।

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब एक नए ऐतिहासिक दौर में प्रवेश करने जा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) को वर्ष 2035 तक संचालन में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ वर्ष 2027 तक लॉन्च करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पांच मॉड्यूल वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र डिजाइन तैयार कर ली है। सरकार ने BAS-01 के पहले मॉड्यूल के विकास एवं प्रक्षेपण को मंजूरी भी दे दी है।

उन्होंने बताया कि BAS-01 की सिस्टम इंजीनियरिंग, विभिन्न उप-प्रणालियों के विकास और तकनीकी परीक्षण ISRO के अलग-अलग केंद्रों में जारी हैं।

2026 में पहला मानवरहित परीक्षण मिशन

सरकार के अनुसार, 2026 की चौथी तिमाही में पहला मानवरहित परीक्षण मिशन भेजा जाएगा। इस मिशन में ‘व्योममित्र’ (Vyommitra) नामक हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट सहित कई नई तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा।

इसके बाद दो और मानवरहित मिशन संचालित किए जाएंगे, जिनकी संरचना मानवयुक्त मिशन जैसी होगी। इन परीक्षणों की सफलता के बाद 2027 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन लॉन्च किया जाएगा।

गगनयान मिशन की प्रमुख उपलब्धियां

✅ मानव रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3)

  • सभी प्रोपल्शन चरण विकसित
  • संरचनात्मक परीक्षण पूर्ण
  • ग्राउंड टेस्ट सफल

✅ ऑर्बिटल मॉड्यूल

  • क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल तैयार
  • प्रोपल्शन सिस्टम प्रमाणित
  • Environmental Control & Life Support System (ECLSS) का इंजीनियरिंग मॉडल विकसित
  • थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम और एवियोनिक्स परीक्षण सफल

✅ क्रू एस्केप सिस्टम

  • पांच प्रकार की मोटर विकसित
  • सभी स्थैतिक परीक्षण सफल
  • पूरी प्रणाली प्रमाणित

✅ अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण

  • Astronaut Training Centre तैयार
  • Gaganyaan Control Centre स्थापित
  • लॉन्च कॉम्प्लेक्स में आवश्यक संशोधन पूरे

सफल रहे महत्वपूर्ण परीक्षण

ISRO अब तक कई अहम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है-

  • Test Vehicle Mission TV-D1 सफल
  • IADT-01 सफल
  • IADT-02 सफल
  • TV-D2 मिशन की तैयारी जारी

संचार और रिकवरी सिस्टम तैयार

ISRO ने ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क को अंतिम रूप दे दिया है।

  • IDRSS-1 फीडर स्टेशन स्थापित
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग नेटवर्क तैयार
  • समुद्री रिकवरी योजना भी पूरी

20,193 करोड़ रुपये का बजट

सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के आठ मिशनों के लिए 20,193 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन को मंजूरी दी थी।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत इस मिशन में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है-

  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) – नेटवर्क ऑपरेशन सहायता
  • ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी – क्रू रिकवरी
  • फ्रांस की CNES – फ्लाइट सर्जन प्रशिक्षण
  • रूस की रोस्कोस्मोस – अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, फ्लाइट सूट, क्रू सीट, व्यूपोर्ट एवं अन्य तकनीकी सहयोग

क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

गगनयान केवल एक मानव अंतरिक्ष मिशन नहीं बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान की मजबूत नींव माना जा रहा है। 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिनका अपना स्पेस स्टेशन होगा।